हिंदी संस्करण

अध्याय 23

एलिज़ाबेथ माँ और बहनों के पास बैठी अभी-अभी सुनी बात मन में घुमा रही थी। वह सोच रही थी कि यह बात सबको बताए या नहीं। तभी सर विलियम लुकास ख़ुद मिलने आ पहुँचे। बेटी के कहने पर वे परिवार को सगाई की ख़बर सुनाने आए थे। उन्होंने कई तारीफ़ें कीं और दोनों घरानों के रिश्तेदार बनने की उम्मीद पर सबको दिल खोलकर बधाई दी। फिर उन्होंने पूरी बात बताई। सुनने वालों को हैरानी तो हुई ही, यक़ीन भी नहीं हुआ। श्रीमती बेनेट ने शिष्टाचार से ज़्यादा ज़िद को तरजीह दी और अड़ गईं कि वे ज़रूर पूरी तरह ग़लत समझ रहे हैं। लिडिया, जो हमेशा बिना सोचे बोलती और अक्सर बदतमीज़ी कर बैठती थी, ज़ोर से चिल्ला उठी। 'हे भगवान! सर विलियम, आप ऐसा कैसे कह सकते हैं? क्या आपको नहीं पता कि मिस्टर कॉलिन्स लिज़ी से शादी करना चाहते हैं?' दरबारी जैसी मीठी बातचीत की कला न होती, तो ऐसा बर्ताव सहकर ग़ुस्सा रोकना मुश्किल होता। पर सर विलियम ने बड़े शिष्ट ढंग से यह सब झेल लिया। अपनी ख़बर पूरी तरह सही है, यह पूरे भरोसे से कहते हुए भी, उन्होंने उनकी तमाम बदतमीज़ी अंत तक सब्र और शालीनता से सुनी। एलिज़ाबेथ को लगा कि उसे उन्हें इस नागवार हालत से बचाना चाहिए। उसने आगे आकर उनकी बात की पुष्टि की, यह कहते हुए कि यह बात उसे शार्लट से ख़ुद पहले ही पता चल चुकी थी। माँ और बहनों की चीख़-पुकार रोकने के लिए उसने सर विलियम को दिल से बधाई दी। जेन भी फ़ौरन बधाई देने में शामिल हो गई। एलिज़ाबेथ ने कई बातें कहीं — इस शादी से मिलने वाली ख़ुशी, मिस्टर कॉलिन्स का अच्छा स्वभाव, और यह कि हंसफ़र्ड लंदन से कितना पास है।

सच तो यह था कि श्रीमती बेनेट सर विलियम के सामने रहते बहुत ज़्यादा सदमे में थीं, इसलिए ज़्यादा कुछ बोल न सकीं। पर उनके जाते ही उनका जज़्बात बेक़ाबू होकर फूट पड़ा। पहले तो वे इस बात को अंत तक मानने को तैयार ही न हुईं। फिर उन्हें यक़ीन हो गया कि मिस्टर कॉलिन्स को ज़रूर धोखे में रखा गया है। साथ ही उन्होंने यह भी चाहा कि दोनों कभी सुखी न रहें। यह भी सोचा कि सगाई टूट भी सकती है। पर इस सारे मामले से उन्होंने बस दो नतीजे निकाले। एक — इस सारी बदक़िस्मती की असली वजह एलिज़ाबेथ है। दूसरा — उनके साथ सबने बड़ा जंगली बर्ताव किया है। बाक़ी दिन वे इन्हीं दो बातों को पकड़े रहीं। किसी बात से उन्हें चैन नहीं आया, किसी बात से मन नहीं पसीजा। एक दिन गुज़र जाने से भी उनका ग़ुस्सा ठंडा न पड़ा। एलिज़ाबेथ को बिना डाँटे देख पाने में उन्हें एक हफ़्ता लगा। सर विलियम या लेडी लुकास से बिना बदतमीज़ी बोल पाने में एक महीना लगा। उनकी बेटी को थोड़ा भी माफ़ करने में कई महीने लग गए। मिस्टर बेनेट का दिल इस मामले में कहीं ज़्यादा शांत था। उन्होंने कहा कि उन्हें जो सचमुच महसूस हुआ, वह बड़ा सुखद ही था। शार्लट लुकास, जिन्हें वे हमेशा काफ़ी समझदार मानते आए थे, अपनी पत्नी जितनी ही मूर्ख निकलीं — बल्कि अपनी बेटी से भी ज़्यादा मूर्ख — यह जानकर उन्हें ख़ुशी हुई! जेन ने माना कि यह शादी उसे कुछ हैरान करती है। पर हैरानी की बात से कहीं ज़्यादा उसने यह कहा कि वह दिल से चाहती है दोनों ख़ुश रहें। एलिज़ाबेथ जेन को यह यक़ीन नहीं दिला सकी कि यह ख़ुशी शायद मुश्किल हो। किटी और लिडिया को मिस लुकास से ज़रा भी जलन नहीं थी, क्योंकि मिस्टर कॉलिन्स तो बस एक पादरी ही थे। उनके लिए यह बात सिर्फ़ मेरिटन में फैलाने लायक़ एक नई ख़बर भर थी। लेडी लुकास बेटी को बढ़िया घर बिठाने की तसल्ली से श्रीमती बेनेट को यह क़र्ज़ चुका पाने में ख़ुद को जीता हुआ महसूस किए बिना न रह सकीं। वे अपनी ख़ुशी बताने को हमेशा से ज़्यादा बार लॉन्गबर्न आने लगीं — हालाँकि श्रीमती बेनेट का खट्टा चेहरा और तीखी बातें उस ख़ुशी को भगा देने के लिए काफ़ी थीं। एलिज़ाबेथ और शार्लट के बीच एक अजीब-सी झिझक पैदा हो गई। इसलिए दोनों इस बात पर एक-दूसरे से चुप्पी साधे रहीं। एलिज़ाबेथ को यक़ीन हो गया कि अब वे कभी दोबारा एक-दूसरे से दिल की सच्ची बात नहीं बाँट पाएँगी। शार्लट से निराश होकर एलिज़ाबेथ अपनी बहन की तरफ़ और भी ज़्यादा प्यार से झुक गई। जेन के खरे और नाज़ुक दिल पर उसका भरोसा कभी न डगमगाएगा। बिंगली गए हुए अब पूरा एक हफ़्ता हो चुका था, फिर भी उनके लौटने की कोई ख़बर नहीं थी। बहन की ख़ुशी की फ़िक्र दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही थी।

जेन ने कैरोलाइन की चिट्ठी का जवाब जल्दी ही भेज दिया। वह गिन-गिनकर दिन काट रही थी कि फिर कब कोई ख़बर आए। मिस्टर कॉलिन्स की वादा की हुई शुक्रिया-चिट्ठी मंगलवार को पिता के नाम पहुँची। पूरी चिट्ठी बड़े गंभीर धन्यवाद से भरी थी, मानो वे पूरा एक साल उस घर में ठहरे रहे हों। इस तरह अपने ज़मीर का फ़र्ज़ निभाकर उन्होंने बड़े जोशीले शब्दों में अपनी ख़ुशी का एलान किया — अपनी मेहरबान पड़ोसन मिस लुकास का प्यार पा लिया था। फिर उन्होंने समझाया कि जब उन्होंने बड़ी मेहरबानी से दोबारा लॉन्गबर्न आने की बात कही थी, तो उन्होंने ख़ुशी-ख़ुशी इसलिए मान लिया था कि बस उनके साथ का सुख पाना चाहते थे। उन्हें उम्मीद थी कि अगले पखवाड़े सोमवार को वे लौट सकेंगे। यह भी जोड़ा कि लेडी कैथरीन उनकी शादी को दिल से मंज़ूर करती हैं और चाहती हैं कि जितनी जल्दी हो सके यह हो जाए। उनका मानना था कि यह बात अपनी प्यारी शार्लट को जल्द तारीख़ तय करने और उन्हें दुनिया का सबसे ख़ुशनसीब आदमी बनाने के लिए एक अकाट्य दलील साबित होगी। मिस्टर कॉलिन्स का हर्टफ़र्डशायर लौटना अब श्रीमती बेनेट के लिए ख़ुशी की बात नहीं रह गया था। बल्कि वे पति से कम शिकायत नहीं करना चाहती थीं। लूकस लॉज की जगह लॉन्गबर्न आना बड़ी अजीब बात थी। ऊपर से यह बड़ा तकलीफ़देह और बेहद खिझाने वाला था। इतनी तबीयत ख़राब रहते घर में मेहमान रखना उन्हें पसंद नहीं था। इनमें भी प्रेमी सबसे कम पसंद थे। यही थी श्रीमती बेनेट की शालीन-सी शिकायत। पर मिस्टर बिंगली के लगातार न लौटने की बड़ी तकलीफ़ के आगे यह शिकायत भी बस पल भर के लिए ही पीछे हट जाती। इस बात से जेन और एलिज़ाबेथ, दोनों का मन बेचैन था। दिन गुज़रते गए, पर बिंगली की कोई ख़बर सुनने को न मिली। बस जल्द ही मेरिटन में यह अफ़वाह फैल गई कि वे पूरी सर्दी नेदरफ़ील्ड नहीं लौटेंगे। यह बात सुनकर श्रीमती बेनेट बहुत ग़ुस्से में आ जातीं। हर बार वे इसे बेहूदी और बदनीयती भरा झूठ बताकर काटतीं। एलिज़ाबेथ को भी अब फ़िक्र होने लगी। उसे यह डर नहीं था कि बिंगली का दिल ठंडा पड़ गया है। उसे डर यह था कि कहीं उनकी बहनें उन्हें दूर रखने में कामयाब न हो जाएँ। जेन की ख़ुशी बिगाड़ने वाले ऐसे ख़याल क़बूल करने का उसका मन नहीं था। किसी वफ़ादार प्रेमी के दिल पर शक करना भी उसे उतना ही नागवार था। फिर भी यह ख़याल बार-बार लौट आता। उसे डर था कि दोनों ठंडी बहनों की ताक़त और रोबदार दोस्त की ताक़त मिलकर, ऊपर से मिस डार्सी का जादू और लंदन के मनोरंजन भी जुड़ जाएँ, तो शायद बिंगली का प्यार यह सब झेल न पाए। बेशक इस अनिश्चय के दौरान जेन की बेचैनी एलिज़ाबेथ से कहीं ज़्यादा तकलीफ़देह थी। पर जेन हर जज़्बात छिपाने की कोशिश करती रही। इसलिए बहनों के बीच यह बात कभी ज़बान पर नहीं आई। माँ में ऐसी कोई एहतियात नहीं थी। शायद ही कोई घंटा ऐसा गुज़रता जब वे बिंगली की बात न करतीं। वे बेसब्री से इंतज़ार करतीं कि वे कब आएँगे। कभी-कभी वे जेन से यह क़बूल करवाना चाहतीं कि अगर वे न लौटे, तो जेन ख़ुद को बड़ा नाइंसाफ़ी का शिकार मानेगी। इन हमलों को किसी क़दर चैन से सहने के लिए जेन के हरदम नरम स्वभाव की पूरी ताक़त लग जाती।

मिस्टर कॉलिन्स ठीक अगले पखवाड़े सोमवार को लौट आए। पर लॉन्गबर्न में उनका स्वागत पहली बार जितना अपनापन भरा नहीं रहा। फिर भी वे इतने ख़ुश थे कि उन्हें ज़्यादा ध्यान की ज़रूरत ही नहीं पड़ी। ख़ुशक़िस्मती से बाक़ी लोग उनका साथ देने से काफ़ी हद तक बच गए, क्योंकि वे अपने प्रेम-निवेदन में ही मसरूफ़ रहते थे। ज़्यादातर वक़्त वे लूकस लॉज में ही बिताते। कभी-कभी परिवार के सोने जाने से ठीक पहले लॉन्गबर्न लौटते, बस इतना वक़्त बचता कि अपनी ग़ैरहाज़िरी की माफ़ी माँग सकें। श्रीमती बेनेट सचमुच बड़ी तरस खाने लायक़ हालत में थीं। इस शादी से जुड़ी थोड़ी-सी भी बात छिड़ते ही उनका मूड तकलीफ़ की हद तक बिगड़ जाता। वे जहाँ भी जातीं, वहाँ यह बात सुनने को ज़रूर मिलती। मिस लुकास को देखना भी उन्हें नागवार लगता। वे उन्हें इसी घर की आने वाली मालकिन मानकर जलन और घृणा से देखतीं। जब भी शार्लट मिलने आतीं, वे मान लेतीं कि वे बस उस दिन का इंतज़ार करने आई हैं, जब यह घर उनका हो जाएगा। जब भी शार्लट धीमी आवाज़ में मिस्टर कॉलिन्स से बात करतीं, उन्हें यक़ीन हो जाता कि दोनों लॉन्गबर्न जागीर की ही बात कर रहे हैं। उन्हें यह भी यक़ीन था कि मिस्टर बेनेट के मरते ही उन्हें और उनकी बेटियों को घर से निकाल बाहर करने की ठान ली गई है। यह सब वे बड़े रंज के साथ पति से कहती रहतीं। 'सच कहती हूँ, मेरे प्यारे मिस्टर बेनेट,' उन्होंने कहा। 'शार्लट लुकास किसी दिन इस घर की मालकिन बनेगी, यह सोचकर बड़ा दुख होता है। मुझे उसके लिए जगह ख़ाली करनी पड़े, और जीते-जी देखना पड़े कि वह मेरी जगह ले रही है!' 'मेरी प्यारी, इतने उदास ख़यालों में मत डूबो। बेहतर की उम्मीद रखो। यह मान लो कि शायद मैं तुमसे ज़्यादा जिऊँ।'

श्रीमती बेनेट के लिए यह ख़ास तसल्ली की बात न थी। इसलिए जवाब देने के बजाय वे पहले जैसी ही बातें आगे कहती रहीं। 'मुझसे यह ख़याल सहा नहीं जाता कि वे लोग पूरी जागीर पा जाएँगे। जागीर सिर्फ़ बेटों की तरफ़ बँधी न होती, तो मुझे कोई फ़र्क़ न पड़ता।' 'क्या फ़र्क़ न पड़ता?' 'किसी भी बात से मुझे कोई फ़र्क़ ही न पड़ता।' 'भगवान का शुक्र मनाओ कि हम ऐसे बेहिस हाल से बचे हुए हैं।' 'मेरे प्यारे मिस्टर बेनेट, जागीर के बेटों की तरफ़ बँधे होने के मामले में मैं किसी बात का शुक्र नहीं मना सकती। मुझे समझ नहीं आता, कोई कैसे अपनी ही बेटियों को छोड़कर जागीर किसी और के नाम बाँध सकता है, ज़मीर पर बोझ लिए बिना। वह भी सिर्फ़ मिस्टर कॉलिन्स के लिए! उन्हें किसी और से ज़्यादा यह घर पाने का क्या हक़ है?' 'यह फ़ैसला मैं तुम्हारे ऊपर छोड़ता हूँ,' मिस्टर बेनेट ने कहा।