हिंदी संस्करण
अध्याय 25
मिस्टर कॉलिन्स ने प्यार का इज़हार करते और सुखद भविष्य के सपने देखते हुए एक हफ़्ता बिताया। शनिवार आते ही उन्हें अपनी प्यारी शार्लट को छोड़ना पड़ा। पर दुल्हन के स्वागत की तैयारी करनी थी, इसलिए जुदाई का दुख कुछ कम हो गया। हर्टफ़र्डशायर लौटते ही जल्द वह तारीख़ तय होने की उम्मीद थी, जो उन्हें दुनिया का सबसे ख़ुशनसीब आदमी बना देगी। उन्होंने हमेशा की तरह बड़ी गंभीरता से लॉन्गबर्न के रिश्तेदारों से विदा ली। अपनी सुंदर चचेरी बहनों की सेहत और ख़ुशी की एक बार फिर दुआ की। और उनके पिता को फिर एक शुक्रिया-चिट्ठी भेजने का वादा किया।
अगले सोमवार श्रीमती बेनेट को अपने छोटे भाई और भाभी के स्वागत की ख़ुशी मिली। दोनों हमेशा की तरह क्रिसमस लॉन्गबर्न में बिताने आए थे। मिस्टर गार्डिनर सूझ-बूझ वाले, शरीफ़ आदमी थे। स्वभाव और तालीम, दोनों में वे अपनी बड़ी बहन से कहीं बेहतर थे। नेदरफ़ील्ड की महिलाओं को यक़ीन ही न आता कि व्यापार करने वाला और अपने ही गोदाम के सामने रहने वाला आदमी इतना सुसंस्कृत और ख़ुशमिज़ाज हो सकता है। श्रीमती बेनेट और श्रीमती फ़िलिप्स से कुछ बरस छोटी श्रीमती गार्डिनर मिलनसार, समझदार और सलीक़ेदार महिला थीं। लॉन्गबर्न की भांजियाँ उन्हें बहुत चाहती थीं। ख़ासकर दोनों बड़ी बहनें उनके बहुत क़रीब थीं। जेन और एलिज़ाबेथ लंदन जातीं तो अक्सर मामी के घर ही ठहरतीं। श्रीमती गार्डिनर ने पहुँचते ही सबसे पहले तोहफ़े बाँटे और नए फ़ैशन की बातें सुनाईं। यह काम पूरा होते ही अब कम मेहनत वाली भूमिका उनका इंतज़ार कर रही थी — अब सुनने की बारी थी। श्रीमती बेनेट के पास सुनाने को बहुत शिकायतें थीं, बहुत रोना-धोना था। भाई से आख़िरी मुलाक़ात के बाद से पूरे परिवार के साथ बड़ा अन्याय हुआ था। दो बेटियों की शादी होते-होते रह गई थी, पर आख़िर में कुछ भी न हो पाया। श्रीमती बेनेट कहती गईं। 'जेन को दोष नहीं देती, वह चाहती तो मिस्टर बिंगली को पा ही लेती। पर लिज़ी की तो बात ही मत पूछो! हे भाभी! सोचकर बहुत दुख होता है कि वह बस ज़िद न करती तो अब तक मिस्टर कॉलिन्स की बीवी बन चुकी होती। उन्होंने ठीक इसी कमरे में उससे शादी की माँग रखी थी, और उसने ठुकरा दिया। इसी वजह से लेडी लुकास ने मुझसे पहले अपनी बेटी ब्याह दी। और लॉन्गबर्न की जागीर अब भी बेटों की तरफ़ बँधी वैसी ही रह गई। सच कहती हूँ भाभी, लुकास परिवार बड़ा चालाक है, बस अपना फ़ायदा देखते हैं। यह कहते हुए बुरा लगता है, पर सच यही है। अपने ही घर में जब बात मन-मुताबिक़ नहीं होती, ऊपर से ऐसे पड़ोसी मिले हैं जो अपनी सोच सबसे आगे रखते हैं, तो नस-नस कमज़ोर पड़ जाती है, तबीयत भी ठीक नहीं रहती। फिर भी ठीक इसी वक़्त तुम्हारा आना सबसे बड़ी तसल्ली है। लंबी आस्तीन की बात सुनाई, वह भी बड़ी अच्छी लगी।' श्रीमती गार्डिनर को जेन और एलिज़ाबेथ की चिट्ठियों से यह अधिकतर ख़बर पहले ही पता थी। अपनी ननद को छोटा-सा जवाब देकर, भांजियों पर तरस खाते हुए उन्होंने बात का रुख़ मोड़ दिया।
बाद में जब एलिज़ाबेथ अकेली मामी के साथ रह गई, तो मामी ने इस बारे में और बात की। 'जेन के लिए तो अच्छा ही रिश्ता लग रहा था। बिगड़ गया, अफ़सोस की बात है। पर ऐसा तो अक्सर हो जाता है। तुमने जिस मिस्टर बिंगली की बात कही, वैसे जवान लड़के किसी ख़ूबसूरत लड़की से कुछ हफ़्तों की मुलाक़ात में ही आसानी से प्यार में पड़ जाते हैं। फिर किसी इत्तिफ़ाक़ से जुदाई हो जाए, तो उतनी ही आसानी से भुला भी देते हैं। ऐसी चंचलता आम बात है।' 'यह अपनी जगह अच्छी तसल्ली है,' एलिज़ाबेथ ने कहा। 'पर हम पर यह लागू नहीं होती। हमें यह तकलीफ़ किसी इत्तिफ़ाक़ से नहीं मिली। कुछ दिन पहले तक जिस लड़की से बेहद प्यार करते थे, उसे भुलाने के लिए दोस्तों का दख़ल देकर एक मालदार जवान को समझा-बुझा देना, यह आम बात नहीं है।' 'पर «बेहद प्यार करना» कहना बहुत आम, धुँधला और अस्पष्ट जुमला है। इसका ठीक-ठीक मतलब क्या है, यह तय करना मुश्किल है। यह सच्चे, गहरे प्यार के लिए भी बोला जाता है, और बस आधे घंटे की जान-पहचान से उपजे जज़्बात के लिए भी। सच बताओ, मिस्टर बिंगली का प्यार कितना बेहद था?' 'इससे ज़्यादा उम्मीद जगाते हुए बढ़ता दिल मैंने कभी नहीं देखा। बाक़ी सबसे बिल्कुल बेपरवाह हो गए थे, और सिर्फ़ जेन में पूरी तरह खोए हुए थे। जब भी मिलते, यह और साफ़ होता जाता। अपने ही नाच में दो-तीन जवान लड़कियों को नाचने के लिए नहीं पूछा और उन्हें नाराज़ कर दिया। मैंने ख़ुद दो बार उनसे बात की, दोनों बार उन्होंने जवाब ही नहीं दिया। इससे बेहतर लक्षण और क्या होगा? सबसे बदतमीज़ी से पेश आना ही तो प्यार का असली रूप है, है न?' 'हाँ, हाँ! अगर वह वैसा ही प्यार था जैसा मुझे लगता है उन्हें महसूस हुआ होगा। बेचारी जेन! उसका स्वभाव ऐसा है कि शायद जल्दी उबर न पाए, यह सोचकर दुख होता है। काश यह तुम्हारे साथ हुआ होता, लिज़ी। तुम तो हँसकर टाल देतीं और जल्दी उबर भी जातीं। अच्छा, हम लौटते वक़्त अगर जेन को भी साथ चलने को कहें, तो क्या वह मान जाएगी? माहौल बदलने से भी फ़ायदा होगा, और कुछ दिन घर से दूर आराम करना शायद सबसे अच्छा उपाय हो।' एलिज़ाबेथ को यह सुझाव बहुत भाया। उसे यक़ीन था कि जेन भी ख़ुशी-ख़ुशी मान जाएगी।
श्रीमती गार्डिनर ने जोड़ा। 'बस उम्मीद है कि इस जवान के बारे में सोच-सोचकर जेन का फ़ैसला न बिगड़े। हम लंदन में भी बिल्कुल अलग इलाक़े में रहते हैं, और हमारे जान-पहचान वाले भी बिल्कुल अलग हैं। तुम्हें पता ही है, हम बाहर भी कम ही निकलते हैं। जब तक वह ख़ुद जेन से मिलने न आए, दोनों का आमना-सामना होने की गुंजाइश बहुत कम है।' 'यह तो बिल्कुल नामुमकिन है। अभी तो वह अपने दोस्त की निगरानी में हैं। मिस्टर डार्सी उन्हें लंदन के उस इलाक़े में जेन से मिलने की इजाज़त कभी नहीं देंगे! प्यारी मामी, आपको यह ख़याल कैसे आया? मिस्टर डार्सी ने शायद ग्रेसचर्च स्ट्रीट का नाम सुन रखा हो। पर एक बार वहाँ क़दम रखते ही उन्हें लगेगा कि उस गंदगी को धोने के लिए महीने भर नहाना भी कम पड़ेगा। और मिस्टर बिंगली तो उनके बिना एक क़दम भी नहीं चलते, यह तय बात है।' 'तो और भी अच्छा है। मैं तो चाहती हूँ दोनों बिल्कुल न मिलें। पर जेन उनकी बहन को चिट्ठियाँ तो लिखती है न? वह लड़की तो मिलने आए बिना रह ही नहीं पाएगी।' 'बिल्कुल नाता तोड़ लेगी।' पर एलिज़ाबेथ ने बस भरोसा जताने का दिखावा किया था — न कैरोलाइन के नाता तोड़ लेने का, और उससे भी ज़्यादा ज़रूरी बात, बिंगली को जेन से मिलने से रोक दिए जाने का। इस बात की फ़िक्र करते हुए अपने ही मन में झाँककर उसे एहसास हुआ कि वह उम्मीद पूरी तरह टूटी हुई नहीं मानती। बिंगली का प्यार फिर जाग सकता था। दोस्तों का असर भी जेन के आकर्षण जैसी कहीं ज़्यादा स्वाभाविक ताक़त के आगे पीछे हट सकता था। कभी-कभी तो उसे यह मुमकिन भी लगता। मिस बेनेट ने मामी के न्यौते को ख़ुशी-ख़ुशी क़बूल कर लिया। उस वक़्त बिंगली परिवार को लेकर उसके मन में बस एक ही ख़याल आया — कैरोलाइन अपने भाई के साथ नहीं रहतीं, इसलिए उनसे टकराने की फ़िक्र किए बिना कभी-कभार सुबह का वक़्त साथ बिता सकेगी।
गार्डिनर दंपति ने लॉन्गबर्न में एक हफ़्ता बिताया। फ़िलिप्स परिवार, लुकास परिवार और अफ़सरों तक — मिलने-जुलने में एक भी दिन ख़ाली नहीं गया। श्रीमती बेनेट ने भाई-भाभी को ख़ुश रखने के लिए इतनी मेहनत से कार्यक्रम बनाया कि वे कभी सिर्फ़ परिवार के साथ रात के खाने पर नहीं बैठे। लॉन्गबर्न में जब भी लोग जुटते, हमेशा कुछ अफ़सर साथ होते — और उनमें मिस्टर विकहम ज़रूर होते। हर बार श्रीमती गार्डिनर को एलिज़ाबेथ की विकहम की भरपूर तारीफ़ याद आ जाती, और वे दोनों को ग़ौर से देखतीं। सिर्फ़ ऊपरी दिखावे से उन्हें नहीं लगता था कि दोनों बहुत गहरे प्यार में पड़ गए हैं। पर एक-दूसरे के प्रति खिंचाव इतना साफ़ था कि उन्हें थोड़ी फ़िक्र होने लगी। हर्टफ़र्डशायर छोड़ने से पहले वे एलिज़ाबेथ से इस बारे में बात करने का इरादा रखती थीं — और यह भी समझाने का कि ऐसे लगाव को हवा देना कितनी नादानी होगी।
विकहम के पास अपने सहज आकर्षण के अलावा श्रीमती गार्डिनर को ख़ुश करने का एक और ज़रिया था। शादी से पहले, कोई दस-बारह बरस पहले, वे उसी डर्बीशायर इलाक़े में काफ़ी समय तक रही थीं जहाँ विकहम रहते थे। इसलिए दोनों की जान-पहचान के कई लोग साझा थे। मिस्टर डार्सी के पिता की मौत के बाद, यानी क़रीब पाँच बरस से, विकहम वहाँ शायद ही कभी गए थे। फिर भी वे श्रीमती गार्डिनर को पुराने दोस्तों की ऐसी ताज़ा ख़बरें सुना सकते थे, जो उन्हें किसी और से मिलना मुश्किल था। श्रीमती गार्डिनर पेम्बरली देख चुकी थीं। स्वर्गवासी मिस्टर डार्सी की साख भी उन्हें अच्छी तरह मालूम थी। इसलिए दोनों के पास बात करने को अनगिनत बातें निकल आईं। उन्होंने अपनी याद में बसी पेम्बरली की तस्वीर को विकहम के तफ़सील भरे बयान से मिलाकर देखा। दिवंगत पुराने मालिक के गुणों की जायज़ तारीफ़ करते हुए दोनों — वे ख़ुद और विकहम — को ख़ूब मज़ा आया। मौजूदा मिस्टर डार्सी ने विकहम के साथ क्या किया, यह सुनकर श्रीमती गार्डिनर उनके बचपन के स्वभाव को लेकर सुनी हुई किसी बात को याद करने की कोशिश करने लगीं, जो इससे मेल खाती हो। आख़िर उन्हें साफ़ याद आया कि उन्होंने सुना था — मिस्टर फ़िट्ज़विलियम डार्सी शुरू से ही बहुत घमंडी और तुनकमिज़ाज लड़के के तौर पर जाने जाते थे।