हिंदी संस्करण

अध्याय 8

शाम के पाँच बजे नेदरफ़ील्ड की दोनों महिलाएँ कपड़े बदलने चली गईं। साढ़े छह बजे एलिज़ाबेथ को खाने पर नीचे बुलाया गया। सबने शिष्टाचार के नाते मिस बेनेट का हाल पूछा। एलिज़ाबेथ को यह देखकर ख़ुशी हुई कि मिस्टर बिंगली बाक़ियों से कहीं ज़्यादा सच्चे मन से चिंतित थे। पर वह अच्छा जवाब न दे सकी। जेन की हालत ज़रा भी सुधरी नहीं थी। यह सुनकर दोनों बहनों ने तीन-चार बार दोहराया कि उन्हें कितना अफ़सोस है, बुरा ज़ुकाम लगना कितना भयानक होता है, और वे ख़ुद बीमार पड़ना कितना नापसंद करती हैं। फिर उन्होंने इस बात को भुला दिया। जेन के सामने न होने पर उनकी यह बेपरवाही देखकर एलिज़ाबेथ के मन में शुरू की सारी नापसंदगी फिर पूरी तरह लौट आई। उस मंडली में सिर्फ़ उनके भाई ही थे, जिन्हें एलिज़ाबेथ थोड़ा-बहुत अच्छा मान सकती थी। यह साफ़ था कि वे जेन की चिंता करते थे। एलिज़ाबेथ के साथ उनका सुलूक भी बहुत अच्छा था। इसलिए बाक़ी लोग उसे अनचाही मेहमान समझते हैं, यह सोचकर भी वह उतनी बेचैन न थी। बिंगली के सिवा किसी ने उसकी ख़ास परवाह न की। मिस बिंगली मिस्टर डार्सी में खोई हुई थीं, और उनकी बड़ी बहन भी लगभग वैसी ही थीं। एलिज़ाबेथ के पास बैठे मिस्टर हर्स्ट एक आलसी आदमी थे, जो बस खाने-पीने और ताश खेलने के लिए जीते थे। जब उन्हें पता चला कि एलिज़ाबेथ रागू से सादा खाना ज़्यादा पसंद करती है, तो उनके पास उससे कहने को कुछ न बचा।

खाना ख़त्म होते ही एलिज़ाबेथ सीधी जेन के पास लौट गई। वह कमरे से निकली भी न थी कि मिस बिंगली ने उसकी बुराई शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि एलिज़ाबेथ के तौर-तरीक़े सचमुच बहुत ख़राब हैं। घमंड और गुस्ताख़ी का मेल हैं। न बातचीत का हुनर है, न सलीक़ा, न रुचि, न सुंदरता। श्रीमती हर्स्ट भी यही सोचती थीं, और उन्होंने आगे जोड़ा। 'एक शब्द में, अच्छा चल लेने के सिवा उसमें दिखाने लायक़ कुछ भी नहीं। आज सुबह का उसका हुलिया मैं कभी नहीं भूलूँगी। सच, वह लगभग जंगली-सी लग रही थी।' 'सच में, लुइज़ा। मुझसे हँसी रोकना भी मुश्किल था। यहाँ तक आना ही बेहद बेवक़ूफ़ी थी! बहन को ज़ुकाम हुआ है, तो उसे देहाती रास्तों पर यूँ दौड़ना क्यों ज़रूरी था? और बाल कितने बिखरे और उलझे हुए थे!' 'हाँ, और पेटीकोट भी। पेटीकोट देखा था न? किनारे से पूरे छह इंच ऊपर तक कीचड़ में सना था, यक़ीन मानो। उसे छिपाने के लिए जो गाउन नीचे किया गया था, वह भी कुछ काम न आया।' 'लुइज़ा, तुम्हारी खींची तस्वीर बिलकुल सही भी हो,' बिंगली बोले, 'तो भी मुझे तो इसमें से कुछ न दिखा। आज सुबह कमरे में आई मिस एलिज़ाबेथ बेनेट मुझे ख़ास तौर पर सुंदर लगीं। मैला पेटीकोट मेरी नज़र में ज़रा भी न आया।' 'आपने तो ज़रूर देखा होगा, मिस्टर डार्सी,' मिस बिंगली बोलीं। 'और आप यह भी न चाहेंगे कि आपकी बहन ऐसे हाल में सामने आए।' 'बिलकुल नहीं चाहूँगा।' 'तीन मील या चार या पाँच, जो भी दूरी हो, टख़नों तक कीचड़ में धँसते हुए पैदल आना! और अकेली, एकदम अकेली! उसके दिमाग़ में क्या था? इसमें तो एक घिनौने ढंग की मनमानी आज़ादी झलकती है। शिष्टाचार की ज़रा परवाह न करने वाला, निरा देहाती रवैया।' 'इसमें अपनी बहन के लिए प्यार दिखता है, और वह देखने में बहुत भला लगता है,' बिंगली बोले। 'मिस्टर डार्सी,' मिस बिंगली ने धीमे स्वर में कहा, 'मुझे डर है कि इस कारनामे से उन सुंदर आँखों के लिए आपकी सराहना कुछ कम हो गई होगी।' 'ज़रा भी नहीं,' डार्सी बोले। 'कसरत से वे और चमक उठी थीं।' थोड़ी चुप्पी के बाद श्रीमती हर्स्ट फिर बोलीं। 'मुझे जेन बेनेट बहुत अच्छी लगती हैं। सचमुच प्यारी लड़की हैं। मैं दिल से चाहती हूँ कि उन्हें कोई अच्छा घर मिले। पर ऐसे माँ-बाप और इतने नीचे दर्जे के रिश्तेदारों के साथ, मुझे डर है कि इसकी कोई उम्मीद नहीं।' 'तुम्हीं ने कहा था न कि उनका मौसा मेरिटन में वकील है?' 'हाँ। और उनका एक मामा भी है, जो कहीं चीपसाइड के पास रहता है।' 'वाह, क्या बात है,' छोटी बहन ने जोड़ा। दोनों औरतें ज़ोर से हँस पड़ीं। 'उनके इतने मामा हों कि पूरा चीपसाइड भर जाए,' बिंगली पुकार उठे, 'तब भी उन लड़कियों का आकर्षण रत्ती भर न घटे।' 'पर इससे दुनिया में किसी भी हैसियत वाले आदमी से शादी की उनकी उम्मीद तो बहुत घट ही जाएगी,' डार्सी बोले। बिंगली ने इसका जवाब न दिया। उनकी बहनें दिल से हाँ में हाँ मिलाती रहीं। और अपनी प्यारी सहेली के तुच्छ रिश्तेदारों का मज़ाक उड़ा-उड़ाकर देर तक बहलती रहीं।

पर खाने के कमरे से निकलते ही दोनों ने फिर से प्यार-भरा रवैया अपना लिया और जेन के कमरे में चली गईं। कॉफ़ी पर बुलाए जाने तक वे उसके पास बैठी रहीं। जेन की हालत अब भी बहुत ख़राब थी। देर शाम बहन को सोता देखकर एलिज़ाबेथ को चैन मिला। तब जाकर वह कमरे से निकली। नीचे जाना उसे अच्छा लगता था, इसलिए नहीं; बल्कि इसलिए कि यही ठीक लगा। बैठक में सब लू खेल रहे थे — ताश का एक खेल। उसे तुरंत साथ खेलने को कहा गया, पर दाँव बड़े लग रहे थे, इसलिए उसने मना कर दिया। बहन का बहाना बनाकर कहा कि नीचे जितनी थोड़ी देर रह सकेगी, किताब पढ़कर बिताएगी। मिस्टर हर्स्ट उसे हैरान आँखों से देखने लगे। 'क्या आपको ताश से ज़्यादा किताब पढ़ना पसंद है?' वे बोले। 'बड़ी अनोखी बात है।' 'मिस एलिज़ा बेनेट ताश को तुच्छ समझती हैं,' मिस बिंगली बोलीं। 'बड़ी पढ़ाकू हैं, और किसी बात में उन्हें मज़ा नहीं आता।' 'न मैं ऐसी तारीफ़ की हक़दार हूँ, न ऐसी निंदा की,' एलिज़ाबेथ बोल उठी। 'मैं कोई बड़ी पढ़ाकू नहीं। और मुझे बहुत सी बातों में मज़ा आता है।' 'अपनी बहन की देखभाल में तो आपको ज़रूर ख़ुशी मिलती होगी,' बिंगली बोले। 'और उन्हें पूरी तरह स्वस्थ देखकर यह ख़ुशी जल्द ही और बढ़े, यही मेरी कामना है।' एलिज़ाबेथ ने दिल से धन्यवाद कहा और उस मेज़ की ओर चल दी, जिस पर कुछ किताबें रखी थीं। बिंगली ने तुरंत कहा कि वे अपनी लाइब्रेरी से जितनी चाहे और किताबें ला देंगे। 'काश मेरे पास और किताबें होतीं — आपके काम भी आतीं और मेरी इज़्ज़त भी रहती। पर मैं आलसी आदमी हूँ। किताबें ज़्यादा तो नहीं हैं, फिर भी जितनी मैंने कभी खोलकर देखी हैं, उससे ज़्यादा हैं।' एलिज़ाबेथ ने कहा कि इसी कमरे की किताबों में से उसे अपनी पसंद की काफ़ी मिल जाएँगी। 'मुझे तो अचरज है कि पिताजी इतनी कम किताबें छोड़ गए,' मिस बिंगली बोलीं। 'मिस्टर डार्सी, पेम्बरली में कितनी शानदार लाइब्रेरी है!' 'अच्छी होनी ही चाहिए,' डार्सी बोले। 'कई पीढ़ियों का काम है।' 'और आपने ख़ुद भी उसमें बहुत सी किताबें जोड़ी हैं। आप तो हमेशा किताबें ख़रीदते रहते हैं।' 'ऐसे ज़माने में घर की लाइब्रेरी को नज़रअंदाज़ करना मेरी समझ में नहीं आता।' 'नज़रअंदाज़ करना! उस शानदार हवेली की शोभा बढ़ाने वाली कोई भी बात आप कभी नज़रअंदाज़ न करेंगे, मुझे यक़ीन है। चार्ल्स, तुम अपना घर बनाओ तो काश वह पेम्बरली के आधे जितना भी सुंदर हो।' 'मैं भी यही चाहता हूँ।' 'पर सच कहूँ तो मैं तुम्हें उसी इलाक़े में जागीर ख़रीदने की सलाह दूँगी। पेम्बरली को एक तरह का नमूना मान लेना। इंग्लैंड में डर्बीशायर से बढ़िया काउंटी कोई नहीं।' 'बड़े शौक़ से। डार्सी बेचने को राज़ी हों तो मैं पेम्बरली ही ख़रीद लूँ।' 'चार्ल्स, मैं मुमकिन बातों की बात कर रही हूँ।' 'सच कहूँ, कैरोलाइन, मुझे तो पेम्बरली की नक़ल करने से उसे ख़रीद लेना ज़्यादा मुमकिन लगता है।'

एलिज़ाबेथ इन बातों में इतनी खो गई कि किताब पर ध्यान ही न रहा। जल्दी ही उसने किताब एक तरफ़ रख दी। फिर ताश की मेज़ के पास जाकर मिस्टर बिंगली और श्रीमती हर्स्ट के बीच बैठ गई और खेल देखने लगी। 'क्या मिस डार्सी वसंत के बाद से काफ़ी लंबी हो गई हैं?' मिस बिंगली बोलीं। 'क्या वे मेरे जितनी लंबी हो जाएँगी?' 'मुझे लगता है हाँ। अभी वे क़द में मिस एलिज़ाबेथ बेनेट के बराबर हैं, या उनसे कुछ लंबी।' 'उन्हें फिर से देखने को मैं कितनी तरस रही हूँ! जितनी ख़ुशी मुझे उनसे मिली, उतनी और किसी से कभी नहीं मिली। वह चेहरा, वह तौर-तरीक़े! और उस उम्र में हर कला-गुण में कितनी निपुण! पियानो तो वे कमाल का बजाती हैं।' 'मुझे तो अचरज होता है कि युवा महिलाओं में इतना धीरज कहाँ से आता है कि वे सबकी सब हर कला-गुण में इतनी निपुण हो जाती हैं,' बिंगली बोले। 'सारी युवा महिलाएँ हर कला-गुण में निपुण? चार्ल्स, तुम्हारा क्या मतलब है?' 'मेरे ख़याल से सबकी सब। सब मेज़ों पर चित्रकारी करती हैं, परदे सजाती हैं, जाली के बटुए बुनती हैं। जो यह सब न कर सके, ऐसी औरत मैंने शायद ही देखी हो। और जब किसी युवा महिला का ज़िक्र पहली बार होता है, तो साथ में यह भी ज़रूर सुनने को मिलता है कि वह हर कला-गुण में ख़ूब निपुण है।' 'आम तौर पर जिन्हें कला-गुण गिना जाता है, उनके बारे में तुमने जो कहा, उसमें सच्चाई बहुत ज़्यादा है,' डार्सी बोले। 'जाली का बटुआ बुनने या परदा सजाने के सिवा जो औरत किसी बात से उस शब्द की हक़दार नहीं, उसे भी अक्सर « हर कला-गुण में निपुण » कह दिया जाता है। पर महिलाओं के बारे में तुम्हारी कुल राय से मैं ज़रा भी सहमत नहीं। अपनी सारी जान-पहचान जोड़ लूँ, तो भी मैं यह दावा नहीं कर सकता कि सचमुच हर कला-गुण में निपुण छह से ज़्यादा औरतों को जानता हूँ।' 'मैं भी नहीं, यक़ीन मानिए,' मिस बिंगली बोलीं। 'तो फिर,' एलिज़ाबेथ बोली, 'आप दोनों की नज़र में हर कला-गुण में निपुण औरत में बहुत सी शर्तें समाती होंगी।' 'हाँ। मैं उसमें बहुत कुछ शामिल करता हूँ।' 'ओह, ज़रूर,' उनकी वफ़ादार सहायक मिस बिंगली पुकार उठीं। 'जो आम तौर पर देखने को मिलता है, उससे बहुत आगे न निकले, तो कोई सचमुच हर कला-गुण में निपुण नहीं कहला सकता। इस शब्द की हक़दार होने के लिए औरत को संगीत, गायन, चित्रकला, नृत्य और आधुनिक भाषाओं का पूरा ज्ञान होना चाहिए। इतना ही नहीं। उसकी चाल-ढाल और चलने के ढंग में, आवाज़ के सुर में, बोलचाल और कहने के ढंग में भी कुछ ख़ास होना चाहिए। नहीं तो उस शब्द का आधा हक़ ही बनता है।' 'यह सब उसमें होना चाहिए,' डार्सी ने जोड़ा। 'और इस सबके ऊपर उसे कुछ और ठोस भी जोड़ना होगा — ख़ूब पढ़-लिखकर अपने मन को सँवारना।' 'अब मुझे इस बात का अचरज नहीं रहा कि आप दोनों हर कला-गुण में निपुण बस छह ही औरतों को जानते हैं। अचरज तो अब इस बात का है कि एक को भी जानते हैं।' 'क्या आप अपनी ही जाति की स्त्रियों पर इतनी कठोर हैं कि इस पर भी संदेह करती हैं कि ये सारी शर्तें पूरी करने वाली कोई औरत हो भी सकती है?' 'मैंने तो ऐसी औरत कभी नहीं देखी। जितनी योग्यता, रुचि, लगन और नज़ाकत आपने गिनाई, वह सब एक ही औरत में हो — ऐसा मैंने कभी नहीं देखा।' श्रीमती हर्स्ट और मिस बिंगली ने एक स्वर में ऐतराज़ किया कि एलिज़ाबेथ का यह दबा-छिपा संदेह अन्याय है। दोनों कहना चाहती थीं कि ऐसी शर्तों पर खरी उतरने वाली बहुत सी औरतों को वे जानती हैं। तभी मिस्टर हर्स्ट ने तीखी शिकायत की कि चल रहे खेल पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। दोनों चुप हो गईं। इससे सारी बात ख़त्म हो गई, और थोड़ी देर में एलिज़ाबेथ कमरे से चली गई।

दरवाज़ा बंद होते ही मिस बिंगली बोलीं, 'एलिज़ा बेनेट उन जवान औरतों में से है जो अपनी ही जाति की औरतों को नीचा दिखाकर मर्दों को रिझाना चाहती हैं। बहुत से मर्दों पर यह चल भी जाता होगा। पर मेरे ख़याल से यह सस्ती चाल है, और बड़ा नीच तरीक़ा।' यह बात ख़ास तौर पर डार्सी से कही गई थी। उन्होंने जवाब दिया, 'बेशक, किसी का मन जीतने के लिए महिलाएँ कभी-कभी नीचे उतरकर जो भी चालें चलती हैं, उन सब में नीचता है। जो कुछ भी चालाकी से मिलता-जुलता हो, वह घृणा के लायक़ है।' मिस बिंगली उस जवाब से पूरी तरह संतुष्ट न हुईं। इसलिए उन्होंने वह बात आगे न बढ़ाई।

एलिज़ाबेथ थोड़ी देर के लिए उनके पास सिर्फ़ यह कहने लौटी कि उसकी बहन की हालत और बिगड़ गई है और वह उसे छोड़कर नहीं आ सकती। बिंगली ने तुरंत मिस्टर जोन्स को बुलवाने पर ज़ोर दिया। उनकी बहनों को पक्का यक़ीन था कि गाँव के डॉक्टर की सलाह से कोई लाभ नहीं होगा। उन्होंने कहा कि लंदन को तुरंत हरकारा भेजकर सबसे नामी डॉक्टरों में से एक को बुलवाया जाए। एलिज़ाबेथ ने वह बात सुनने से इनकार किया। पर उनके भाई का प्रस्ताव उसने उतना नहीं ठुकराया। तय हुआ कि अगर मिस बेनेट की हालत में साफ़ सुधार न हो, तो सुबह जल्दी मिस्टर जोन्स को बुला लिया जाएगा। बिंगली चिंता से बेचैन रहे। बहनों ने कहा कि वे बेहद दुखी हैं। पर देर रात के भोजन के बाद दोनों ने युगल वादन करके अपना दुख हल्का कर लिया। उधर बिंगली को इससे बेहतर कोई तसल्ली न मिली कि घर की देखरेख करने वाली को हिदायत दें — बीमार महिला और उनकी छोटी बहन का हर मुमकिन ध्यान रखा जाए।