हिंदी संस्करण
अध्याय 5
लॉन्गबर्न से थोड़ी ही दूर पैदल की राह पर एक परिवार रहता था, जिससे बेनेट परिवार का बहुत घरेलू नाता था। सर विलियम लुकास पहले मेरिटन में व्यापार करते थे। वहाँ उन्होंने ठीक-ठाक सम्पत्ति जोड़ी, और मेयर रहते हुए राजा के सामने अभिनंदन-पत्र पढ़कर नाइट की उपाधि पाई। शायद उन्होंने इस सम्मान को कुछ ज़्यादा ही बड़ा मान लिया। उपाधि मिलते ही उन्हें अपना व्यापार और छोटे बाज़ारी कस्बे का जीवन खटकने लगा। सो उन्होंने दोनों छोड़ दिए और परिवार समेत मेरिटन से लगभग एक मील दूर एक घर में जा बसे। उसी समय से वह घर लूकस लॉज कहलाया। वहाँ सर विलियम अपने महत्त्व का सुख से स्मरण कर सकते थे। व्यापार के बंधन से छूटकर वे केवल एक ही काम में लगे रह सकते थे — सारे संसार से शिष्टता बरतना। पद से फूले तो वे ज़रूर थे, पर किसी को तुच्छ नहीं समझते थे। उलटे हर किसी का ध्यान रखते थे। स्वभाव से वे निरापद, मिलनसार और परोपकारी थे। सेंट जेम्स दरबार में राजा के सम्मुख प्रस्तुत होने के बाद तो वे शिष्ट भी हो गए। लेडी लुकास बहुत भली और सज्जन स्त्री थीं। बहुत चतुर न होने के कारण श्रीमती बेनेट के लिए वे सबसे अच्छी पड़ोसिन थीं। दंपती के कई बच्चे थे। सबसे बड़ी शार्लट सत्ताईस वर्ष के आसपास की समझदार और बुद्धिमान युवती थी। वह एलिज़ाबेथ की घनिष्ठ सहेली भी थी। लुकास घर की लड़कियाँ और बेनेट घर की लड़कियाँ नाच की बातें करने मिलें, यह तो होना ही था। सो नाच के अगले दिन सुबह लुकास की बेटियाँ सुनने और सुनाने लॉन्गबर्न आ पहुँचीं।
'शार्लट, तुमने शाम की शुरुआत बहुत अच्छी की', श्रीमती बेनेट ने बड़े यत्न से शिष्ट स्वर में मिस लुकास से कहा। 'मिस्टर बिंगली ने सबसे पहले तुम्हें ही चुना।' 'जी। पर लगता है दूसरी उन्हें ज़्यादा भाईं।' 'अरे, तुम्हारा मतलब जेन से होगा, क्योंकि उन्होंने उसके साथ दो बार नाचा। सचमुच ऐसा लगा तो कि वे उसे सराहते हैं। सच कहूँ तो मुझे भी यही लगता है। कुछ सुना तो था इस बारे में, पर ठीक-ठीक याद नहीं। मिस्टर रॉबिन्सन से जुड़ी कोई बात थी।' 'शायद आप उसी बात की कह रही हैं जो मैंने उनके और मिस्टर रॉबिन्सन के बीच सुन ली थी। मैंने आपको बताया नहीं था? मिस्टर रॉबिन्सन ने उनसे पूछा कि हमारे मेरिटन के नाच उन्हें कैसे लगे, और क्या उन्हें नहीं लगता कि कमरे में बहुत-सी सुंदर स्त्रियाँ हैं, और उनमें सबसे सुंदर कौन है। आख़िरी सवाल का उत्तर उन्होंने तुरंत दिया: «अरे, बेनेट परिवार की सबसे बड़ी बेटी, इसमें संदेह ही नहीं। इस बात पर दो राय हो ही नहीं सकतीं।»' 'हे भगवान! सच, यह तो बड़ी दो-टूक बात हुई। इससे तो सचमुच ऐसा ही लगता है। पर क्या पता, शायद कुछ भी न निकले।' 'मैंने जो सुना वह तुम्हारे सुने से ज़्यादा काम का था, एलिज़ा', शार्लट ने कहा। 'मिस्टर डार्सी अपने मित्र जितने सुनने लायक़ नहीं हैं, है न? बेचारी एलिज़ा! बस ठीक-ठाक भर होना।' 'उस आदमी के बुरे बरताव से लिज़ी का मन दुखे, ऐसी बात उसके दिमाग़ में मत डालो। वह इतना अप्रिय आदमी है कि उसे भा जाना तो निरा दुर्भाग्य होगा। श्रीमती लॉन्ग ने कल रात मुझे बताया कि वह आधे घंटे उनके एकदम पास बैठा रहा और एक बार भी मुँह नहीं खोला।'
'आपको पूरा यक़ीन है, माँ? कहीं थोड़ी ग़लतफ़हमी तो नहीं?', जेन ने कहा। 'मैंने तो मिस्टर डार्सी को उनसे बात करते साफ़ देखा था।' 'हाँ, क्योंकि आख़िर में उन्होंने पूछ लिया कि नेदरफ़ील्ड कैसा लगा, तो उत्तर दिए बिना चारा ही नहीं था। पर वे कहती हैं कि किसी के बोल पड़ने भर से वह बहुत खीझा हुआ लग रहा था।' 'मिस बिंगली कहती हैं', जेन ने कहा, 'कि अपने क़रीबी लोगों के बीच न हों तो वे ज़्यादा नहीं बोलते। अपनों के बीच वे बहुत ही सुखद रहते हैं।' 'मुझे इसका एक शब्द भी विश्वास नहीं, मेरी बच्ची। इतना सुखद होता तो श्रीमती लॉन्ग से बात करता। पर मैं अंदाज़ा लगा सकती हूँ कि माजरा क्या था। सब कहते हैं कि वह घमंड में डूबा हुआ है, और मुझे यक़ीन है कि उसने कहीं से सुन लिया होगा कि श्रीमती लॉन्ग की अपनी गाड़ी नहीं है और उन्हें किराए की गाड़ी में नाच तक आना पड़ा।' 'उन्होंने श्रीमती लॉन्ग से बात नहीं की, इससे मुझे कोई शिकायत नहीं', मिस लुकास ने कहा, 'पर काश उन्होंने एलिज़ा के साथ नाचा होता।' 'अगली बार, लिज़ी', माँ ने कहा, 'मैं तुम्हारी जगह होती तो उसके साथ कभी न नाचती।' 'माँ, मैं आपसे निश्चिंत होकर वादा कर सकती हूँ कि उनके साथ कभी नहीं नाचूँगी।' 'उनका घमंड', मिस लुकास ने कहा, 'मुझे उतना बुरा नहीं लगता जितना घमंड आमतौर पर लगता है, क्योंकि उसका कारण है। इतना बढ़िया नौजवान, जिसके पास कुल है, धन है, सब कुछ उसके पक्ष में है — वह अपने को ऊँचा माने तो अचरज कैसा? यों कहने की छूट हो तो कहूँगी, उन्हें घमंडी होने का हक़ है।' 'यह तो बिलकुल सच है', एलिज़ाबेथ ने उत्तर दिया, 'और मैं उनका घमंड आसानी से माफ़ कर देती, अगर उन्होंने मेरा मान न तोड़ा होता।'
अपनी सोच की गहराई पर गर्व करने वाली मैरी ने कहा, 'घमंड बहुत ही आम दोष है, ऐसा मेरा मानना है। मैंने अब तक जो पढ़ा है, उससे मुझे विश्वास है कि यह सचमुच बहुत आम है। मनुष्य का स्वभाव इसकी ओर विशेष रूप से झुकता है, और हममें बहुत कम ऐसे हैं जो किसी न किसी गुण पर — चाहे वह सच्चा हो या कल्पित — आत्मसंतोष न पालते हों। घमंड और दिखावा अलग-अलग चीज़ें हैं, यद्यपि दोनों शब्द अक्सर एक ही अर्थ में चलते हैं। मनुष्य दिखावे के बिना भी घमंडी हो सकता है। घमंड का सम्बन्ध इससे अधिक है कि हम स्वयं को क्या समझते हैं; दिखावे का इससे कि दूसरे हमें क्या समझें, यह हम चाहते हैं।' अपनी बहनों के साथ आया लुकास का छोटा लड़का चिल्लाया, 'अगर मैं मिस्टर डार्सी जितना अमीर होता, तो मुझे परवाह ही न होती कि मैं कितना घमंडी हूँ। मैं शिकारी कुत्तों का झुंड पालता और रोज़ एक बोतल शराब पीता।' 'तब तो तुम अपनी हद से कहीं ज़्यादा पी जाओगे', श्रीमती बेनेट ने कहा, 'और अगर मैंने तुम्हें ऐसा करते देख लिया, तो बोतल तुरंत छीन लूँगी।' लड़का अड़ा रहा कि वे नहीं छीन पाएँगी। श्रीमती बेनेट कहती रहीं कि ज़रूर छीनेंगी। यह बहस मुलाक़ात के अंत के साथ ही ख़त्म हुई।