हिंदी संस्करण

अध्याय 22

बेनेट परिवार ने लूकस परिवार के साथ शाम का खाना खाने का तय किया। उस दिन भी मिस लुकास ने दिन का ज़्यादातर हिस्सा मिस्टर कॉलिन्स की बातें कृपापूर्वक सुनने में बिताया। मौक़ा देखकर एलिज़ाबेथ ने उनका शुक्रिया अदा किया। 'इससे उनका मन अच्छा हो जाता है। सच में, मैं तुम्हारा जितना एहसान मानूँ, कम है।'

शार्लट ने कहा कि मदद कर पाकर उन्हें ख़ुशी हुई। थोड़ा वक़्त देने के बदले इतना काफ़ी है, यह कहकर उन्होंने अपनी सहेली को तसल्ली दी। यह बड़ी मीठी बात थी। पर शार्लट की इस दयालुता के पीछे एलिज़ाबेथ के सोचे से कहीं बड़ा मक़सद था। मक़सद यह था कि मिस्टर कॉलिन्स फिर से प्रस्ताव न रख पाएँ — इसके लिए वे उनका ध्यान अपनी ओर मोड़ना चाहती थीं। यही मिस लुकास की योजना थी। बात बड़ी अच्छी तरह बनती दिख रही थी। अगर वे इतनी जल्दी हर्टफ़र्डशायर छोड़ने वाले न होते, तो उस रात विदा होते वक़्त शार्लट को अपनी कामयाबी का लगभग यक़ीन हो जाता। पर इस मामले में उन्होंने मिस्टर कॉलिन्स के स्वभाव में छिपे जोश और आत्मनिर्भरता को कुछ कम करके आँका था। उसी स्वभाव की बदौलत वे अगली सुबह हैरान कर देने लायक़ चुपके से लॉन्गबर्न हवेली से निकल भागे। और दौड़ते हुए लूकस लॉज पहुँचे, उनके क़दमों में गिर पड़ने के लिए। वे चचेरी बहनों की नज़र में न आने की कोशिश करते रहे। उन्हें जाते देखकर बहनें उनका मक़सद ज़रूर भाँप लेतीं। कामयाबी तय होने से पहले, वे यह भी नहीं जताना चाहते थे कि कोशिश कर रहे हैं। शार्लट ने काफ़ी उम्मीद जगाने वाला रवैया दिखाया था, इसलिए उनका कामयाबी पर लगभग यक़ीन बेवजह न था। पर बुधवार की घटना के बाद उनका भरोसा पहले से कुछ कम हो गया था। फिर भी उनका स्वागत जिस अंदाज़ में हुआ, वह बेहद उम्मीद जगाने वाला था। मिस लुकास ने ऊपर की खिड़की से उन्हें घर की ओर चलकर आते देखा। फिर तुरंत बाहर निकलीं, मानो अचानक मुलाक़ात हुई हो, और राह में ही उनका स्वागत किया। उन्हें ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि वहाँ इतना प्यार और इतनी वाक्पटुता उनका इंतज़ार कर रही है। मिस्टर कॉलिन्स की लम्बी बातें जितना कम समय दे सकीं, उतने ही कम समय में दोनों के लिए तसल्लीबख़्श ढंग से सब कुछ तय हो गया। घर में क़दम रखते हुए उन्होंने बड़ी मिन्नत से वह तारीख़ तय करने को कहा, जो उन्हें दुनिया का सबसे ख़ुशनसीब आदमी बना दे। फ़िलहाल यह गुज़ारिश माननी नहीं, टालनी पड़ी। पर शार्लट का उनकी ख़ुशी को तड़पाकर रखने का कोई इरादा न था। उनकी जन्मजात मूर्खता के चलते उनके प्रस्ताव में ऐसा कोई आकर्षण नहीं था कि कोई स्त्री उस पल को लम्बा खींचना चाहे। बिना किसी निजी लगाव के, बस घर बसाने का सहारा पाने की चाह से उन्हें स्वीकार करने वाली मिस लुकास के लिए यह मायने नहीं रखता था कि वह सहारा कितनी जल्दी मिलता है।

दोनों ने जल्द ही सर विलियम और लेडी लुकास से इजाज़त माँगी। दोनों बड़ी ख़ुशी से फ़ौरन राज़ी हो गए। मिस्टर कॉलिन्स की मौजूदा हालत देखें तो यह बेटी के लिए बेहतरीन रिश्ता था। माँ-बाप के पास बेटी को देने के लिए जायदाद के नाम पर कुछ ख़ास न था। वहीं उनके आगे चलकर अमीर बनने की उम्मीद बहुत रोशन थी। लेडी लुकास ने इस मामले में पहले कभी न दिखाया जोश दिखाते हुए, फ़ौरन यह हिसाब लगाना शुरू कर दिया कि मिस्टर बेनेट अभी और कितने बरस जिएँगे। सर विलियम ने पक्के तौर पर कहा कि जब मिस्टर कॉलिन्स को लॉन्गबर्न जागीर मिल जाएगी, तब दोनों पति-पत्नी का साथ में सेंट जेम्स दरबार में जाना बिलकुल वाजिब होगा। एक बात में कहें तो पूरा परिवार इस बात से बहुत ख़ुश था। छोटी बेटियों ने उम्मीद बाँधी कि अब वे तय समय से एक-दो साल पहले ही समाज में क़दम रख सकेंगी। बेटों को यह डर जाता रहा कि कहीं शार्लट कुँआरी ही बुढ़ापे में न मर जाए। शार्लट ख़ुद काफ़ी शांत रहीं। जो चाहा था वह पा लिया था, और अब सोचने-समझने का वक़्त भी था। कुल मिलाकर मन संतुष्ट था। बेशक मिस्टर कॉलिन्स न तो समझदार थे, न सुहावने। उनके साथ रहना तकलीफ़देह था। उनका उन्हें प्यार करना भी बस कल्पना की बात थी। फिर भी वे उनके होने वाले पति थे। शार्लट ने कभी मर्दों या शादी को बहुत बड़ी चीज़ नहीं माना था। पर शादी हमेशा से उनका लक्ष्य रही थी। कम जायदाद पर पढ़ी-लिखी जवान स्त्री के लिए यही एक रास्ता था जिससे वह इज़्ज़त के साथ अपना भविष्य सुरक्षित कर सके। यह ख़ुशी देगी या नहीं, यह चाहे जितना अनिश्चित हो, पर तंगी से बचने का यही सबसे सुखद रास्ता था, इसमें कोई शक नहीं। अब वह रास्ता उन्हें मिल गया था। कभी भी सुंदर न रहीं सत्ताईस बरस की शार्लट को अपनी क़िस्मत गहराई से महसूस हुई। इस पूरे मामले में सबसे ज़्यादा जो बात खटकती थी, वह यह थी कि उनकी सबसे प्यारी सहेली एलिज़ाबेथ बेनेट ज़रूर हैरान होगी। एलिज़ाबेथ हैरान होगी, और शायद उन्हें कोसेगी भी। फ़ैसला डगमगाएगा नहीं, पर ऐसी उलाहना सुनकर मन दुखी ज़रूर होगा। शार्लट ने ख़ुद यह ख़बर देने का तय किया। इसलिए जब मिस्टर कॉलिन्स शाम का खाना खाने लॉन्गबर्न लौटे, तो उन्होंने उनसे कहा कि हुई बात परिवार में किसी को भी न बताएँ। उन्होंने बड़ी शालीनता से यह राज़ रखने का वादा किया, यह तो तय ही था। पर वादा निभाना आसान न था। इतनी देर कहाँ रहे, यह जानने को उत्सुक लोगों ने उनके लौटते ही सीधे-सीधे सवाल दाग़ दिए। इन सवालों से बचने के लिए उन्हें थोड़ी होशियारी दिखानी पड़ी। ऊपर से, वे अपने कामयाब इश्क़ की ख़बर सारी दुनिया को सुनाए बिना रह ही नहीं पा रहे थे। उन्हें ख़ुद पर बड़ा क़ाबू रखना पड़ा।

उन्हें अगले दिन इतनी सुबह निकलना था कि परिवार में किसी से मुलाक़ात न हो सकी। इसलिए जब लेडियाँ रात के लिए अपने कमरों को चलीं, तभी विदाई हुई। श्रीमती बेनेट ने बड़ी शिष्टता और अपनेपन से कहा। जब भी दूसरे काम इजाज़त दें, वे कभी भी लॉन्गबर्न लौट आएँ, तो उन्हें बड़ी ख़ुशी होगी। उन्होंने जवाब दिया। 'आदरणीय महोदया, यह न्योता ठीक वही है जिसे पाने की मैं बेसब्री से आस लगाए था, इसलिए मुझे बड़ी ख़ुशी है। जितनी जल्दी हो सके, मैं ज़रूर यह मेहरबानी क़बूल करूँगा। इस पर आप भरोसा रख सकती हैं।' सब हैरान रह गए। मिस्टर बेनेट, जो उनके इतनी जल्दी लौटने की तनिक भी कामना नहीं रखते थे, फ़ौरन बोले। 'पर भले महोदय, क्या इसमें कोई ख़तरा नहीं कि लेडी कैथरीन नाराज़ हो जाएँ? आश्रयदाता का मिज़ाज बिगाड़ने का ख़तरा मोल लेने से बेहतर है कि रिश्तेदारों की उपेक्षा कर दी जाए।' मिस्टर कॉलिन्स ने जवाब दिया। 'आदरणीय महोदय, आप इतनी अपनेपन से जो चेतावनी दे रहे हैं, उसके लिए मैं ख़ास तौर पर आभारी हूँ। यक़ीन मानिए, मैं लेडी कैथरीन की सहमति के बिना ऐसा कोई बड़ा फ़ैसला कभी नहीं लूँगा।' 'चाहे जितनी एहतियात बरतें, कम ही है। उनका ग़ुस्सा मोल लेने से बेहतर है कि कोई और भी ख़तरा उठा लीजिए। अगर दोबारा हमसे मिलने आना उनका ग़ुस्सा जगा सकता है — और मुझे तो लगता है कि इसकी पूरी संभावना है — तो चुपचाप घर पर ही रहिए। हमें तनिक भी बुरा नहीं लगेगा, यह मान लीजिए।' 'आदरणीय महोदय, यक़ीन कीजिए। आपकी इतनी अपनेपन भरी फ़िक्र से मेरे मन में गहरा एहसान उमड़ आया है। हर्टफ़र्डशायर में रहते हुए आपने मुझ पर जो मेहरबानियाँ की हैं, उन सबके लिए भी। इस बात के लिए भी जल्द ही आपको मेरा आभार-पत्र मिलेगा, यह मान लीजिए। सुंदर चचेरी बहनों को भी यहीं से मैं सेहत और ख़ुशी की दुआ देने की गुस्ताख़ी करना चाहता हूँ — हालाँकि मेरी अनुपस्थिति इतनी लंबी नहीं होगी कि इसकी ज़रूरत पड़े। चचेरी बहन एलिज़ाबेथ भी, बेशक, इससे अलग नहीं हैं।'

लेडियों ने ठीक ढंग से नमस्ते कहकर विदा ली। उनके जल्द लौटने के इरादे से सब बराबर हैरान थे। श्रीमती बेनेट को उम्मीद थी कि इसका मतलब है वे किसी छोटी बेटी को ब्याह का प्रस्ताव देने की सोच रहे हैं। मैरी को समझा-बुझाकर उन्हें स्वीकार करने के लिए राज़ी किया जा सकता था। मैरी बाक़ी बहनों से कहीं ज़्यादा उनकी काबिलियत को सराहती थी। उनके विचारों में कभी-कभी दाद देने लायक़ गंभीरता होती थी। मैरी सोचती थी कि वे उतने चतुर हरगिज़ नहीं जितनी वह ख़ुद है। फिर भी अगर उसे अपने जैसी मिसाल देखकर और किताबें पढ़कर ख़ुद को सँवारने का हौसला मिले, तो वे बड़े अच्छे साथी बन सकते हैं, ऐसा वह मानती थी। पर अगली सुबह वह सारी उम्मीद ख़त्म हो गई। नाश्ता किए ज़्यादा देर नहीं हुई थी कि मिस लुकास आ पहुँचीं। और एलिज़ाबेथ से अकेले में बात करते हुए उन्होंने पिछले दिन की बात सुनाई। पिछले एक-दो दिन में एलिज़ाबेथ के मन में भी एक बार यह ख़याल आया था कि मिस्टर कॉलिन्स को शायद अपनी सहेली से मुहब्बत हो गई है। पर उसे लगता था कि शार्लट के उन्हें स्वीकार करने की संभावना उतनी ही कम है, जितनी ख़ुद उसकी। इसलिए इतनी हैरान हो गई कि पहले तो शिष्टाचार भूलकर बोल ही पड़ी। 'मिस्टर कॉलिन्स से सगाई हो गई! प्यारी शार्लट, ऐसा हो ही नहीं सकता!' बात सुनाते वक़्त मिस लुकास बड़ी मेहनत से चेहरे पर शांति बनाए हुए थीं। पर इतनी सीधी उलाहना सुनकर वे पल भर के लिए अपनी घबराहट छिपा न सकीं। फिर भी यह ऐसा जवाब नहीं था जिसकी उन्हें उम्मीद न हो। वे जल्दी ही सँभल गईं और शांति से बोलीं। 'प्यारी एलिज़ा, हैरान क्यों हो रही हो? मिस्टर कॉलिन्स को तुमसे प्रस्ताव रखकर कामयाबी नसीब नहीं हुई, तो क्या इसलिए यक़ीन करना मुश्किल है कि वे किसी भी स्त्री पर अच्छा असर नहीं डाल सकते?' पर एलिज़ाबेथ अब तक ख़ुद को सँभाल चुकी थी। बड़ी मशक़्क़त के बाद वह काफ़ी दृढ़ आवाज़ में बोली। उसने कहा कि दोनों के रिश्तेदार बनने की उम्मीद से उसे बहुत ख़ुशी है, और वह चाहती है कि उसकी सहेली को हर मुमकिन ख़ुशी मिले।

शार्लट ने जवाब दिया। 'मुझे पता है तुम क्या सोच रही हो। हैरान तो हुई ही होगी। वह भी बहुत ज़्यादा। मिस्टर कॉलिन्स तो अभी कुछ ही दिन पहले तुमसे शादी करना चाहते थे। पर अगर तुम अच्छे से सोचो, तो उम्मीद है मैंने जो किया, उसे तुम समझ पाओगी। तुम जानती ही हो, मैं रूमानी इंसान नहीं हूँ। कभी नहीं रही। मुझे बस एक आरामदेह घर चाहिए। मिस्टर कॉलिन्स के स्वभाव, घराने और सामाजिक हैसियत को देखते हुए, मुझे यक़ीन है कि उनके साथ मेरे ख़ुश रहने की संभावना उतनी ही है जितनी ज़्यादातर शादी करने वालों को मिलती है।' एलिज़ाबेथ ने चुपचाप जवाब दिया, 'ज़रूर।' कुछ अटपटी ख़ामोशी के बाद दोनों परिवार वालों के पास लौट गईं। शार्लट ज़्यादा देर नहीं रुकीं। इसके बाद एलिज़ाबेथ अकेली रह गई और सुनी हुई बात को मन में घुमाती रही। इतने बेमेल विवाह को थोड़ा भी क़बूल करने में उसे बहुत वक़्त लगा। मिस्टर कॉलिन्स का तीन दिन में दो बार प्रस्ताव रखना जितनी अजीब बात थी, अब किसी के उन्हें स्वीकार कर लेने के सामने वह कुछ भी नहीं थी। शार्लट का शादी को लेकर नज़रिया उसके जैसा नहीं, यह वह हमेशा से जानती थी। पर असल में जब बात अमल में लाने की आई, तो सांसारिक फ़ायदे के लिए वह अपने सारे बेहतर जज़्बात यों तज देगी, यह उसने सपने में भी न सोचा था। मिस्टर कॉलिन्स की पत्नी बनी शार्लट — कितना शर्मनाक नज़ारा! सहेली ने ख़ुद अपनी गरिमा गिरा ली, और उसकी नज़रों में अपना आदर खो दिया — इस दुख के साथ-साथ उसे यह तकलीफ़देह यक़ीन भी हो गया कि उस सहेली का, अपनी चुनी हुई क़िस्मत में, ज़रा भी ख़ुश हो पाना नामुमकिन है।