हिंदी संस्करण

अध्याय 1

यह एक ऐसा सत्य है जिसे सारी दुनिया मानती है: अच्छी संपत्ति वाले कुँवारे आदमी को पत्नी की ज़रूरत होती ही है। ऐसा आदमी जब किसी नए मोहल्ले में आता है, तो वह क्या सोचता है, क्या महसूस करता है — यह कोई नहीं जानता। फिर भी पड़ोसी परिवारों के मन में यह सत्य इतनी मज़बूती से बैठा होता है कि वे उसे अपनी किसी न किसी बेटी का हक़ मान लेते हैं।

'सुनिए, मिस्टर बेनेट', एक दिन श्रीमती बेनेट ने पति से कहा, 'आपने सुना? नेदरफ़ील्ड पार्क में आख़िर कोई रहने आ रहा है।' मिस्टर बेनेट ने कहा कि उन्होंने नहीं सुना। 'पर यह सच है', पत्नी बोलीं। 'अभी-अभी श्रीमती लॉन्ग आई थीं। उन्होंने मुझे पूरी बात बताई।' मिस्टर बेनेट चुप रहे। 'आप जानना नहीं चाहते कि घर किसने लिया है?' पत्नी ने बेचैन होकर आवाज़ ऊँची की। 'तुम बताना चाहती हो, और मुझे सुनने में कोई हर्ज नहीं।' इतना निमंत्रण काफ़ी था। 'तो सुनिए। श्रीमती लॉन्ग कहती हैं कि नेदरफ़ील्ड को उत्तरी इंग्लैंड के एक बहुत धनी नौजवान ने किराये पर लिया है। सोमवार को वह चार घोड़ों की बग्घी में घर देखने आया। घर उसे इतना पसंद आया कि उसने उसी समय मिस्टर मॉरिस से सौदा पक्का कर लिया। माइकलमस से पहले वह आ जाएगा, और कुछ नौकर अगले हफ़्ते के आख़िर तक पहुँच जाएँगे।'

'नाम क्या है उसका?' 'बिंगली।' 'शादीशुदा है या कुँवारा?' 'अरे, कुँवारा है जी, और क्या! बड़ी संपत्ति वाला कुँवारा — साल के चार-पाँच हज़ार पाउंड। हमारी बेटियों के लिए कैसी बढ़िया बात है!' 'कैसे? उनका इससे क्या लेना-देना?' 'मिस्टर बेनेट', पत्नी ने जवाब दिया, 'आप भी हद करते हैं! आप ख़ूब जानते हैं कि मैं सोच रही हूँ, वह हमारी किसी बेटी से ब्याह करे।' 'क्या वह इसी इरादे से यहाँ बसने आया है?' 'इरादा! क्या बेतुकी बात है! पर हो सकता है, वह हमारी किसी बेटी से प्रेम करने लगे। इसीलिए उनके आते ही आपको उनसे मिलने जाना चाहिए।'

'मुझे इसकी ज़रूरत नहीं दिखती। तुम बेटियों को लेकर चली जाओ, या उन्हें अकेले भेज दो। शायद यही बेहतर होगा: तुम बेटियों जितनी ही सुंदर हो, कहीं मिस्टर बिंगली को सबसे ज़्यादा तुम्हीं न पसंद आ जाओ।' 'आप मेरी बड़ाई कर रहे हैं। कभी मुझमें भी सुंदरता थी, यह सच है। पर अब मैं ख़ुद को कुछ ख़ास नहीं समझती। जिस औरत की पाँच जवान बेटियाँ हों, उसे अपने रूप की चिंता छोड़ देनी चाहिए।' 'ऐसी हालत में औरत के पास सोचने लायक़ रूप बचा भी कहाँ होता है।' 'पर सुनिए, मिस्टर बिंगली के आने पर आप उनसे मिलने ज़रूर जाइए।' 'पहले ही कह दूँ — यह वादा मैं नहीं कर सकता।' 'अपनी बेटियों का तो सोचिए। किसी एक के लिए यह कैसा रिश्ता होगा, सोचिए तो सही। सर विलियम और लेडी लुकास केवल इसी वजह से जाने वाले हैं, जबकि वे नए लोगों से मिलने कभी नहीं जाते। आपको जाना ही होगा। आप नहीं जाएँगे तो हम उनसे मिलने जा ही नहीं सकतीं।' 'तुम शिष्टाचार को ज़रूरत से ज़्यादा मानती हो। मिस्टर बिंगली तुम सबसे मिलकर ज़रूर ख़ुश होंगे। मैं तुम्हारे हाथ उनके नाम दो पंक्तियाँ भेज दूँगा — मेरी जिस बेटी को वे चुनें, ब्याह के लिए मेरी राज़ी-ख़ुशी सहमति है। हाँ, अपनी छोटी लिज़ी के लिए एक अच्छा शब्द ज़रूर लिखूँगा।' 'ख़बरदार, ऐसा मत कीजिएगा। लिज़ी बाक़ियों से ज़रा भी बेहतर नहीं। न जेन की आधी सुंदरता है उसमें, न लिडिया का आधा उल्लास। पर आप हमेशा उसी का पक्ष लेते हैं।' 'सिफ़ारिश लायक़ बात किसी में ख़ास नहीं', उन्होंने जवाब दिया। 'सब वैसी ही नादान और अनजान हैं, जैसी और घरों की लड़कियाँ। बस लिज़ी अपनी बहनों से कुछ ज़्यादा हाज़िर-जवाब है।'

'मिस्टर बेनेट, आप अपनी ही बच्चियों को यों कैसे गिरा सकते हैं? आपको मुझे चिढ़ाने में मज़ा आता है। मेरी बेचारी नसों पर आपको ज़रा भी तरस नहीं आता।' 'तुम ग़लत समझती हो। मैं तुम्हारी नसों की बड़ी क़द्र करता हूँ। वे मेरी पुरानी दोस्त हैं। बीस साल से मैं तुमसे उन्हीं का हाल पूरे ध्यान से सुनता आ रहा हूँ।' 'हाय, आप नहीं जानते मैं कितना सहती हूँ!' 'फिर भी उम्मीद है, तुम सँभल जाओगी — और जीते-जी देखोगी कि साल के चार हज़ार पाउंड वाले नौजवान इस इलाक़े में कतार लगाए चले आ रहे हैं।' 'ऐसे बीस भी आ जाएँ तो क्या फ़ायदा, जब आप उनसे मिलने ही नहीं जाएँगे।' 'भरोसा रखो। पूरे बीस हो जाएँगे, तो मैं एक-एक से मिल आऊँगा।' मिस्टर बेनेट अजब आदमी थे। तेज़ बुद्धि, चुभता मज़ाक़, चुप्पी और मनमौजीपन — सब उनमें ऐसे घुले-मिले थे कि तेईस साल साथ रहकर भी पत्नी उन्हें पूरा समझ नहीं पाई थीं। पत्नी का मन समझना कहीं आसान था। समझ उथली, जानकारी थोड़ी, मिज़ाज बदलता हुआ। कोई बात बिगड़ती, तो वे मान लेतीं कि उनकी नसों का दौरा पड़ गया है। बेटियों का ब्याह कराना उनके जीवन का सबसे बड़ा काम था; पड़ोस में आना-जाना और नई ख़बरें सुनना उनका सबसे बड़ा सुख।