हिंदी संस्करण
अध्याय 17
अगले दिन एलिज़ाबेथ ने मिस्टर विकहम से हुई बातचीत जेन को सुना दी। जेन यह सुनकर हैरान और परेशान हो गई। उसे यक़ीन नहीं होता था कि मिस्टर डार्सी इतने बुरे इंसान हो सकते हैं कि मिस्टर बिंगली की दोस्ती के लायक़ ही न हों। पर मिस्टर विकहम जैसे भले दिखने वाले जवान आदमी की सच्चाई पर शक करना भी जेन के स्वभाव में नहीं था। बस यह सोचकर कि उसके साथ सचमुच इतना बुरा बर्ताव हुआ होगा, जेन का कोमल मन हिल गया। इसलिए जेन दोनों को ही अच्छा मानती रही, और दोनों के बर्ताव का बचाव करना चाहती थी। जो बात किसी तरह समझ में नहीं आती थी, उसे वह इत्तिफ़ाक़ या ग़लतफ़हमी पर टाल देती। 'दोनों में से किसी को भी।' जेन ने कहा। 'किसी न किसी तरह ज़रूर धोखा हुआ होगा, जिसका हमें अंदाज़ा भी नहीं। हो सकता है अपना मतलब साधने वाले किसी ने दोनों के बारे में ग़लत बातें फैला दी हों। शायद कोई ऐसी वजह या हालात रहे हों जिन्होंने दोनों को अलग कर दिया, जबकि किसी की भी सच में कोई ग़लती नहीं। हम यह कभी पता नहीं लगा पाएँगे।' 'बात तो बिलकुल सही है। तो प्यारी जेन, इसमें शामिल रहे उन मतलबी लोगों का बचाव अब कैसे करेगी? उन्हें भी बेक़सूर साबित कर ही दे, वरना किसी को तो बुरा मानना ही पड़ेगा।' 'हँस ले जितना हँसना है। तू जितना भी हँसे, मेरी राय नहीं बदलेगी। प्यारी लिज़ी, अगर मिस्टर डार्सी ने उस आदमी के साथ ऐसा बर्ताव किया, जिसे अपने पिता ने अपनाने और संभालने का वादा किया था, तो वे कितने शर्मनाक इंसान ठहरेंगे। ऐसा हो ही नहीं सकता। ज़रा भी इंसानियत रखने वाला, अपनी इज़्ज़त का थोड़ा भी ख़याल रखने वाला कोई भी ऐसा नहीं कर सकता। क्या उनके सबसे क़रीबी दोस्त भी उनसे इतनी बुरी तरह धोखा खा सकते हैं? नहीं, ऐसा नहीं हो सकता।' 'यह मानना कहीं आसान है कि मिस्टर बिंगली को धोखा हुआ, बजाय यह मानने के कि मिस्टर विकहम ने कल रात मुझे जो अपनी कहानी सुनाई, वह गढ़ी हुई थी। उन्होंने नाम और तथ्य, कुछ भी नहीं छिपाया। अगर सच नहीं है, तो मिस्टर डार्सी ख़ुद इसे झुठला दें। और फिर, मिस्टर विकहम के चेहरे पर सच्चाई साफ़ झलक रही थी।' 'बात सच में मुश्किल है। दुख भी होता है। समझ नहीं आता क्या सोचूँ।' 'माफ़ करना, पर क्या सोचना चाहिए, यह बिलकुल साफ़ है।' पर जेन एक ही बात पक्के तौर पर सोच पा रही थी। अगर मिस्टर बिंगली सचमुच धोखे में थे, तो यह बात सामने आने पर वे बहुत दुखी होंगे।
दोनों बहनें झाड़ियों भरे बाग़ में यही बातें कर रही थीं, तभी वे लोग उन्हें बुलाने आ पहुँचे जिनकी अभी बात हो रही थी। मिस्टर बिंगली और उनकी बहनें ख़ुद आकर उन्हें उस नेदरफ़ील्ड नाच के न्योते के लिए बुलाने आई थीं, जिसका सबको बड़ी देर से इंतज़ार था। नाच अगले मंगलवार को होना तय हुआ। दोनों महिलाओं ने कहा कि अपनी प्यारी सहेली से फिर मिलकर उन्हें बड़ी ख़ुशी हुई है। यह भी कहा कि आख़िरी मुलाक़ात के बाद जैसे एक ज़माना बीत गया हो। बिछड़ने के बाद इतने दिन क्या करते हुए बीते, यह भी वे बार-बार पूछती रहीं। पर बाक़ी परिवार में उनकी दिलचस्पी न के बराबर थी। श्रीमती बेनेट से जितना हो सके, वे बचती रहीं। एलिज़ाबेथ से बस दो-चार बातें कीं, बाक़ी किसी से एक शब्द भी नहीं कहा। वे जल्द ही चली गईं। भाई मानो श्रीमती बेनेट की मेहरबानी से जल्दी भागना चाहते थे। वे हैरान करने वाली फुर्ती से उठे और झटपट बाहर निकल गए। नेदरफ़ील्ड के नाच में जाने का ख़याल घर की हर औरत को बेहद ख़ुश कर गया। श्रीमती बेनेट ने मान लिया कि यह नाच उनकी बड़ी बेटी के लिए ही रखा जा रहा है। औपचारिक न्योते की जगह मिस्टर बिंगली का ख़ुद चलकर बुलाने आना उन्हें ख़ास तौर पर भाया। जेन ने सोचा कि वह शाम अपनी दोनों सहेलियों और उनके भाई की मेहरबानी में कितने सुख से बीतेगी। एलिज़ाबेथ मिस्टर विकहम के साथ दिल भरकर नाचने की सोच में उत्साहित थी। उसे लगा कि मिस्टर डार्सी का चेहरा और बर्ताव देखकर वह जान जाएगी कि विकहम की सारी बात सच थी। किटी और लिडिया की ख़ुशी किसी एक बात या एक ख़ास आदमी पर उतनी नहीं टिकी थी। वे भी एलिज़ाबेथ की तरह शाम का आधा हिस्सा मिस्टर विकहम के साथ नाचना चाहती थीं। पर उन्हें ख़ुश करने वाला बस वही एक आदमी नहीं था। जो भी हो, नाच तो नाच ही था। मैरी ने भी घरवालों से साफ़ कह दिया कि उसे भी यह बुरा नहीं लगता। 'सुबह का समय अगर मैं अपनी मर्ज़ी से बिता सकूँ।' मैरी ने कहा। 'तो इतना ही काफ़ी है। कभी-कभार शाम की महफ़िल में जाना मुझे त्याग नहीं लगता। हर किसी का सामाजिक जीवन के प्रति कुछ फ़र्ज़ बनता है। मैं भी उन लोगों में से एक हूँ, जो मानते हैं कि आराम और मौज-मस्ती का समय सबके लिए अच्छा होता है, यह मैं ज़रूर कह सकती हूँ।'
एलिज़ाबेथ इस बात से बहुत उत्साहित थी। वैसे तो वह मिस्टर कॉलिन्स से ख़ुद बात करने से बचती थी। फिर भी उसे पूछना ही पड़ा कि क्या वे मिस्टर बिंगली का न्योता स्वीकार करने की सोच रहे हैं। और अगर जाएँ, तो क्या वे उस शाम के नाच-गाने में शामिल होना ठीक समझेंगे। पर मिस्टर कॉलिन्स को इस बात से रत्ती भर भी हिचक नहीं थी। नाचने की हिम्मत करने पर आर्चबिशप या लेडी कैथरीन डी बर्ग से डाँट पड़ने का डर तो दूर, ऐसा कोई ख़याल उनके मन में था ही नहीं। एलिज़ाबेथ को यह देखकर काफ़ी हैरानी हुई। 'मैं साफ़ कह दूँ।' उन्होंने कहा। 'मेरा मानना है कि अच्छी साख वाले किसी जवान सज्जन का ऐसे सम्माननीय लोगों के लिए दिया गया नाच किसी भी तरह बुरा नहीं हो सकता। मुझे भी नाचने से कोई ऐतराज़ नहीं। बल्कि मैं उस शाम अपनी सभी सुंदर चचेरी बहनों के साथ हाथ मिलाने का सौभाग्य पाना चाहता हूँ। ख़ासकर पहले दो नाच के लिए अभी मिस एलिज़ाबेथ बेनेट से पूछने का मौक़ा लेना चाहता हूँ। मुझे भरोसा है कि चचेरी बहन जेन भी समझ जाएँगी कि मैंने पहले उन्हीं से क्यों नहीं पूछा। वे इसे अपनी उपेक्षा नहीं मानेंगी, ऐसी उम्मीद है।' एलिज़ाबेथ को लगा जैसे वह पूरी तरह फँस गई हो। उसने तो ठीक वही दो नाच मिस्टर विकहम के साथ करने का पक्का मन बना रखा था, और अब मिस्टर कॉलिन्स! ऐसे बुरे मौक़े पर उसका उत्साह कभी इतना बेवक़्त नहीं दिखा। पर कोई चारा नहीं था। मिस्टर विकहम के साथ की ख़ुशी को थोड़ा और टालना ही पड़ा। उसने जितनी शाइस्तगी से हो सके, मिस्टर कॉलिन्स का प्रस्ताव मान लिया। उनकी मेहरबानी में कुछ बड़ा इशारा छिपा लगा, इसलिए वह ज़रा भी ख़ुश नहीं हुई। अब पहली बार उसे लगा कि बहनों में से उसे ही हंसफ़र्ड के पादरी-निवास की मालकिन बनने के लिए चुना गया है। जब कोई बेहतर मेहमान न मिले, तो रोज़िंग्स के क्वाड्रिल पत्तों की मेज़ पर एक जगह भरने के लिए भी उसी को चुना गया है। मिस्टर कॉलिन्स उसके साथ लगातार और ज़्यादा शिष्टता से पेश आ रहे थे। वे उसकी बुद्धि और उमंग की तारीफ़ करने की भी बार-बार कोशिश करते। जल्द ही यह ख़याल पक्का यक़ीन बन गया। अपने आकर्षण का यह असर देखकर उसे ख़ुशी से ज़्यादा हैरानी हुई, पर कुछ ही देर में माँ ने भी यह जता दिया कि उन्हें दोनों की शादी की संभावना बहुत भा रही है। फिर भी एलिज़ाबेथ ने इस इशारे को न मानने का फ़ैसला किया। वह जानती थी कि जो भी जवाब दे, उससे बड़ा झगड़ा ही होगा। हो सकता है मिस्टर कॉलिन्स प्रस्ताव रखें ही नहीं। तब तक उनके बारे में झगड़ना बेकार था।
अगर नेदरफ़ील्ड के नाच की तैयारी और बातें करने को न होतीं, तो छोटी बेनेट बहनों का हाल इस दौरान सचमुच बुरा होता। न्योता मिलने के दिन से लेकर नाच के दिन तक लगातार बारिश होती रही। इसलिए मेरिटन तक एक बार भी पैदल नहीं जाया जा सका। न मौसी से मिलने, न अफ़सरों को देखने, न कोई नई ख़बर लाने जा सके। नेदरफ़ील्ड में पहनने वाले जूतों पर लगाने के गुलाब के फूलदार गहने भी किसी और के हाथों मँगवाने पड़े। मिस्टर विकहम से नज़दीकी बढ़ाने का रास्ता पूरी तरह बंद कर देने वाले इस मौसम ने एलिज़ाबेथ का सब्र भी परख लिया होगा। अगर मंगलवार का नाच जैसी कोई बात इंतज़ार में न होती, तो किटी और लिडिया शुक्रवार और शनिवार, इतवार और सोमवार किसी तरह भी नहीं झेल पातीं।