हिन्दी संस्करण
अध्याय 8
न्यूयॉर्क में आम राय यही थी कि काउंटेस ओलेंस्का का 'रूप ढल गया' है। वह वहाँ पहली बार तब दिखी थी, जब न्यूलैंड आर्चर लड़का था: नौ-दस साल की ऐसी चमकती-सुंदर बच्ची, जिसके बारे में लोग कहते थे कि 'इसकी तो तस्वीर बननी चाहिए'। उसके माता-पिता यूरोप में भटकते फिरने वालों में से थे, और उसका बचपन इधर-उधर डोलते बीता — जब तक उसने दोनों को खो न दिया। तब वह अपनी मौसी मेडोरा मैनसन की देखरेख में आई — जो ख़ुद भी घुमक्कड़ थी और तभी 'बस जाने' के इरादे से न्यूयॉर्क लौट रही थी। बेचारी मेडोरा कई बार विधवा हुई थी; हर बार बसने के लिए घर लौटती (हर बार पहले से सस्ते घर में), और हर बार साथ में कोई नया पति या गोद लिया बच्चा होता। पर कुछ महीनों में वह पति से अलग हो जाती या बच्चे से झगड़ बैठती, घर घाटे में निकालती और फिर भटकने निकल पड़ती। चूँकि उसकी माँ एक रशवर्थ थी, और उसकी आख़िरी अभागी शादी ने उसे पागल चिवर्स परिवार के एक आदमी से जोड़ा था, न्यूयॉर्क उसकी सनकें उदारता से सह लेता था। पर जब वह अपनी अनाथ भतीजी को लेकर लौटी — उन माता-पिता की बेटी, जो घूमने के अफ़सोसनाक शौक़ के बावजूद लोगों को प्यारे थे — तो सबको दुख हुआ कि वह सुंदर बच्ची ऐसे हाथों में पड़ी है।
हर कोई नन्ही एलेन मिंगट के लिए अच्छा बनना चाहता था; पर उसके गहरे लाल गाल और कसकर मुड़े घुँघराले बाल उसे एक ऐसी ख़ुशमिज़ाजी देते थे, जो उस बच्ची पर अटपटी लगती थी जिसे अभी माँ-बाप का शोक-वस्त्र पहनना चाहिए था। यह भटकी हुई मेडोरा की अनगिनत उल्टी बातों में से एक थी — अमेरिका के कठोर शोक-नियमों की अनदेखी। जहाज़ से उतरते ही परिवार यह देखकर सन्न रह गया कि अपने सगे भाई के लिए पहना उसका घूँघट देवरानियों-जेठानियों से सात इंच छोटा था; और नन्ही एलेन गहरे लाल मेरिनो की पोशाक और कहरुवे की माला में थी — किसी बंजारन अनाथ जैसी। पर न्यूयॉर्क मेडोरा के आगे कब का हथियार डाल चुका था; एलेन के भड़कीले पहनावे पर बस कुछ बूढ़ी महिलाओं ने सिर हिलाया, बाक़ी रिश्तेदार उसके दहकते चेहरे और चंचलता पर रीझ गए। वह निडर, हिल-मिल जाने वाली बच्ची थी; असहज सवाल पूछती, उम्र से बड़ी बातें करती, और उसके पास परदेसी हुनर थे: शॉल वाला स्पेनी नाच और गिटार पर नेपल्स के प्रेम-गीत। मौसी की देखरेख में (जिसका असली नाम श्रीमती टोर्ली चिवर्स था, पर पोप से एक पदवी पाकर उसने पहले पति का कुलनाम फिर अपना लिया था और ख़ुद को मार्केज़ा मैनसन कहती थी — क्योंकि इटली में उसे मैनज़ोनी बनाया जा सकता था) नन्ही एलेन को महँगी पर बेतरतीब तालीम मिली; उसमें ऐसी चीज़ें भी थीं, जिनकी तब कल्पना भी नहीं होती थी: 'मॉडल देखकर चित्र बनाना' और पेशेवर संगीतकारों के साथ पियानो-पंचक बजाना।
ज़ाहिर है, इससे कुछ भला निकल नहीं सकता था। बरसों बाद जब बेचारे चिवर्स ने पागलख़ाने में दम तोड़ा, तो उसकी विधवा (अजीब शोक-वस्त्र लपेटे) फिर डेरा उठाकर एलेन के साथ चल दी — एलेन तब तक लंबी, हड़ीली, चौंकाने वाली आँखों वाली लड़की बन चुकी थी। कुछ समय उनकी कोई ख़बर न मिली; फिर समाचार आया कि एलेन ने बेशुमार दौलत और अफ़सानों जैसी शोहरत वाले एक पोलिश रईस से शादी कर ली है — जिससे वह त्युइलरी के एक नाच में मिली थी, और जिसके बारे में कहा जाता था कि पेरिस, नीस और फ़्लोरेंस में शाही महल, काउज़ में यॉट और ट्रांसिल्वेनिया में मीलों शिकारगाहें हैं। वह एक तरह की गंधक-रंगी शान में ओझल हो गई; और जब कुछ साल बाद मेडोरा फिर न्यूयॉर्क लौटी — बुझी हुई, कंगाल, तीसरे पति का शोक मनाती, और भी छोटा घर ढूँढ़ती — तो लोग हैरान थे कि उसकी अमीर भतीजी उसके लिए कुछ नहीं करती। फिर ख़बर आई कि ख़ुद एलेन की शादी भी तबाही में ख़त्म हुई है, और वह आराम और भूल जाने की तलाश में अपनों के पास घर लौट रही है।
एक हफ़्ते बाद, उस महत्वपूर्ण भोज की शाम, वान डेर लाइडेन के बैठकख़ाने में काउंटेस ओलेंस्का को दाख़िल होते देखते हुए यही सब न्यूलैंड आर्चर के मन से गुज़र रहा था। मौक़ा गंभीर था, और वह कुछ घबराहट से सोच रहा था कि वह इसे कैसे निभाएगी। वह ज़रा देर से आई; एक हाथ अब भी बिना दस्ताने के था, कलाई पर कंगन बाँधती हुई। पर जिस कमरे में न्यूयॉर्क के चुनिंदा लोग कुछ रस्मी गंभीरता से जमा थे, उसमें वह बिना किसी हड़बड़ी या झेंप के दाख़िल हुई। कमरे के बीचोबीच वह पल-भर रुकी और गंभीर होंठों, मुस्कुराती आँखों से चारों ओर देखा; और उसी क्षण न्यूलैंड आर्चर ने उसके रूप पर आम फ़ैसले को नकार दिया। सच था कि पहले वाली दमक जा चुकी थी। लाल गाल पीले पड़ गए थे; वह दुबली थी, थोड़ी थकी-सी, अपनी उम्र से — जो तीस के क़रीब रही होगी — ज़रा बड़ी दिखती। पर उसमें सौंदर्य की एक रहस्यमयी गरिमा थी; सिर उठाने के ढंग और आँखों की जुंबिश में ऐसा आत्मविश्वास, जो ज़रा भी नाटकीय हुए बिना, ऊँचे दर्जे की सधी हुई, सचेत शक्ति का चिह्न लगता था। साथ ही उसका ढंग वहाँ मौजूद ज़्यादातर महिलाओं से सादा था, और बहुतों को (जैसा बाद में उसने जेनी से सुना) निराशा हुई कि उसका रूप-रंग ज़्यादा 'फ़ैशनेबल' नहीं था — क्योंकि न्यूयॉर्क को सबसे प्यारा फ़ैशन ही था। शायद, आर्चर ने सोचा, वजह यह थी कि उसकी पुरानी चंचलता बुझ गई थी। वह बहुत शांत थी — हरकतें शांत, और वह धीमी, गहरी आवाज़ भी। ऐसे अतीत वाली युवती से न्यूयॉर्क ने कहीं ज़्यादा गूँजती चीज़ की उम्मीद की थी।
वह भोज ख़ासा डरावना मामला था। वान डेर लाइडेन के साथ भोजन वैसे ही हल्की बात न थी; वहाँ उनके रिश्तेदार ड्यूक के साथ भोजन तो लगभग धार्मिक अनुष्ठान की गंभीरता रखता था। आर्चर को यह सोचकर मज़ा आता था कि एक मामूली ड्यूक और वान डेर लाइडेन के ड्यूक के बीच का महीन फ़र्क़ सिर्फ़ पुराना न्यूयॉर्क वाला ही पकड़ सकता है। न्यूयॉर्क अकेले-दुकेले रईसों को ठंडेपन से लेता था, बल्कि (स्ट्रुदर्स मंडली को छोड़) एक तरह के अकड़ू संदेह से; पर जब वे ऐसे प्रमाण-पत्र लेकर आते, तो उनका पुराने ढंग की गर्मजोशी से स्वागत होता — जिसे केवल डेब्रेट में उनके दर्जे का नतीजा समझना भूल होती। ऐसे ही भेदों के कारण आर्चर अपने पुराने न्यूयॉर्क को प्यार करता था, भले मन-ही-मन उस पर हँस भी लेता। वान डेर लाइडेन दंपती ने मौक़े का महत्व जताने में कोई कसर न छोड़ी थी: द्यू लाक का सेव्र चीनी-मिट्टी और ट्रेवेना की जॉर्ज द्वितीय चाँदी निकाली गई थी; वान डेर लाइडेन का 'लोवेस्टॉफ़्ट' (ईस्ट इंडिया कंपनी) और डैगोनेट का क्राउन डर्बी भी। श्रीमती वान डेर लाइडेन पहले से भी ज़्यादा कैबानेल के चित्र-सी लग रही थीं, और श्रीमती आर्चर ने अपनी नानी के महीन मोती और पन्ने पहने थे — बेटे को इज़ाबे की लघु-चित्र याद आ गई। सब महिलाओं ने अपने सबसे सुंदर गहने पहने थे, पर घर और मौक़े की शान के अनुरूप ज़्यादातर भारी, पुराने ढंग की जड़ाई में थे; और बूढ़ी मिस लैनिंग, जिन्हें मना-मनाकर लाया गया था, सचमुच अपनी माँ के कैमियो और स्पेनी लेस का शॉल ओढ़े थीं।
काउंटेस ओलेंस्का भोज की अकेली जवान औरत थी; फिर भी, हीरों के हारों और ऊँचे शुतुरमुर्ग़-परों के बीच चिकने, भरे-भरे अधेड़ चेहरों पर नज़र दौड़ाते हुए आर्चर को वे चेहरे, अजीब बात है, उसके चेहरे से कम पके, ज़िंदगी के कम निशान लिए लगे।
यह सोचकर वह सहम गया कि उन आँखों को किन चीज़ों ने गढ़ा होगा। शाम के नायक, ज़ाहिर है, मेज़बान महोदया के दाहिने बैठे सेंट ऑस्ट्री के ड्यूक थे। पर काउंटेस ओलेंस्का अगर उम्मीद से कम चमकी, तो ड्यूक तो लगभग अदृश्य ही थे। सुसंस्कृत आदमी होने के नाते वे (हाल के एक और मेहमान ड्यूक की तरह) शिकार की पोशाक में भोज पर नहीं आए थे; पर उनका शाम का लिबास इतना घिसा और ढीला था, और वे उसे ऐसे घरेलू कपड़े की तरह पहने थे कि (झुककर बैठने के ढंग और कमीज़ पर फैली भारी दाढ़ी समेत) वे भोज के लिए सजे लगते ही न थे। ठिगने, गोल कंधों वाले, धूप से जले; मोटी नाक, छोटी आँखें और मिलनसार मुस्कान। पर बोलते कम थे, और बोलते तो इतनी धीमी आवाज़ में कि मेज़ पर बार-बार उभरती प्रतीक्षा-भरी चुप्पियों के बावजूद,
उनकी बातें पड़ोसियों के सिवा किसी तक न पहुँचतीं। खाने के बाद जब पुरुष महिलाओं से आ मिले, तो ड्यूक सीधे काउंटेस ओलेंस्का के पास गए; दोनों एक कोने में बैठकर गर्म बातचीत में डूब गए। दोनों में से किसी को होश न था कि पहले ड्यूक को श्रीमती लवेल मिंगट और श्रीमती हेडली चिवर्स को सलाम करना चाहिए, और काउंटेस को उस प्यारे वहमी बीमार, श्री अर्बन डैगोनेट से बात करनी चाहिए — जिन्होंने उससे मिलने के लिए जनवरी से अप्रैल तक घर से न निकलने का अपना अटल नियम तोड़ा था। दोनों क़रीब बीस मिनट बतियाते रहे; फिर काउंटेस उठी और चौड़ा बैठकख़ाना अकेले पार कर न्यूलैंड
आर्चर के पास आ बैठी। न्यूयॉर्क के बैठकख़ानों में यह रिवाज़ न था कि कोई महिला एक सज्जन को छोड़कर दूसरे की सोहबत ढूँढ़ने ख़ुद चल दे। शिष्टाचार कहता था कि वह मूर्ति की तरह अचल बैठी रहे, और जो पुरुष उससे बात करना चाहें, बारी-बारी उसके पास आएँ। पर काउंटेस को मानो पता ही नहीं था कि उसने कोई नियम तोड़ा है: वह सोफ़े के कोने में आर्चर के पास आराम से बैठ गई और सबसे कोमल आँखों से उसे देखा। 'मुझे मे के बारे में बताइए,' उसने कहा। जवाब देने की जगह उसने पूछा: 'आप ड्यूक को पहले से जानती थीं?' 'अरे हाँ — हर जाड़े नीस में उनसे मुलाक़ात होती थी। उन्हें जुए का बड़ा शौक़ है; हमारे घर ख़ूब आते थे।' उसने यह इतनी सादगी से कहा, जैसे कह रही हो 'उन्हें जंगली फूल पसंद हैं'; और एक पल बाद खरेपन से जोड़ा: 'मेरे ख़याल से वे मेरी ज़िंदगी के सबसे उबाऊ आदमी हैं।' इस पर उसका साथी इतना ख़ुश हुआ कि पिछले वाक्य का हल्का झटका भूल गया। ऐसी औरत से मिलना, जो वान डेर लाइडेन के ड्यूक को उबाऊ समझे और कहने की हिम्मत रखे, सचमुच मज़ेदार था। उसका मन हुआ और पूछे, उस ज़िंदगी के बारे में और सुने जिसकी झलक उसके लापरवाह शब्दों से मिलती थी; पर दुखती यादों को छूने का डर था, और वह कुछ सोच पाता, इससे पहले वह फिर
अपने पहले विषय पर लौट आई। 'मे सचमुच प्यारी है। न्यूयॉर्क में इतनी सुंदर और इतनी समझदार लड़की मैंने नहीं देखी। आप उससे बहुत प्रेम करते हैं?' न्यूलैंड आर्चर लाल होकर हँसा। 'जितना कोई मर्द कर सकता है।' वह उसे सोच में डूबी देखती रही, जैसे बात का कोई भी रंग छूट न जाए। 'तो आपके ख़याल से कोई सीमा होती है?' 'प्रेम की — सीमा? होती भी हो, तो मैंने नहीं पाई!' वह सहानुभूति-भरी मुस्कान से खिल उठी। 'आह —
तो यह सचमुच की प्रेम-कहानी है?' 'कहानियों में सबसे रूमानी!' 'कितना सुंदर! और आप दोनों ख़ुद मिले — किसी ने कुछ तय नहीं किया था?' आर्चर ने अविश्वास से उसे देखा। 'आप भूल गईं,' उसने मुस्कुराकर पूछा, 'कि हमारे देश में शादियाँ तय नहीं की जातीं?' उसके गालों पर गहरी लाली दौड़ गई, और आर्चर को अपने शब्दों पर फ़ौरन पछतावा हुआ। 'हाँ,' उसने उत्तर दिया, 'भूल गई थी। ऐसी ग़लतियाँ हो जाएँ तो माफ़ कर दीजिएगा। मुझे हमेशा याद नहीं रहता कि यहाँ वह सब अच्छा है, जो... जो वहाँ बुरा था, जहाँ से मैं आई हूँ।' उसने वियेना के अपने उक़ाब-परों वाले पंखे पर नज़रें झुका लीं, और आर्चर ने देखा कि उसके होंठ काँप रहे हैं। 'मुझे सच में अफ़सोस है,' उसने आवेग में कहा; 'पर जान लीजिए, यहाँ आप दोस्तों के बीच हैं।' 'हाँ, जानती हूँ। जहाँ भी जाती हूँ, यही महसूस होता है। इसीलिए तो घर लौटी हूँ। मैं बाक़ी सब भूलकर फिर से पूरी अमेरिकी बन जाना चाहती हूँ — मिंगट और वेलैंड परिवारों जैसी, आप और आपकी प्यारी माँ जैसी, और आज रात यहाँ मौजूद इन सब अच्छे लोगों जैसी। आह, मे आ गई — अब आप उसके पास दौड़ना चाहेंगे,' उसने जोड़ा, पर हिली नहीं; और उसकी नज़रें दरवाज़े से लौटकर फिर युवक के चेहरे पर टिक गईं।
बैठकख़ाना भोज-बाद के मेहमानों से भरने लगा था, और मादाम ओलेंस्का की नज़र के पीछे-पीछे आर्चर ने देखा: मे वेलैंड अपनी माँ के साथ भीतर आ रही थी। सफ़ेद-चाँदी की पोशाक और बालों में चाँदी के फूलों का मुकुट पहने वह लंबी लड़की शिकार से लौटी देवी डायना-सी लग रही थी। 'ओह,' आर्चर ने कहा, 'मेरे प्रतिद्वंद्वी बहुत हैं: देखिए, उसे अभी से घेर लिया गया है। वह देखिए, ड्यूक से परिचय कराया जा रहा है।'
'तो थोड़ी देर और मेरे पास रहिए,' मादाम ओलेंस्का ने धीमे स्वर में कहा, और परों के पंखे से उसके घुटने को हल्के-से छू दिया। छुअन हल्की-से-हल्की थी, पर आर्चर को वह किसी दुलार-सी सिहरा गई। 'हाँ, रहता हूँ,' उसने उसी धीमे स्वर में जवाब दिया — यह भी ठीक से जाने बिना कि क्या कह रहा है। पर तभी श्री वान डेर लाइडेन आ पहुँचे; पीछे बूढ़े श्री अर्बन डैगोनेट थे। काउंटेस ने दोनों का अपनी गंभीर मुस्कान से स्वागत किया, और आर्चर ने मेज़बान की चेतावनी-भरी नज़र अपने ऊपर महसूस कर उठकर जगह ख़ाली कर दी। मादाम ओलेंस्का ने विदा लेने जैसा हाथ बढ़ाया। 'तो कल, पाँच बजे के बाद — मैं इंतज़ार करूँगी,' उसने कहा; और श्री डैगोनेट को रास्ता देने के लिए मुड़ गई। 'कल—' आर्चर ने ख़ुद को दोहराते सुना — जबकि कोई वादा हुआ ही न था, और पूरी बातचीत में उसने दोबारा मिलने की
कोई इच्छा जताई तक न थी। हटते हुए उसने देखा: लंबा-चौड़ा, चमकता लॉरेंस लेफ़र्ट्स अपनी पत्नी को काउंटेस से मिलवाने ला रहा था; और उसने गरट्रूड लेफ़र्ट्स को अपनी चौड़ी, भावहीन मुस्कान के साथ कहते सुना: 'शायद बचपन में हम साथ नाच के स्कूल जाया करती थीं...' उसके पीछे, काउंटेस से परिचय की बारी के इंतज़ार में, वही कई जोड़े खड़े थे जिन्होंने श्रीमती लवेल मिंगट के भोज में उससे मिलने से इनकार किया था। जैसा श्रीमती आर्चर कहती थीं: वान डेर लाइडेन चाहें, तो सबक़ सिखाना जानते हैं। हैरानी की बात बस यह थी कि वे इतना कम चाहते थे।
युवक ने बाँह पर हल्का स्पर्श महसूस किया और देखा: काली मख़मल और ख़ानदानी हीरों में सजी श्रीमती वान डेर लाइडेन उसे ऊपर से देख रही थीं। 'प्यारे न्यूलैंड, मादाम ओलेंस्का को इस तरह समय देना तुम्हारी बड़ाई थी। मैंने तुम्हारे भाई हेनरी से कहा था कि सचमुच मदद को आना ही होगा।' उसने अस्पष्ट-सी मुस्कान से जवाब दिया, और वे उसकी जन्मजात झिझक का लिहाज़ करती-सी बोलीं: 'मे इतनी प्यारी कभी नहीं लगी। ड्यूक भी उसे इस कमरे की सबसे सुंदर लड़की मानते हैं।'