हिंदी संस्करण

अध्याय 9

एलिज़ाबेथ ने वह रात ज़्यादातर अपनी बहन के कमरे में बिताई। सुबह बहुत जल्दी मिस्टर बिंगली ने एक नौकरानी भेजकर हालचाल पूछा। एलिज़ाबेथ को यह जवाब भेजकर ख़ुशी हुई कि जेन कुछ ठीक-ठाक है। थोड़ी देर बाद उनकी बहनों की दो सजी-धजी नौकरानियाँ भी हाल पूछने आईं। जेन कुछ बेहतर थी, पर एलिज़ाबेथ ने लॉन्गबर्न चिट्ठी भेजने को कहा। माँ जेन को देखने आएँ और ख़ुद हाल देख लें। यही लिखना था। चिट्ठी तुरंत भेज दी गई। विनती भी उतनी ही जल्दी मान ली गई। श्रीमती बेनेट दोनों सबसे छोटी बेटियों को लेकर नेदरफ़ील्ड वालों के नाश्ता ख़त्म होते ही पहुँच गईं। जेन साफ़ बहुत बीमार दिखती, तो श्रीमती बेनेट बहुत दुखी होतीं। पर बेटी को देखकर उन्हें लगा कि चिंता करने जितनी हालत नहीं है। फिर तुरंत अच्छा होने की चाह जाती रही। तबीयत लौटी तो नेदरफ़ील्ड छूटने की संभावना ज़्यादा थी। इसलिए बेटी घर ले चलने को कहे, तो भी श्रीमती बेनेट ने सुनना न चाहा। उसी वक़्त आए वैद्य ने भी कहा कि ले जाना क़तई ठीक नहीं। जेन के पास थोड़ी देर बैठी माँ और तीन बेटियाँ मिस बिंगली के आने और बुलाने पर नाश्ते के कमरे चली गईं। बिंगली ने इस उम्मीद से उनका स्वागत किया कि श्रीमती बेनेट को मिस बेनेट की हालत सोचे से बुरी न लगी हो। 'असल में सोचे से भी बुरी है', श्रीमती बेनेट ने जवाब दिया। 'हिलाने लायक़ हालत नहीं है। मिस्टर जोन्स ने भी कहा है कि जेन को ले जाने का ख़याल तक न करें। आपकी मेहरबानी पर थोड़ा और बोझ डालना पड़ेगा।' 'ले जाना!' बिंगली चिल्लाए। 'ऐसा ख़याल तो कभी नहीं आना चाहिए। मेरी बहन भी मिस बेनेट को ले जाने की बात कभी नहीं मानेंगी।' 'श्रीमती बेनेट, आप निश्चिंत रहिए', मिस बिंगली ने ठंडे शिष्टाचार से कहा। 'जब तक मिस बेनेट हमारे घर रहेंगी, उन्हें हर संभव देखभाल मिलेगी।' श्रीमती बेनेट ने हद से ज़्यादा शुक्रिया अदा किया।

'ऐसे अच्छे दोस्त न होते तो जेन का क्या होता, मैं नहीं कह सकती', उन्होंने आगे कहा। 'बीमारी सचमुच भारी है और बहुत कष्ट होगा, फिर भी वह दुनिया की सबसे सब्र वाली लड़की की तरह सह रही है। वह हमेशा ऐसी ही है। मैंने जितनों को देखा, उनमें सबसे कोमल दिल की है। दूसरी बेटियों से भी मैं अक्सर कहती हूँ, तुम जेन के आगे कुछ नहीं। मिस्टर बिंगली, यह कमरा सचमुच प्यारा है। कंकड़ वाली राह के उस पार का नज़ारा भी कमाल का है। इस मुल्क़ में नेदरफ़ील्ड जैसा और कोई स्थान नहीं लगता। किराये की मुद्दत छोटी ज़रूर है, पर मैं आशा करती हूँ आप जल्दी जाने का ख़याल नहीं करेंगे।' 'जो कुछ करता हूँ, जल्दी ही करता हूँ', बिंगली ने जवाब दिया। 'इसलिए नेदरफ़ील्ड छोड़ने का मन बना लिया, तो शायद पाँच मिनट में ग़ायब हो चुका हूँगा। पर अभी तो मुझे लगता है कि मैं यहाँ पूरी तरह बस गया हूँ।' 'आप बिल्कुल वैसे ही हैं जैसा मैंने सोचा था', एलिज़ाबेथ बोली। 'मतलब आप मुझे समझने लगी हैं?' बिंगली उसकी ओर मुड़कर पुकारे। 'हाँ, बिल्कुल। मैं आपको पूरी तरह समझती हूँ।' 'काश मैं इसे तारीफ़ मान पाऊँ। पर इतनी आसानी से जिसे पढ़ लिया जाए, उसके लिए यह शायद अफ़सोस की बात है।' 'यह मौक़े पर निर्भर है। पेचीदा और मुश्किल स्वभाव होना अपने आप में आपके जैसे स्वभाव से बेहतर या बुरा नहीं होता।' 'लिज़ी', माँ पुकार उठीं। 'तुम्हें याद रहे कि तुम कहाँ हो। घर पर हम जैसे छोड़ देते हैं, वैसी बेरोक-टोक बात यहाँ मत करो।' 'मुझे नहीं मालूम था कि आप स्वभाव पढ़ती हैं', बिंगली ने तुरंत बात बढ़ाई। 'दिलचस्प पढ़ाई लगती है।' 'हाँ। पर पेचीदा स्वभाव सबसे दिलचस्प होते हैं। कम से कम यह तो है।' 'गाँव में', डार्सी बोले, 'ऐसी पड़ताल के विषय अमूमन बहुत कम मिलते हैं। देहात के इलाक़े में समाज बहुत छोटा रहता है, और बदलता भी बहुत कम है।' 'पर इंसान ख़ुद इतने बदलते हैं कि हमेशा कुछ नया देखने को मिलता रहता है।'

'हाँ, बिल्कुल', डार्सी के देहात वाली बात के ढंग से नाराज़ श्रीमती बेनेट पुकार उठीं। 'मैं दावे से कहती हूँ, देहात में भी ऐसी बातें लंदन जितनी ही होती हैं।' सब हैरान रह गए। डार्सी ने उन्हें एक पल देखा, फिर चुपचाप मुँह फेर लिया। श्रीमती बेनेट को लगा कि वे डार्सी को पूरी तरह कुचल चुकी हैं। सो वे उसी रौ में आगे बढ़ीं। 'मेरे ख़याल से दुकानों और सार्वजनिक जगहों के सिवा लंदन देहात से कुछ ख़ास बेहतर नहीं। देहात कहीं ज़्यादा सुहावना है न, मिस्टर बिंगली?' 'जब मैं देहात में होता हूँ', बिंगली ने जवाब दिया, 'तो वहाँ से जाने का मन बिलकुल नहीं करता। लंदन में भी लगभग वैसा ही है। दोनों की अपनी ख़ूबियाँ हैं, इसलिए मैं दोनों जगह बराबर ख़ुश रह सकता हूँ।' 'हाँ, यह आपके सही स्वभाव की वजह से है। पर वह सज्जन', उन्होंने डार्सी की तरफ़ देखकर कहा, 'देहात को कुछ नहीं समझते लग रहे थे।' 'सच में माँ, आपने ग़लत समझा', माँ की वजह से लाल हुई एलिज़ाबेथ बोली। 'आप मिस्टर डार्सी की बात पूरी तरह गलत समझ गईं। उनका मतलब बस यह था कि लंदन जितने तरह-तरह के लोग देहात में मिलना मुश्किल है। यह बात आपको भी सच माननी चाहिए।' 'हाँ बेटी, बिल्कुल। ऐसा किसी ने नहीं कहा। पर अगर बात यह है कि इस इलाक़े में बहुत लोग नहीं मिलते, तो इससे बड़ा इलाक़ा शायद ही कोई हो। हमारे साथ खाना खाने वाले घर ही चौबीस हैं।' एलिज़ाबेथ की फ़िक्र न होती तो बिंगली भी हँसी रोक न पाते। उनकी बहन उतनी विचारशील न थीं। उन्होंने बहुत मतलब भरी मुस्कान के साथ मिस्टर डार्सी की तरफ़ नज़र दौड़ाई। माँ का ध्यान मोड़ने को कोई बात निकालते हुए एलिज़ाबेथ ने पूछा कि उसके जाने के बाद शार्लट लुकास लॉन्गबर्न आई थी या नहीं।

'हाँ। कल अपने पिता के साथ आई थी। मिस्टर बिंगली, सर विलियम सचमुच बहुत अच्छे लगते हैं, है न? कितने सलीके के सज्जन हैं! शानदार भी, सहज भी। हर किसी से बात निकाल ही लेते हैं। अच्छी शिष्टता मेरे हिसाब से यही है। जो अपने को बड़ा समझकर मुँह नहीं खोलते, वे शिष्टता को बिलकुल नहीं समझते।' 'शार्लट ने साथ खाना खाया?' 'नहीं, उसे घर जाना था। लगता है मिन्सपाई बनाने में उसकी ज़रूरत थी। मिस्टर बिंगली, हमारे घर नौकर हमेशा ऐसे रखे जाते हैं कि अपना काम ख़ुद कर सकें। मैंने बेटियों को और ढंग से पाला है। पर यह हर किसी का अपना फ़ैसला है। लुकास घर की लड़कियाँ भी बहुत भली हैं, यह मैं दावे से कहती हूँ। बस अफ़सोस यह है कि सुंदर नहीं! मेरा मतलब यह नहीं कि शार्लट को मैं बहुत भद्दी समझती हूँ। वह हमारी ख़ास सहेली है।' 'वे बहुत हँसमुख जवान औरत लगती हैं', बिंगली बोले। 'हाँ हाँ, ठीक है। पर यह तो मानिए कि वह लड़की बहुत भद्दी है। लेडी लुकास ख़ुद अक्सर यही कहती थीं, और जेन की सूरत को लेकर मुझसे ईर्ष्या करती थीं। मैं अपनी बेटी की शेखी नहीं मारना चाहती, पर जेन से सुंदर शख़्स अक्सर नहीं दिखता। सब यही कहते हैं। यह सिर्फ़ मेरे पक्षपात की बात नहीं। जब जेन महज़ पंद्रह साल की थी, लंदन में मेरे भाई मिस्टर गार्डिनर के घर एक सज्जन थे जो जेन पर मर मिटते थे। मेरी भाभी पक्की थीं कि हम जाने से पहले वे प्रस्ताव रख देंगे। पर प्रस्ताव नहीं आया। शायद उन्हें लड़की छोटी लगी हो। फिर भी उन्होंने जेन पर कुछ कविताएँ लिखीं, और वे बहुत ख़ूबसूरत थीं।' 'और यूँ ही उनका प्यार भी ख़त्म हो गया', एलिज़ाबेथ ने अधीर होकर कहा। 'इसी तरह प्यार पर काबू पाने वाले और भी बहुत रहे होंगे। प्यार भगाने में कविता कितनी कारगर है, यह पहले किसने जाना होगा!' 'मैं तो समझता रहा हूँ कि कविता प्यार की खुराक है', डार्सी बोले। 'अगर प्यार बढ़िया, मज़बूत और सेहतमंद हो तो हो सकता है। जो पहले से मज़बूत है, वह हर चीज़ से और बढ़ता है। पर अगर बस हल्की-पतली पसंद हो, तो एक अच्छी सोनेट भी उसे भूखा मारकर मिटा दे। यह मुझे यक़ीन है।'

डार्सी ने बस मुस्करा दिया। फिर सब चुप हो गए तो एलिज़ाबेथ का दिल काँपा। कहीं माँ फिर शर्मिंदगी न खड़ी कर दें। बोलना चाहती थी, पर कोई बात सूझी नहीं। थोड़ी चुप्पी के बाद श्रीमती बेनेट ने जेन पर मेहरबानी करने के लिए मिस्टर बिंगली का फिर शुक्रिया अदा किया। लिज़ी के बोझ डालने की माफ़ी भी माँगी। मिस्टर बिंगली ने बिना बनावट के विनम्र जवाब दिया। फिर बहन से भी शिष्टाचार निभाते हुए मौक़े की बात कहलवाई। मिस बिंगली ने ज़्यादा मिठास के बिना भी अपना हिस्सा निभाया। श्रीमती बेनेट संतुष्ट हुईं और जल्दी गाड़ी तैयार करने को कहा। उसी इशारे पर सबसे छोटी बेटी आगे आई। दोनों लड़कियाँ पूरी मुलाक़ात एक-दूसरे से कानाफूसी करती रही थीं। नतीजा यह निकला कि सबसे छोटी मिस्टर बिंगली से वह वादा याद दिलाए जो उन्होंने पहली बार आने पर नेदरफ़ील्ड में नृत्य-गोष्ठी रखने का किया था। लिडिया पंद्रह साल की लड़की थी। रंगत अच्छी, चेहरा खुशमिज़ाज, बदन मज़बूत और क़द अच्छा। माँ के लाड़ से वह छोटी उम्र में ही समाज में आ गई थी। उसमें जोश बहुत था, और जन्मजात घमंड जैसा कुछ भी। मौसा के बढ़िया खाने और अपनी बेझिझक चाल से जब अफ़सर उसकी ओर झुके, तो वह घमंड हिम्मत बन गया। इसलिए नृत्य-गोष्ठी की बात पर मिस्टर बिंगली से बोलना उसके बस की बात थी। लिडिया ने अचानक वह वादा याद दिला दिया। और कहा कि न निभाया तो दुनिया की सबसे शर्म की बात होगी। इस झपट्टे पर बिंगली ने जो जवाब दिया, वह माँ के कानों को भा गया। 'वह वादा निभाने को मैं पूरी तरह तैयार हूँ, यह दावे से कहता हूँ। आपकी बहन अच्छी हो जाए, तो चाहें तो नृत्य-गोष्ठी की तारीख़ भी आप ख़ुद तय कर लीजिए। पर बहन के बीमार रहते आप नाचना नहीं चाहेंगी न?' लिडिया ने कहा कि उसे मंज़ूर है। 'हाँ, जेन के अच्छे होने तक इंतज़ार ही बेहतर है। तब तक कैप्टन कार्टर के मेरिटन लौट आने की भी अच्छी उम्मीद है। और मिस्टर बिंगली जब नृत्य-गोष्ठी रख लेंगे', उसने आगे कहा, 'तो मैं अफ़सरों से भी ज़रूर नृत्य-गोष्ठी रखने को कहूँगी। कर्नल फ़ॉर्स्टर से कहूँगी कि न रखें तो बड़ी शर्म की बात होगी।' श्रीमती बेनेट और बेटियाँ उसके बाद लौट गईं। एलिज़ाबेथ जल्दी जेन के पास वापस चली गई। अपना और रिश्तेदारों का बर्ताव उन दोनों महिलाओं और मिस्टर डार्सी की राय पर छोड़ दिया। पर मिस बिंगली 'सुंदर आँखें' की चाहे जितनी चतुराई से हँसी उड़ाएँ, डार्सी एलिज़ाबेथ की निंदा में शामिल होने के किसी बहकावे में न आए।