हिंदी संस्करण
अध्याय 16
जवान लड़कियों ने मौसी से जो वादा किया था, उसमें किसी को कोई ऐतराज़ नहीं था। मिस्टर कॉलिन्स को यह बात बार-बार खटकती रही कि अपने ठहरने के दौरान एक भी शाम मिस्टर और श्रीमती बेनेट को अकेला छोड़ें। पर सबने एक स्वर से समझा-बुझाकर मना लिया। सही समय पर गाड़ी उन्हें और उनकी पाँचों चचेरी बहनों को लेकर मेरिटन की ओर चल पड़ी। बैठक में क़दम रखते ही लड़कियों को एक ख़ुशख़बरी मिली — मिस्टर विकहम मौसा के न्योते पर इसी घर में आए हुए थे। यह ख़बर सुनकर सब जब अपनी-अपनी जगह बैठ गए, तो मिस्टर कॉलिन्स को भी चारों ओर देखकर वाह-वाह करने का मौक़ा मिला। कमरे के आकार और साज-सामान ने उन पर गहरा असर डाला। उन्होंने दावे से कहा कि यह तो मानो रोज़िंग्स के छोटे-से गर्मियों वाले नाश्ते के कमरे में बैठे होने जैसा है। पहले तो यह तुलना सुनकर श्रीमती फ़िलिप्स को ख़ास ख़ुशी नहीं हुई। पर जब उन्होंने रोज़िंग्स के बारे में और उसके मालिक के बारे में सुना, तो बात बदल गई। लेडी कैथरीन के बस एक ही बैठक का हाल सुनते-सुनते उन्हें पता चला कि अकेले फ़ायरप्लेस की सजावट पर आठ सौ पाउंड ख़र्च हुए थे। तभी उन्हें एहसास हुआ कि यह तारीफ़ कितनी बड़ी बात है। अब घर की मुख्य नौकरानी के कमरे से तुलना की जाती, तो भी वे शायद ही बुरा मानतीं। मिस्टर कॉलिन्स लेडी कैथरीन और उनकी हवेली के तमाम शान-शौकत की बातें सुनाते रहे। बीच-बीच में अपने छोटे-से घर और वहाँ हो रहे सुधारों की तारीफ़ में भी उतर जाते। सज्जन लोग आकर मिलने तक वे इसी तरह मज़े से समय बिताते रहे। श्रीमती फ़िलिप्स बड़े ध्यान से सुनती रहीं। जितना सुनतीं, उतना ही मिस्टर कॉलिन्स को बड़ा आदमी मानने लगतीं। उन्होंने मन में ठान लिया कि मौक़ा मिलते ही यह सारी बातें पड़ोसियों को ज्यों की त्यों सुना देंगी। पर जो चचेरी बहनें भाई की बातें बर्दाश्त ही नहीं कर पा रही थीं, उनके लिए इंतज़ार बहुत लंबा हो गया। कोई साज़ बजाने को मिल जाए, यह चाहने या फ़ायरप्लेस के ऊपर रखे बर्तनों की बेढब नक़ल में बनाई अपनी तस्वीरें देखने के सिवा उनके पास कोई काम नहीं था। फिर भी आख़िर इंतज़ार ख़त्म हुआ। सज्जन लोग सचमुच आ पहुँचे। जब मिस्टर विकहम कमरे में दाख़िल हुए, तो एलिज़ाबेथ को लगा कि पिछले दिन उन्हें देखकर या उसके बाद उनके बारे में सोचते हुए भी उसने कभी होश खो देने जैसी तारीफ़ नहीं की थी। मिलिशिया के अफ़सर आम तौर पर भले और सज्जन क़िस्म के लोग थे। उनमें सबसे अच्छे लोग आज की महफ़िल में मौजूद थे। पर मिस्टर विकहम का रूप-रंग, चेहरा, डील-डौल और चाल-ढाल उन सबसे कहीं आगे था। बिलकुल वैसे ही, जैसे वे सब उस शराब की गंध लिए, चौड़े चेहरे वाले, नीरस फ़िलिप्स मौसा से कहीं बेहतर थे, जो अफ़सरों के पीछे-पीछे कमरे में आए थे। लगभग हर औरत की नज़रें मिस्टर विकहम पर टिकी थीं। और आख़िर में जिस भाग्यशाली स्त्री के पास वे बैठे, वह एलिज़ाबेथ थी। उन्होंने बात बरसाती रात के मौसम और बरसात लंबी खिंचने की आशंका से शुरू की। विषय एकदम मामूली था, फिर भी उन्होंने जल्द ही बातचीत को ख़ुशगवार ढंग से आगे बढ़ा दिया। उनका सुहाना बोलने का ढंग सुनकर एलिज़ाबेथ को लगा कि चाहे कोई विषय कितना भी आम और उबाऊ क्यों न हो, बोलने वाले के हुनर से वह दिलचस्प बन सकता है। जब मिस्टर विकहम और अफ़सर महिलाओं का ध्यान खींचने में एक-दूसरे से होड़ करने लगे, तो मिस्टर कॉलिन्स का वजूद मानो बेमानी होकर दब गया। कम से कम जवान लड़कियों के लिए तो वे कुछ भी नहीं रहे। फिर भी कभी-कभी श्रीमती फ़िलिप्स जैसी मेहरबान श्रोता उनके पास बची रहतीं। उनकी बारीक़ी से रखी गई मेहमाननवाज़ी की बदौलत कॉफ़ी और मफ़िन भी उन्हें भरपूर मिलते रहे। ताश की मेज़ लगी, तो व्हिस्ट के खेल में बैठकर उन्हें बदले में श्रीमती फ़िलिप्स पर मेहरबानी दिखाने का मौक़ा मिला। 'अभी इस खेल की जानकारी मुझे बहुत कम है, पर ख़ुशी-ख़ुशी हुनर बढ़ाऊँगा। मेरे जैसे ओहदे वाले आदमी को…' श्रीमती फ़िलिप्स उनके राज़ी होने पर बहुत एहसानमंद हुईं। पर वजह सुनने का धीरज उनमें नहीं था।
मिस्टर विकहम व्हिस्ट नहीं खेलते थे। इसलिए दूसरी मेज़ पर एलिज़ाबेथ और लिडिया के बीच जगह पाकर, उन्हें सबने बड़ी ख़ुशी से अपनाया। पहले तो लगा कि लिडिया पूरी तरह उन्हें अपने क़ब्ज़े में कर लेगी। लिडिया दूसरों को बोलने का मौक़ा ही नहीं देती थी। पर उसे लॉटरी टिकट्स के खेल का भी बड़ा शौक़ था। जल्दी ही वह खेल में इतना डूब गई कि दाँव पर जोश दिखाने और हर बार इनाम जीतने पर चिल्लाने में उसका पूरा ध्यान लग गया, किसी एक इंसान पर ख़ास ध्यान देने की गुंजाइश ही न रही। इसलिए खेल की वजह से टूटने वाले पलों को छोड़कर, मिस्टर विकहम को एलिज़ाबेथ से बात करने की फ़ुर्सत मिलती रही। एलिज़ाबेथ भी उनकी बातें बहुत सुनना चाहती थी। पर जो बात वह सबसे ज़्यादा सुनना चाहती थी — यानी वे मिस्टर डार्सी को कैसे जानने लगे — वह सुनाई जाएगी, ऐसी उम्मीद वह नहीं कर सकती थी। उस सज्जन का नाम लेने की हिम्मत तक वह नहीं जुटा पाई। पर अचानक ही उसकी जिज्ञासा जल्दी सुलझ गई। मिस्टर विकहम ने ख़ुद वह विषय छेड़ दिया। उन्होंने पूछा कि नेदरफ़ील्ड मेरिटन से कितनी दूर है। जवाब सुनने के बाद, कुछ हिचकते हुए-से, उन्होंने पूछा कि मिस्टर डार्सी वहाँ कब से ठहरे हुए हैं। 'क़रीब एक महीना हुआ है,' एलिज़ाबेथ ने कहा। बातचीत टूटने न दे, इसलिए उसने जोड़ा। 'सुना है, डर्बीशायर में उनकी बहुत बड़ी जायदाद है।' 'जी हाँ,' विकहम ने जवाब दिया। 'वहाँ उनकी शानदार जागीर है। साल की आमदनी पक्के तौर पर दस हज़ार पाउंड है। इस बारे में मुझसे ज़्यादा पक्की बात बताने वाला कोई और मिलना मुश्किल होगा। मैं बहुत छोटी उम्र से ही उस परिवार से ख़ास नाता रखता आया हूँ।' एलिज़ाबेथ अपना अचरज छिपा न सकी। 'शायद कल आपने देखा होगा कि हम कितनी ठंडक से मिले थे, तो यह सुनकर हैरान होना लाज़िमी है, मिस बेनेट। मिस्टर डार्सी को आप अच्छी तरह जानती हैं?' 'जितना मैं चाहती, उतना अच्छी तरह जानती हूँ,' एलिज़ाबेथ ने जोश से कहा। 'चार दिन एक ही घर में रही, और मुझे लगता है वे बड़े नापसंद-से इंसान हैं।' 'वे पसंद आने लायक़ हैं या नहीं, इस बारे में अपनी राय बताने का हक़ मुझे नहीं है,' विकहम ने कहा। 'मुझे इसे परखने का हक़ ही नहीं। मैं उन्हें बहुत लंबे समय से, बहुत गहराई से जानता हूँ, इसलिए निष्पक्ष फ़ैसला नहीं कर सकता। मैं निष्पक्ष हो ही नहीं सकता। पर उन्हें ऐसा आँकने पर आम तौर पर लोग हैरान हो जाएँगे। शायद कहीं और आप इतने कड़े शब्दों में न कहतीं। यहाँ तो परिवार वाले ही साथ बैठे हैं।' 'सच कहूँ तो, नेदरफ़ील्ड को छोड़कर इस इलाक़े के किसी भी घर में मैं यहाँ से कम खुलकर नहीं बोलूँगी। हर्टफ़र्डशायर में उन्हें कोई पसंद ही नहीं करता। सब उनके घमंड से तंग आ चुके हैं। किसी से भी पूछ लीजिए, कोई उनकी अच्छी बात नहीं कहेगा।' 'वे हों या कोई और, अपने हक़ से ज़्यादा अच्छी राय न पा सकें,' विकहम ने कुछ पल चुप रहकर कहा, 'तो इसका मुझे अफ़सोस होने का दिखावा मैं नहीं कर सकता। पर उनके साथ ऐसा शायद ही कभी होता है। लोग उनकी दौलत और रुतबे से आँखें मूँद लेते हैं, या उनके रोब जमाने वाले, अकड़ भरे रवैये से डर जाते हैं। इसलिए बस वही देखते हैं, जो वे दिखाना चाहते हैं।' 'बस चंद बार मिलने पर भी मुझे तो लगता है, उनका स्वभाव बुरा है।' विकहम ने बस सिर हिला दिया। फिर बोलने का मौक़ा आते ही उन्होंने कहा। 'यह जानने में उत्सुकता है कि क्या वे इस इलाक़े में लंबे समय टिकने की सोच रहे हैं।' 'बिलकुल नहीं पता। पर मैं नेदरफ़ील्ड में थी, तब उनके जाने की कोई बात नहीं सुनी। उम्मीद है, वे आसपास हैं, तो इससे मिलिशिया में शामिल होने की आपकी योजना में कोई रुकावट न आए।' 'नहीं, नहीं। मिस्टर डार्सी की वजह से मुझे कहीं भागना नहीं पड़ेगा। मुझसे न मिलना है, तो जाना उन्हें पड़ेगा। हमारे बीच अच्छे संबंध नहीं हैं, और उनसे आमना-सामना होना मेरे लिए हमेशा तकलीफ़देह रहता है। पर उनसे बचने की जो वजह है, वह मैं पूरी दुनिया के सामने बेझिझक बता सकता हूँ। बस यही मलाल कचोटता है कि मेरे साथ बहुत नाइंसाफ़ी हुई, और वे आज जैसे बन गए हैं। मिस बेनेट, उनके पिता, स्वर्गीय मिस्टर डार्सी, दुनिया के सबसे भले इंसान थे और मेरे सबसे सच्चे दोस्त। आज के मिस्टर डार्सी के साथ रहने पर बेशुमार प्यारी यादें याद आती हैं, और दिल गहरे दुख से भर जाना लाज़िमी है। उन्होंने मेरे साथ जो किया, वह शर्मनाक है। पर पिता की उम्मीदें तोड़ने और उनकी याद को बदनाम करने के सिवा, उन्होंने जो भी किया हो, मैं दिल से मानता हूँ कि उसे पूरी तरह माफ़ कर सकता हूँ।' एलिज़ाबेथ की दिलचस्पी इस बात में लगातार बढ़ती गई। उसने पूरे मन से सुना। पर मामला नाज़ुक था, इसलिए और सवाल नहीं पूछ सकी। मिस्टर विकहम ने मेरिटन, आसपास के इलाक़े और वहाँ के लोगों जैसे आम विषयों की ओर बात मोड़ दी। जो कुछ अब तक देखा था, वह सब उन्हें बहुत पसंद आया-सा लगा। ख़ासकर लोगों के बारे में उन्होंने नरम पर बिलकुल साफ़ मतलब वाली तारीफ़ की। 'हमेशा लोगों के साथ, वह भी भले लोगों के साथ जुड़े रहने की उम्मीद,' उन्होंने जोड़ा, 'मिलिशिया में शामिल होने की मेरी सबसे बड़ी वजह थी। मुझे पता था कि यह बहुत बढ़िया और ख़ुशमिज़ाज रेजिमेंट है। दोस्त डेनी ने यहाँ की मौजूदा तैनाती की बात और मेरिटन में अफ़सरों को मिले शानदार स्वागत और उनसे बनी अच्छी जान-पहचान की बात सुनाई। इसी से मेरा मन और खिंच गया। सच कहूँ तो लोगों के साथ जुड़े रहना मेरे लिए बिलकुल ज़रूरी है। मैं उम्मीदें टूटा हुआ इंसान हूँ, इसलिए अकेले रहकर मन को नहीं सँभाल सकता। मुझे कोई काम और मेलजोल ज़रूर चाहिए। फ़ौजी ज़िंदगी मूल रूप से मेरी चुनी हुई राह नहीं थी। पर अब हालात के मुताबिक़ यही सही चुनाव बन गई है। धर्म-सेवा ही मेरा पेशा होना चाहिए था। मुझे पादरी बनने की तालीम दी गई थी। जिस सज्जन की हमने अभी बात की, अगर वे इजाज़त दे देते, तो अब तक मुझे कोई बहुमूल्य पादरी-पद मिल चुका होता।'
'सच में?' 'जी हाँ। स्वर्गीय मिस्टर डार्सी ने वसीयत में लिखा था कि उनके अधिकार वाला सबसे अच्छा पादरी-पद जब भी अगली बार ख़ाली हो, मुझे दे दिया जाए। वे मेरे धर्म-पिता थे और मुझे बहुत चाहते थे। वे कितने मेहरबान थे, यह चाहे कितना भी कहूँ, पूरी तरह बयान नहीं हो सकता। वे मुझे भरपूर संभालना चाहते थे, और उन्हें लगता था कि उन्होंने ऐसा कर भी दिया है। पर पादरी-पद ख़ाली हुआ, तो वह किसी और को दे दिया गया।' 'हे भगवान!' एलिज़ाबेथ चिल्ला उठी। 'यह कैसे हो सकता है? वसीयत को कैसे नज़रअंदाज़ किया जा सका? आपने क़ानून का सहारा क्यों नहीं लिया?' 'वसीयत के शब्दों में ही किस्मत से कोई तकनीकी ख़ामी रह गई, इसलिए क़ानून पर भरोसा नहीं किया जा सकता था। इज़्ज़तदार इंसान होता तो उस इरादे पर शक न करता, पर मिस्टर डार्सी ने शक करना चुना। या फिर उसे बस एक शर्त वाली सिफ़ारिश मानकर उन्होंने दावा किया कि मैंने फ़िज़ूलख़र्ची या लापरवाही की वजह से — यानी कुछ किया हो या न किया हो — वह हक़ पूरी तरह खो दिया है। साफ़ बात यह है कि जब मैं वह पद संभालने लायक़ उम्र का हुआ, ठीक दो साल पहले, पादरी-पद ख़ाली हुआ और किसी और को दे दिया गया। और यह भी उतना ही साफ़ है कि मैं ख़ुद को यह इलज़ाम नहीं दे सकता कि मैंने सचमुच कोई ऐसा काम किया जिससे वह हक़ खोना जायज़ हो। मेरा स्वभाव गरम और बेलाग है। कभी-कभार शायद मैंने उनके बारे में अपनी राय, यहाँ तक कि उनसे मुँह पर भी, ज़रूरत से ज़्यादा साफ़-साफ़ कह दी हो। इससे बुरा कुछ मुझे याद नहीं। सच तो यह है कि हम बिलकुल अलग तरह के लोग हैं, और वे मुझसे नफ़रत करते हैं।' 'यह तो बड़ी भयानक बात है! उन्हें सबके सामने बेइज़्ज़त होना चाहिए।' 'कभी न कभी ऐसा होगा ही। पर यह काम मैं नहीं करूँगा। जब तक उनके पिता को नहीं भूल पाता, तब तक न मैं उनके ख़िलाफ़ जा सकता हूँ, न उनकी बात उजागर कर सकता हूँ।' एलिज़ाबेथ ऐसे मन वाले उन्हें देखकर उनकी क़दर करने लगी। यह बात कहते समय वे पहले से कहीं ज़्यादा सुंदर लग रहे थे, उसे लगा। 'पर,' थोड़ी देर बाद एलिज़ाबेथ ने कहा, 'उनकी कोई वजह तो रही होगी। इतना निर्दयी बर्ताव करने के पीछे क्या कारण था?' 'मेरे प्रति उनकी पूरी और अटल नफ़रत। कुछ हद तक इसे जलन का ही नतीजा माना जा सकता है। अगर स्वर्गीय मिस्टर डार्सी मुझे कम चाहते, तो शायद बेटा मुझे ज़्यादा बर्दाश्त कर पाता। पर पिता का मेरे लिए ख़ास स्नेह बचपन से ही उन्हें खटकता रहा लगता है। उनके स्वभाव में यह सहने की गुंजाइश नहीं थी कि हम एक-दूसरे के मुक़ाबिल खड़े हों, और मुझे जो तरजीह अक्सर मिलती रही, वह वे झेल न सके।' 'मुझे नहीं लगा था कि मिस्टर डार्सी इतने बुरे इंसान हैं। मुझे वे कभी पसंद नहीं आए, पर इतना नीच नहीं समझा था। यह पता था कि वे दुनिया-भर के लोगों को हिकारत की नज़र से देखते हैं, पर इतनी ओछी बदनीयती, नाइंसाफ़ी और बेदर्दी तक उतर सकते हैं, यह नहीं सोचा था!' पर कुछ मिनट सोच में डूबी रहने के बाद एलिज़ाबेथ ने फिर कहा। 'याद आया, नेदरफ़ील्ड में एक दिन उन्होंने घमंड से कहा था कि उनका ग़ुस्सा कभी नहीं जाता, वे कभी माफ़ नहीं करते। सचमुच बड़ा डरावना स्वभाव लगता है।' 'इस मामले में मैं अपने-आप पर भरोसा नहीं करूँगा,' विकहम ने जवाब दिया। 'उनके प्रति निष्पक्ष रहना मेरे लिए बहुत मुश्किल है।' एलिज़ाबेथ फिर गहरी सोच में डूब गई और कुछ देर बाद बोल उठी। 'अपने पिता ने जिसे धर्म-पुत्र माना, दोस्त माना और चहेता बनाया, उसी के साथ ऐसा बर्ताव करना!' एलिज़ाबेथ यह भी जोड़ सकती थी — «और वह भी आप जैसे जवान के साथ, जिसका चेहरा देखते ही उसके भले स्वभाव की गवाही मिल जाती है!» पर उसने बस इतना कहकर संतोष कर लिया। 'शायद बचपन से वे ख़ुद उनके अपने दोस्त भी रहे होंगे। आपने ख़ुद बताया, दोनों परिवार बहुत गहरे जुड़े हुए थे।' 'हम एक ही पल्ली में, एक ही जागीर के भीतर पैदा हुए, और बचपन का ज़्यादातर वक़्त साथ बिताया। एक ही घर में रहे, एक जैसे खेल खेले, एक ही माँ-बाप-जैसी देखभाल पाई। मेरे पिता पहले उसी वकालत के पेशे में थे, जिसमें आपके मौसा मिस्टर फ़िलिप्स ने शानदार नाम कमाया लगता है। पर स्वर्गीय मिस्टर डार्सी की मदद के लिए उन्होंने सब कुछ छोड़ दिया और पेम्बरली जागीर संभालने में अपना पूरा समय लगा दिया। मिस्टर डार्सी मेरे पिता को बहुत ऊँचा दर्जा देते थे और उन्हें अपना सबसे क़रीबी, भरोसेमंद दोस्त मानते थे। वे अक्सर मानते थे कि पिता ने जागीर की सक्रिय देखभाल करके उन पर बड़ा एहसान किया है। मेरे पिता की मृत्यु से ठीक पहले, मिस्टर डार्सी ने ख़ुद आगे बढ़कर मेरी ज़िम्मेदारी लेने का वादा किया था। मुझे पूरा यक़ीन है, उन्होंने इसे मेरे प्रति स्नेह जितना ही, पिता का क़र्ज़ चुकाने का काम भी माना होगा।' 'यह तो बहुत ही अजीब बात है!' एलिज़ाबेथ चिल्ला उठी। 'सचमुच घिनौना लगता है! हैरानी होती है कि आज के मिस्टर डार्सी में जो घमंड है, उसी घमंड ने भी उन्हें आपके साथ इंसाफ़ करने पर मजबूर नहीं किया। कोई और बेहतर वजह न होती, तो भी बेईमानी करने के लिए उन्हें बहुत ज़्यादा घमंडी होना चाहिए था, है न? मैं तो इसे बेईमानी ही कहूँगी।' 'सचमुच हैरान करने वाली बात है,' विकहम ने जवाब दिया। 'उनका लगभग हर काम घमंड से ही निकलता है, और कई बार घमंड ही उनका सबसे अच्छा दोस्त बना है। किसी भी और भावना से ज़्यादा घमंड ने उन्हें अच्छाई के क़रीब बाँधे रखा है। पर कोई भी हमेशा एक-सा नहीं रहता। मेरे मामले में उनके भीतर घमंड से भी ज़्यादा ताक़तवर कोई और उभार काम कर रहा था।'
'क्या इतने घिनौने घमंड ने कभी उनका कोई भला भी किया है?' 'जी हाँ। उस घमंड ने अक्सर उन्हें दिल खोलकर और उदारता से बर्ताव करने की राह दिखाई है। पैसा खुले हाथ लुटाना, मेहमानों की भरपूर मेहमाननवाज़ी करना, किसानों की मदद करना और ग़रीबों को राहत देना — यह सब इसी की वजह से हुआ है। ख़ानदान का गुमान और बेटे होने का गुमान, वे अपने पिता कैसे इंसान थे, इस पर बहुत गर्व करते हैं। इन्हीं भावों ने उनसे यह सब करवाया। ख़ानदान की बदनामी का सबब न बनना, लोगों को पसंद परिवार के गुण न छोड़ना, पेम्बरली ख़ानदान का असर न खोना — यही चाहत इसके पीछे प्रबल है। भाई होने का गुमान भी है। कुछ हद तक भाई-बहन के स्नेह से मिलकर, यही गुमान उन्हें अपनी बहन का बहुत मेहरबान और ध्यान रखने वाला रखवाला बना देता है। लोग आम तौर पर उन्हें सबसे ख़याल रखने वाला और बढ़िया भाई बताकर तारीफ़ करेंगे।' 'मिस डार्सी कैसी लड़की हैं?' विकहम ने सिर हिलाया। 'काश कह सकता कि वे मीठी हैं। डार्सी परिवार के बारे में बुरा कहना मुझे तकलीफ़ देता है, पर वह लड़की अपने भाई पर बहुत ज़्यादा गई है। बहुत, बहुत घमंडी हैं। बचपन में वे प्यारी और दिलकश थीं, और मुझसे बहुत हिली-मिली रहती थीं। मैंने भी उन्हें ख़ुश रखने में बेशुमार वक़्त लगाया। पर अब वे मेरे लिए कुछ भी मायने नहीं रखतीं। पंद्रह-सोलह साल की सुंदर लड़की हैं, और सुना है, हर तरह का हुनर और शऊर उनमें है। पिता के गुज़रने के बाद से लंदन को ही घर बना रखा है। एक महिला उनके साथ रहती हैं और उनकी शिक्षा का काम संभालती हैं।' कई बार चुप्पी छाई, और कई बार बात दूसरे विषयों पर भी गई। फिर भी एलिज़ाबेथ फिर से शुरुआती बात पर लौटे बिना न रह सकी। 'यह जानकर हैरानी होती है कि उनकी दोस्ती मिस्टर बिंगली से इतनी गहरी है। मिस्टर बिंगली तो मानो नरम स्वभाव की मिसाल लगते हैं, और मुझे सच में यक़ीन है, वे दिल से भले इंसान हैं — फिर ऐसे इंसान के दोस्त कैसे बन सकते हैं? दोनों एक-दूसरे से कैसे मेल खाते हैं? क्या आप मिस्टर बिंगली को जानते हैं?' 'बिलकुल नहीं जानता।' 'स्वभाव से नरम, प्यारे और दिलकश इंसान हैं। ज़रूर उन्हें पता नहीं होगा कि मिस्टर डार्सी असल में कैसे हैं।' 'शायद यही सच होगा। पर मिस्टर डार्सी मन में ठान लें, तो लोगों को ख़ुश करना जानते हैं। हुनर की कमी उनमें नहीं है। अगर लगे कि सामने वाला उस लायक़ है, तो बातचीत में बढ़िया साथी बन सकते हैं। जो उनके बराबर के रुतबे वाले हों, उनके बीच वे बिलकुल अलग इंसान बन जाते हैं, जो निचले तबके के लोगों के साथ नहीं होते। घमंड कभी नहीं छोड़ते, पर धनी लोगों के साथ रहते हुए वे दिलदार, निष्पक्ष, सच्चे, समझदार और इज़्ज़तदार बन जाते हैं, शायद पसंद आने लायक़ भी। हाँ, इसमें उनकी दौलत और शक्ल-सूरत का भी कुछ हाथ मानना होगा।'
कुछ ही देर में व्हिस्ट का खेल ख़त्म हो गया। खेलने वाले दूसरी मेज़ों के इर्द-गिर्द जमा होने लगे। मिस्टर कॉलिन्स चचेरी बहन एलिज़ाबेथ और श्रीमती फ़िलिप्स के बीच बैठ गए। श्रीमती फ़िलिप्स ने हमेशा की तरह पूछा कि खेल कैसा रहा। ख़ास अच्छा नहीं रहा। हर बाज़ी में वे हार गए थे। पर जैसे ही श्रीमती फ़िलिप्स को इस पर अफ़सोस होने लगा, उन्होंने गंभीर और संजीदा लहजे में साफ़ कह दिया कि इसकी कोई अहमियत ही नहीं। उन्होंने गुज़ारिश की कि वह रक़म मामूली-सी है, इसलिए इसकी परवाह न करें। 'बहन जी, मुझे भी अच्छी तरह पता है कि ताश की मेज़ पर बैठने वाले को इन बातों में क़िस्मत पर भरोसा करना ही पड़ता है। ख़ुशक़िस्मती से मेरी ऐसी हालत नहीं कि पाँच शिलिंग मेरे लिए कोई मसला बनें। ज़ाहिर है, बहुत लोग यह बात नहीं कह सकते। पर लेडी कैथरीन डी बर्ग की मेहरबानी से मैं ऐसी छोटी-मोटी बातों की चिंता करने वाली हालत से काफ़ी ऊपर उठ चुका हूँ।' मिस्टर विकहम ने इस बात पर ग़ौर किया। मिस्टर कॉलिन्स को कुछ पल देखने के बाद, उन्होंने एलिज़ाबेथ से धीमी आवाज़ में पूछा कि क्या उनके रिश्तेदार डी बर्ग परिवार से बहुत गहरे जुड़े हैं। 'लेडी कैथरीन डी बर्ग ने बहुत हाल में ही उन्हें पादरी-पद दिया है,' एलिज़ाबेथ ने जवाब दिया। 'मिस्टर कॉलिन्स पहली बार उनकी नज़र में कैसे आए, यह मुझे ठीक से नहीं पता, पर यह तय है कि दोनों की जान-पहचान पुरानी नहीं है।' 'यह तो आपको ज़रूर पता होगा कि लेडी कैथरीन डी बर्ग और लेडी ऐन डार्सी बहनें थीं। इसलिए आज के मिस्टर डार्सी की वे मौसी लगती हैं।' 'नहीं, सचमुच नहीं पता था। लेडी कैथरीन के रिश्तेदारों के बारे में मुझे कुछ भी मालूम नहीं था। परसों तक तो ऐसी किसी शख़्सियत का नाम भी नहीं सुना था।' 'उनकी बेटी, मिस डी बर्ग, बहुत बड़ी जायदाद की वारिस बनेंगी। माना जाता है कि वे और उनके चचेरे भाई ब्याह करके दोनों जागीरें एक कर देंगे।' यह सुनकर एलिज़ाबेथ को बेचारी मिस बिंगली का ख़याल आया, और उसके होंठों पर मुस्कान आ गई। अगर डार्सी पहले ही किसी और लड़की से ब्याह करने का मन बना चुके हैं, तो मिस बिंगली की सारी तवज्जो, उनकी बहन के लिए दिखाया गया प्यार और ख़ुद उन पर लुटाई गई तारीफ़ें — सब कुछ सचमुच बेकार और बेमानी थीं।
'मिस्टर कॉलिन्स,' एलिज़ाबेथ ने कहा, 'लेडी कैथरीन और उनकी बेटी की बहुत तारीफ़ करते हैं। पर उन्होंने जो कुछ लेडी कैथरीन के बारे में सुनाया, उससे लगता है, एहसानमंदी की वजह से उनकी परख धुँधली पड़ गई है। आश्रयदाता होने के बावजूद, मुझे लगता है, वे रोबीली और घमंडी औरत हैं।' 'मुझे लगता है, ये दोनों बातें उनमें भरपूर मात्रा में हैं,' विकहम ने जवाब दिया। 'बरसों से मुलाक़ात नहीं हुई, पर मुझे अच्छी तरह याद है कि पहले भी वे मुझे कभी पसंद नहीं आईं। हुक्म चलाने वाला और ढीठ रवैया रखती हैं। कहा जाता है कि उनकी समझ और चतुराई बहुत तेज़ है, पर सच यह होगा कि उस काबिलियत का कुछ हिस्सा रुतबे और दौलत से, कुछ हिस्सा उनके रोबीले अंदाज़ से, और बाक़ी हिस्सा भतीजे के घमंड से आता है। मिस्टर डार्सी चाहते हैं कि उनसे जुड़ा हर इंसान बेजोड़ अक़्ल वाला माना जाए।' एलिज़ाबेथ ने माना कि यह बड़ी माक़ूल वजह लगती है। दोनों एक-दूसरे से संतोषजनक ढंग से बातचीत करते रहे। फिर रात के खाने का वक़्त आया, ताश का खेल ख़त्म हुआ, और दूसरी महिलाओं को भी मिस्टर विकहम का ध्यान बँटा हुआ मिलने लगा, तो बातचीत रुक गई। श्रीमती फ़िलिप्स के रात के खाने की महफ़िल के शोर-शराबे में बातचीत करना नामुमकिन था। पर मिस्टर विकहम के बर्ताव ने सबका दिल जीत लिया। वे जो कुछ भी बोलते, बढ़िया बोलते, और जो कुछ भी करते, नफ़ासत से करते। एलिज़ाबेथ का दिमाग़ पूरी तरह उन्हीं से भरा हुआ था, जब वह वहाँ से निकली। घर तक के पूरे रास्ते वह मिस्टर विकहम और उनकी सुनाई बातों के सिवा कुछ और सोच ही न सकी। पर रास्ते भर उनका नाम लेने की फ़ुर्सत तक नहीं मिली। लिडिया और मिस्टर कॉलिन्स, दोनों में से किसी ने भी एक पल को मुँह बंद नहीं रखा। लिडिया लॉटरी टिकट्स के खेल और अपने हारे-जीते मछली के आकार के टोकनों के बारे में लगातार बकबक करती रही। मिस्टर कॉलिन्स मिस्टर और श्रीमती फ़िलिप्स की मेहरबानी की बातें सुनाते रहे। उन्होंने दावा किया कि व्हिस्ट में हारा पैसा उन्हें ज़रा भी मलाल नहीं देता। उन्होंने रात के खाने में आई हर डिश गिनाई। साथ ही उन्होंने बार-बार यह चिंता जताई कि कहीं वे चचेरी बहनों को बहुत तंग तो नहीं कर रहे। गाड़ी लॉन्गबर्न हवेली के सामने रुकने तक उनके पास कहने को इतनी बातें थीं कि सब कह पाना मुश्किल था।