हिंदी संस्करण

अध्याय 2

जो लोग मिस्टर बिंगली से मिलने गए, उनमें मिस्टर बेनेट काफ़ी जल्दी जाने वालों में थे। जाने का इरादा उनका शुरू से था, पर पत्नी से आख़िर तक यही कहते रहे कि वे नहीं जाएँगे। इसलिए श्रीमती बेनेट को, पति के जाने के अगले दिन शाम तक, इसकी ख़बर ही नहीं हुई। बात यों खुली। मिस्टर बेनेट ने अपनी दूसरी बेटी को टोपी सजाते देखा, तो अचानक बोल पड़े। 'लिज़ी, उम्मीद है, मिस्टर बिंगली को तुम्हारी यह टोपी पसंद आएगी।' 'हमें क्या पता कि मिस्टर बिंगली को क्या पसंद है?' माँ ने चिढ़कर कहा। 'हम उनसे मिलने तो जा ही नहीं सकते।' 'पर माँ, आप भूल रही हैं।' एलिज़ाबेथ ने कहा। 'हम उनसे नाच में मिलेंगे, और श्रीमती लॉन्ग ने परिचय कराने का वादा किया है।' 'मुझे नहीं लगता कि श्रीमती लॉन्ग ऐसा कुछ करेंगी। उसकी अपनी भी दो भतीजियाँ हैं। स्वार्थी और ढोंगी औरत है वह। मैं उसे ज़रा भी अच्छा नहीं समझती।' 'मैं भी नहीं।' मिस्टर बेनेट ने कहा। 'मुझे ख़ुशी है कि तुम उसकी मदद का भरोसा नहीं रखती।'

श्रीमती बेनेट ने ऐसा भाव दिखाया मानो जवाब देना भी बेकार हो। पर मन का उबाल रोक न सकीं और एक बेटी को डाँटने लगीं। 'किटी, भगवान के लिए यों लगातार मत खाँसो! ज़रा अपनी माँ की नसों का भी ख़याल करो। तुम मेरी नसों की धज्जियाँ उड़ा रही हो।' 'किटी खाँसने में कोई विवेक नहीं रखती।' पिता ने कहा। 'हमेशा ग़लत मौक़ा चुनती है।' 'मैं कोई शौक़ से थोड़े खाँसती हूँ।' किटी ने चिढ़कर कहा। 'लिज़ी, अगला नाच कब है?' 'कल से दो हफ़्ते बाद।' 'हाँ, यही तो!' माँ चिल्लाईं। 'और श्रीमती लॉन्ग ठीक एक दिन पहले ही लौटेंगी। तो उनके लिए मिस्टर बिंगली से परिचय कराना नामुमकिन होगा। वे ख़ुद ही उन्हें नहीं जानतीं।' 'तो फिर, मेरी प्यारी, तुम अपनी सहेली से पहले ही मौक़ा हथिया लो और मिस्टर बिंगली का परिचय उन्हीं से करा दो।' 'बेतुकी बात, मिस्टर बेनेट, बिलकुल बेतुकी बात। जब मैं ख़ुद ही उन्हें नहीं जानती, तो परिचय कैसे कराऊँ? आप किसी को ऐसे कैसे चिढ़ा सकते हैं?' 'तुम्हारी सावधानी सचमुच आदर के लायक़ है। दो हफ़्ते की जान-पहचान वाक़ई बहुत कम होती है। दो हफ़्तों में कोई किसी आदमी को सच में जान भी नहीं सकता। पर हम आगे नहीं बढ़ेंगे, तो कोई और बढ़ेगा। आख़िर श्रीमती लॉन्ग और उसकी भतीजियों को भी अपनी क़िस्मत आज़माने का हक़ है। तुम यह काम छोड़ दोगी, तो वह इसे तुम्हारी मेहरबानी ही समझेगी। इसलिए यह ज़िम्मा मैं ख़ुद उठा लूँगा।'

बेटियाँ पिता को टकटकी लगाए देखती रहीं। श्रीमती बेनेट बस यही कहती रहीं, 'बेतुकी बात, बेतुकी बात!' 'इतने ज़ोर से कही इस बात का मतलब क्या है?' मिस्टर बेनेट ने पूछा। 'क्या परिचय की रस्म, और लोग उसे जो अहमियत देते हैं — यह सब तुम्हें बेतुका लगता है? इस बात पर मैं तुमसे पूरी तरह सहमत नहीं हो सकता। मैरी, तुम क्या कहती हो? तुम तो गहरी सोच वाली युवती हो। बड़ी-बड़ी किताबें पढ़ती हो और उनके अच्छे अंश चुनकर लिख भी लेती हो।' मैरी कुछ बहुत समझदारी की बात कहना चाहती थी। पर उसे सूझा ही नहीं कि क्या कहे। 'जब तक मैरी अपने विचार जमा रही है,' मिस्टर बेनेट ने बात आगे बढ़ाई, 'चलो, मिस्टर बिंगली की बात पर लौटें।' 'मैं मिस्टर बिंगली के नाम से तंग आ चुकी हूँ।' पत्नी चिल्लाईं। 'यह सुनकर अफ़सोस हुआ। पर तुमने पहले क्यों नहीं बताया? आज सुबह मालूम होता, तो मैं हरगिज़ उनसे मिलने न जाता। बड़े अफ़सोस की बात है। पर अब हो ही आया हूँ, तो उनसे जान-पहचान होने से बचा नहीं जा सकता।'

महिलाएँ ठीक वैसे ही चकित हुईं जैसा वे चाहते थे। श्रीमती बेनेट शायद सबसे बढ़कर। ख़ुशी भरा पहला शोर थमा, तो वे कहने लगीं कि उन्हें तो शुरू से पता था कि यही होगा। 'कितना अच्छा किया आपने, मेरे प्यारे मिस्टर बेनेट! मुझे पता था कि आख़िरकार मैं आपको मना ही लूँगी। मुझे यक़ीन था कि आप अपनी बेटियों से इतना प्यार करते हैं कि ऐसा नाता यों ही हाथ से जाने नहीं देंगे। आह, कितनी ख़ुशी की बात है! और आज सुबह हो आए, फिर भी अब तक एक शब्द नहीं कहा — कैसा मज़ेदार मज़ाक़ है!' 'अब किटी, जितना जी चाहे खाँस लो।' मिस्टर बेनेट ने यह कहा और पत्नी की ख़ुशी से थककर कमरे से बाहर निकल गए।

दरवाज़ा बंद हुआ तो श्रीमती बेनेट बोलीं, 'बेटियो, तुम्हारे पिता सचमुच बड़े अच्छे इंसान हैं। पता नहीं तुम उनकी इस मेहरबानी का बदला कैसे चुकाओगी — और इस माँ की भी। हमारी उम्र में रोज़-रोज़ नए लोगों से मिलना कोई इतना सुखद नहीं होता। पर तुम्हारे लिए हम कुछ भी करेंगे। लिडिया, मेरी जान, तुम सबसे छोटी ज़रूर हो, पर हो सकता है, अगले नाच में मिस्टर बिंगली तुम्हारे ही साथ नाचें।' 'ओह,' लिडिया ने पूरे भरोसे से कहा, 'मुझे इसकी फ़िक्र नहीं। मैं सबसे छोटी ज़रूर हूँ, पर क़द में सबसे लंबी हूँ।' शाम का बाक़ी वक़्त यही अंदाज़ा लगाने में बीता कि मिस्टर बिंगली कितनी जल्दी मिस्टर बेनेट की भेंट का जवाब देने आएँगे, और यह तय करने में कि उन्हें खाने पर कब बुलाया जाए।