हिंदी संस्करण

अध्याय 11

रात का खाना ख़त्म हुआ और औरतें कमरा बदलने गईं, तो एलिज़ाबेथ बहन के पास दौड़ी। देखा कि वह ठंड से अच्छी तरह बची है, फिर दोनों साथ बैठक में गईं। बहन की दोनों सहेलियाँ उन्हें देखकर बहुत ख़ुश हुईं और बार-बार स्वागत करती रहीं। सज्जनों के आने से पहले के उस एक घंटे में एलिज़ाबेथ को लगा कि इन दोनों ने इतनी मिठास पहले कभी नहीं दिखाई। बात में भी दोनों निपुण थीं। कैसी महफ़िल रही, साफ़ बता सकती थीं, किस्से भी चतुराई से सुनाती थीं। जान-पहचान वालों पर खूब हँसती रहीं। पर सज्जन अंदर आए तो जेन अब सबसे बड़ी दिलचस्पी न रही। मिस बिंगली की नज़र तुरंत मिस्टर डार्सी पर टिक गई। उन्होंने दो-चार कदम भी न बढ़ाए होंगे कि मिस बिंगली को कुछ ज़रूरी कहना हो जैसा लगा। डार्सी सीधे मिस बेनेट के पास गए और उसके अच्छे होने की विनम्र बधाई दी। मिस्टर हर्स्ट ने भी हल्के से सिर झुकाया और कहा, 'सचमुच बड़ी अच्छी बात है।' पर लंबा और दिल से अभिवादन बिंगली का ही था। वे ख़ुशी और प्यारी चिंता से भरे थे। पहले आधे घंटे उनकी फ़िक्र यही रही कि कमरा बदलने से जेन फिर ठंडी न पड़ जाए, इसलिए आग और तेज़ करवाई। जेन उनकी बात मानकर दरवाज़े से दूर, आग की दूसरी तरफ़ जा बैठी। बिंगली उसी के पास बैठ गए और बाक़ी किसी से लगभग बोले ही नहीं। सामने कोने में सिलाई करती एलिज़ाबेथ यह दृश्य बड़े चाव से देखती रही। चाय पूरी हुई तो मिस्टर हर्स्ट अपनी साली से ताश की मेज़ लगाने को कहने लगे। पर फ़ायदा न हुआ। मिस बिंगली को पहले ही चुपके से मालूम हो चुका था कि मिस्टर डार्सी ताश नहीं खेलना चाहते। मिस्टर हर्स्ट ने खुलकर कहा, तब भी जल्दी मना हो गया। मिस बिंगली ने पक्का कह दिया कि ताश खेलने का मन किसी का नहीं। इस विषय पर सब चुप थे, सो बात ठीक ही लगी। आख़िर मिस्टर हर्स्ट के हिस्से एक सोफ़े पर लंबा पड़कर सो जाना ही बचा। डार्सी ने किताब उठा ली। मिस बिंगली ने भी वैसा ही किया। श्रीमती हर्स्ट का मन कंगन और अंगूठियाँ पलटने में ज़्यादा रहा। बीच-बीच में वे भाई और मिस बेनेट की बात में शामिल हो जातीं। मिस बिंगली अपनी किताब पढ़ने जितना ही इस पर लगी रहीं कि मिस्टर डार्सी कितना पढ़ चुके हैं। बिना रुके कुछ न कुछ पूछतीं, वे जो पन्ना पढ़ रहे हों उसे ताकतीं। पर उन्हें बात में खींच न सकीं। वे जवाब देकर पढ़ते रहते। आख़िर मिस बिंगली थक गईं। वह किताब उन्होंने सिर्फ़ इसलिए चुनी थी कि वह डार्सी वाली रचना की दूसरी जिल्द थी — उसमें मज़ा न मिला। जोर की जम्हाई लेकर बोलीं, 'ऐसी शाम बिताना सचमुच कितना सुखद है! पढ़ने जितना मज़ा और कहीं नहीं! किताब के सिवा हर चीज़ से कितनी जल्दी ऊब जाती है इंसान! आगे जब मेरा अपना घर होगा और उसमें अच्छी लाइब्रेरी न हुई, तो मैं सचमुच दुखी रहूँगी।'

किसी ने जवाब न दिया। मिस बिंगली ने फिर जम्हाई ली और किताब पटक दी। फिर कुछ दिलचस्प ढूँढ़ती हुई कमरे में नज़र दौड़ाईं। तभी सुनाई पड़ा कि भाई मिस बेनेट से नृत्य-समारोह की बात छेड़ रहे हैं। मिस बिंगली अचानक उसी तरफ़ मुड़ीं और बोलीं। 'हाँ तो चार्ल्स, क्या तुम सचमुच नेदरफ़ील्ड में नृत्य-समारोह करने वाले हो? फ़ैसला करने से पहले यहाँ बैठे लोगों की राय ले लेना अच्छा रहेगा। हममें से कोई ऐसा भी है जो नृत्य-समारोह को मज़े से ज़्यादा सज़ा समझता होगा।' 'अगर डार्सी की बात है', भाई चिल्लाए, 'तो कह देना, बुरा लगे तो शुरू होने से पहले सोने चले जाएँ। पर नृत्य-समारोह तय हो चुका है। निकल्स पूरा सफ़ेद शोरबा तैयार कर दे, उसी वक़्त निमंत्रण निकलवा दूँगा।' 'नृत्य-समारोह किसी और ढंग से हो तो मुझे भी कहीं ज़्यादा भाए', मिस बिंगली ने कहा। 'पर ऐसी महफ़िलें हमेशा जिस राह चलती हैं, उसमें एक असहनीय ऊब छिपी है। नृत्य की जगह बात को केंद्र रखा जाए तो कहीं बेहतर न होगा?' 'कहीं बेहतर होगा, कैरोलाइन। मैं भी यही सोचता हूँ। पर तब वह नृत्य-समारोह से बहुत दूर रह जाएगा।' मिस बिंगली ने जवाब न दिया। थोड़ी देर बाद उठीं और कमरे में टहलने लगीं। उनकी काया नफ़ीस थी, चाल सुंदर। पर इन सारे हाव-भाव का निशाना डार्सी थे, और वे अब भी तनिक न हिले — किताब में डूबे रहे। मिस बिंगली बेताब हुईं, एक बार और कोशिश करने निकलीं। एलिज़ाबेथ की तरफ़ मुड़कर बोलीं। 'मिस एलिज़ा बेनेट, मेरे साथ कमरे में एक चक्कर लगाइए। एक ही हालत में देर तक बैठने के बाद चलना सचमुच ताज़ा कर देता है।' एलिज़ाबेथ हैरान हुई, पर जल्दी मान गई। उस मेहरबानी में छिपा असल मक़सद भी मिस बिंगली का पूरा हो गया। मिस्टर डार्सी ने सिर उठाया। दो औरतों का उनकी ओर यूँ ध्यान देना उनके लिए नई बात थी। डार्सी भी एलिज़ाबेथ जितने ही उस बात के प्रति सचेत थे, और अनजाने ही किताब बंद कर दी। दोनों ने जल्दी उन्हें साथ चलने को कहा। पर उन्होंने मना कर दिया। कहा, दो औरतें साथ-साथ कमरे में आती-जाती हों तो उसके दो ही कारण सूझते हैं। और दोनों में से किसी में भी वे शामिल हों तो अड़चन बनेंगे। आख़िर मतलब क्या था? मिस बिंगली को वह अर्थ बहुत जानना था। उन्होंने एलिज़ाबेथ से पूछा कि क्या उसे यह बात समझ आती है।

'बिल्कुल नहीं', एलिज़ाबेथ ने कहा। 'पर साफ़ है कि वे हमें तीखे ढंग से चिढ़ाना चाहते हैं। उन्हें सबसे पक्के तौर पर निराश करने का तरीका यही होगा कि कुछ भी न पूछा जाए।' पर मिस बिंगली किसी भी बात पर मिस्टर डार्सी को निराश करने वाली न थीं। इसलिए दो कारण क्या हैं, यह समझाने को उनसे अड़ी रहीं। 'समझाने में ज़रा भी हिचक की बात नहीं', मिस बिंगली ने आख़िर उन्हें बोलने की जगह दी तो वे बोले। 'आप दोनों ने शाम इस तरह बिताने का फ़ैसला किया हो, तो उसके दो कारण हो सकते हैं। या तो आप एक-दूसरे के ऐसे गहरे भरोसे में हैं कि कुछ छिपकर तय करना है, या आपको मालूम है कि चलते समय काया सबसे सुंदर दिखती है। पहला हो तो मैं पूरा अड़चन बनूँगा। दूसरा हो तो आग के पास बैठकर मैं आप दोनों को कहीं बेहतर निहार सकूँगा।' 'ओह, कितना भयानक!' मिस बिंगली चिल्लाईं। 'इतनी ज़हरीली बात मैंने पहले कभी नहीं सुनी। ऐसी बात कहने वाले को सज़ा क्या दें?' 'जी चाहे तो यह बहुत आसान है', एलिज़ाबेथ बोली। 'हम सब एक-दूसरे को तंग भी कर सकते हैं, सज़ा भी दे सकते हैं। उन्हें चिढ़ाइए, उन पर हँसिए। इतनी क़रीबी है, तरीका आपको आता ही होगा।' 'सच कहूँ तो मुझे नहीं आता। इतने पास रहते हुए भी मैंने यह कला अभी नहीं सीखी। ऐसे शांत स्वभाव और तेज़ बुद्धि के सामने चिढ़ाऊँ कैसे? नहीं, इस बात में वे हमें जितना चाहें हरा सकते हैं। उन पर हँसना भी वैसा ही है। हँसने को कुछ हो नहीं, और ज़बरदस्ती हँसकर हम शर्मिंदा न हों। मिस्टर डार्सी जितना चाहें इतराएँ।'

'मिस्टर डार्सी ऐसे हैं जिन पर हँसा ही नहीं जा सकता!' एलिज़ाबेथ चिल्लाई। 'यह दुर्लभ गुण है। यह दुर्लभ ही बना रहे। ऐसे जान-पहचान वाले बहुत हो गए तो मेरा बड़ा नुक़सान होगा। मुझे हँसना बहुत भाता है।' 'मिस बिंगली मुझे असल से कहीं अच्छा समझती हैं', डार्सी बोले। 'कोई कितना ही समझदार और भला क्यों न हो। नहीं, ऐसे व्यक्ति का सबसे समझदार और उत्तम काम भी। अगर वह ऐसे हाथ लगे जिसका सबसे बड़ा मक़सद ज़िंदगी में मज़ाक का मसाला खोजना हो, तो हँसी का पात्र बन सकता है।' 'ऐसे लोग ज़रूर होते होंगे', एलिज़ाबेथ ने कहा। 'पर मैं वैसी न होना चाहूँ। समझदार या भली बात का मज़ाक नहीं उड़ाऊँगी। मूर्खता और बेहूदापन, अनोखा व्यवहार और विरोधाभास सचमुच मज़ेदार लगते हैं — यह मैं मानती हूँ। मौका मिले तो हँसती भी हूँ। पर आपमें तो ये बातें होंगी नहीं।' 'किसी में ये बातें बिल्कुल न हों, यह मुश्किल है। पर मैं उम्र भर उन कमज़ोरियों से बचता रहा हूँ जो बहुत तेज़ अक्ल को भी हँसी का पात्र बना देती हैं।' 'दिखावा या घमंड जैसी कमज़ोरियाँ?' 'हाँ। दिखावा तो साफ़ कमज़ोरी है। पर घमंड अलग है। जिसकी बुद्धि सचमुच श्रेष्ठ हो, उसका घमंड हमेशा काबू में रहेगा।' एलिज़ाबेथ ने मुस्कान छिपाने को मुँह फेर लिया।

'मिस्टर डार्सी की पूछ-ताछ खत्म हुई लगती है', मिस बिंगली बोलीं। 'तो नतीजा क्या निकला?' 'मुझे पूरा यक़ीन हो गया कि मिस्टर डार्सी में एक भी कमी नहीं। वे ख़ुद बिना छिपाए मानते हैं।' 'नहीं', डार्सी बोले। 'मैंने ऐसा दावा कभी नहीं किया। मुझमें भी कमियाँ बहुत हैं। बस यही चाहता हूँ कि समझ की कमी न हो। अपने स्वभाव की मैं गारंटी नहीं दे सकता। शायद मैं झुकना बहुत कम जानता हूँ। दुनिया के आराम के हिसाब से यह ज़्यादा है। दूसरों की मूर्खता और बुराई भी, और उन्होंने मेरे साथ जो ग़लत किया वह भी, जितनी जल्दी भूलना चाहिए उतनी जल्दी नहीं भूलता। कोई हिला दे तो मेरे भाव इधर-उधर भी नहीं होते। शायद लोग कहेंगे कि मैं बैर रखने वाला हूँ। एक बार किसी को अच्छा समझना छोड़ दूँ, तो मन कभी नहीं बदलता।' 'यह तो सचमुच कमी है!' एलिज़ाबेथ चिल्लाई। 'बैर न छोड़ पाना स्वभाव का दाग़ है। पर कमी आपने अच्छी चुनी। मैं इस पर सचमुच हँस नहीं सकती। आप मुझसे सुरक्षित हैं।' 'मैं समझता हूँ कि हर स्वभाव में किसी एक बुरी तरफ़ झुकने की आदत होती है। एक जन्मजात कमी, जिसे सबसे अच्छी तालीम भी नहीं जीत पाती।' 'तो मैं यही कहूँगी कि आपकी कमी हर किसी से नफ़रत करने की है।' 'और आपकी कमी है', वे मुस्कुराकर बोले, 'जान-बूझकर लोगों को ग़लत समझना।' 'ज़रा संगीत सुनें', अपनी ओर से न जुड़ सकने वाली बात से ऊबी मिस बिंगली चिल्लाईं। 'लुइज़ा, अगर मैं मिस्टर हर्स्ट को जगा दूँ तो चल जाएगा?' श्रीमती हर्स्ट को ज़रा भी एतराज़ न था, और पियानो खुल गया। थोड़ी देर सोच में डूबे डार्सी को भी यह बात बुरी न लगी। उन्हें लगने लगा था कि एलिज़ाबेथ पर ज़रूरत से ज़्यादा मन लगाना ख़तरनाक है।