हिंदी संस्करण

अध्याय 28

अगले दिन सफ़र में जो कुछ भी नज़र आया, वह एलिज़ाबेथ को नया और दिलचस्प लगा। मन ख़ुशी से भरा था। बड़ी बहन को इतना सेहतमंद देखकर उसकी सारी फ़िक्र दूर हो गई थी। उत्तर की तरफ़ सफ़र पर जाने का ख़याल भी उसे लगातार ख़ुश करता रहा। बड़ी सड़क छोड़कर हंसफ़र्ड जाने वाली संकरी गली में मुड़ते ही, सब लोग पादरी-निवास ढूँढ़ने लगे। हर मोड़ पर उम्मीद रहती कि आगे घर दिख जाएगा। एक तरफ़ रोज़िंग्स पार्क की बाड़ सड़क के साथ-साथ चलती जा रही थी। एलिज़ाबेथ वहाँ रहने वालों की बातें याद कर मुस्कुरा दी। आख़िरकार पादरी-निवास नज़र आया। सड़क की तरफ़ ढलता बाग़, उसमें बना घर, हरी बाड़ और लॉरेल की झाड़ियाँ दिखीं — सब यही बता रहे थे कि वे मंज़िल पर पहुँच गए हैं। मिस्टर कॉलिन्स और शार्लट दरवाज़े पर आ खड़े हुए। एक-दूसरे को सिर हिलाकर मुस्कुराते ही, गाड़ी छोटे रास्ते के अंत में छोटे फाटक के सामने रुक गई। सब झटपट गाड़ी से उतरे और मिलने की ख़ुशी बाँटी। श्रीमती कॉलिन्स बड़े जोश के साथ सहेली से मिलीं। एलिज़ाबेथ को ऐसा गर्मजोशी भरा स्वागत देखकर लगा, आना सही फ़ैसला था। यह भी उसे फ़ौरन पता चल गया कि शादी के बाद भी उसका चचेरा भाई ज़रा नहीं बदला था — उनकी बनावटी शिष्टता वैसी ही थी। परिवार का हाल पूछने और जवाब सुनने में उन्होंने एलिज़ाबेथ को दरवाज़े पर कई मिनट रोके रखा। फिर प्रवेश-द्वार कितना साफ़-सुथरा है, इस पर एक टिप्पणी करके वे उन्हें घर के अंदर ले गए। बैठक में क़दम रखते ही वे बेहद औपचारिक हो उठे। अपने तुच्छ से घर में आने के लिए उन्होंने दोबारा स्वागत किया, और पत्नी ने जो जलपान पेश किया था, वही सब दोहराकर पेश किया।

एलिज़ाबेथ को पहले से पता था कि वे ख़ूब शेखी बघारेंगे। कमरे का बढ़िया अनुपात, दिशा और सामान दिखाते वक़्त वे मानो ख़ासतौर पर उसी से मुख़ातिब थे — जैसे जताना चाहते हों कि प्रस्ताव ठुकराकर उसने क्या खो दिया। पर कमरा भले साफ़-सुथरा और आरामदेह लगा, एलिज़ाबेथ ने अफ़सोस की कोई आह भरकर उन्हें ख़ुश नहीं किया। बल्कि वह हैरानी से शार्लट को देखती रही, जो ऐसे आदमी के साथ रहकर भी चेहरे पर रौनक़ बनाए रखती थी। मिस्टर कॉलिन्स के मुँह से ऐसी बातें निकलना, जिन पर पत्नी को शर्म आती, आम बात थी। हर बार एलिज़ाबेथ ख़ुद-ब-ख़ुद शार्लट की तरफ़ देख लेती। एक-दो बार शार्लट का चेहरा हल्का-सा लाल होते देखा भी, पर अक्सर वह समझदारी से अनसुना कर देती। अलमारी से लेकर चिमनी के जालीदार परदे तक, कमरे का हर सामान बारी-बारी सराहा गया। सफ़र और लंदन की बातें भी हो गईं। इतनी देर बैठ चुकने पर मिस्टर कॉलिन्स ने बाग़ में टहलने का न्यौता दिया। बाग़ बड़ा और अच्छी तरह सजा था, और उसे उन्होंने ख़ुद संवारा था। बाग़बानी उनके सबसे प्रिय शौक़ों में एक थी। शार्लट ने शांत चेहरे से कहा कि यह कसरत सेहत के लिए अच्छी है, इसलिए वह उन्हें जितना हो सके उतना करने देती है। एलिज़ाबेथ को उसका यह भाव-नियंत्रण देखकर हैरानी हुई। मिस्टर कॉलिन्स बाग़ के हर रास्ते और गली में सबसे आगे-आगे चले, और किसी को तारीफ़ करने की मुश्किल से ही मोहलत दी। हर नज़ारे का इतना बारीक ब्यौरा देते कि उसकी ख़ूबसूरती महसूस करने की फ़ुर्सत ही न बचे। बता सकते थे किस तरफ़ कितने खेत हैं, और दूर दिखने वाले जंगल में कितने पेड़ हैं। पर उनका बाग़, यह इलाक़ा, बल्कि पूरा राज्य भी रोज़िंग्स के नज़ारे की बराबरी नहीं कर सकता था। घर के सामने से लगभग ठीक आगे, पार्क की सीमा पर लगे पेड़ों के बीच के झिरोखे से वह दृश्य दिखता था। रोज़िंग्स एक ढलवाँ पहाड़ी पर बनी ख़ूबसूरत, आधुनिक इमारत थी। मिस्टर कॉलिन्स बाग़ में अपने दोनों घास के मैदान भी घुमाकर दिखाना चाहते थे, पर महिलाओं के जूते पिघलती हुई ठंड पर चलने लायक़ नहीं थे, इसलिए सब लौट पड़े। सर विलियम उनके साथ आगे बढ़े, और उधर शार्लट ने बहन और सहेली को घर दिखाया — पति की मदद के बिना यह मौक़ा मिलने पर वह ख़ासी ख़ुश दिख रही थी। घर थोड़ा छोटा था, पर मज़बूत और इस्तेमाल में आसान — सब कुछ करीने से और तालमेल में सजा था। एलिज़ाबेथ ने इसका पूरा श्रेय शार्लट को दिया। मिस्टर कॉलिन्स को भूल पाना मुमकिन हो, तो यह घर सचमुच बड़ा आरामदेह था। शार्लट को घर से इतना सुकून मिलता साफ़ दिखता था कि एलिज़ाबेथ को लगा, वह अक्सर पति को भूल ही जाती होगी।

लेडी कैथरीन अभी इसी इलाक़े में हैं, यह बात पहले ही सुनी जा चुकी थी। खाने की मेज़ पर जब यह चर्चा फिर छिड़ी, तो मिस्टर कॉलिन्स बीच में बोल पड़े। 'जी हाँ, मिस एलिज़ाबेथ। आने वाले रविवार को गिरजाघर में लेडी कैथरीन डी बर्ग के दर्शन का सौभाग्य आपको ज़रूर मिलेगा। यह कहने की ज़रूरत ही नहीं कि वे आपको बेहद मोहित कर देंगी। वे बेइंतहा नेक और कृपापूर्ण देखभाल करने वाली महिला हैं। प्रार्थना ख़त्म होते ही वे आप पर भी कुछ ध्यान देने का सम्मान बख़्शेंगी, इसमें मुझे रत्ती-भर शक नहीं। आप यहाँ जितने दिन रहेंगी, वे हम पर जितनी बार भी न्यौतों की मेहरबानी करेंगी, उन सबमें आपको और मेरी साली मरिया को भी ज़रूर बुलाएँगी, यह मैं लगभग विश्वास से कह सकता हूँ। प्यारी शार्लट के साथ उनका बर्ताव भी बेजोड़ है। हम हफ़्ते में दो बार रोज़िंग्स में खाना खाते हैं। वे हमें कभी पैदल घर नहीं लौटने देतीं। लेडी कैथरीन की गाड़ी हमेशा हमारे लिए तैयार रहती है — बल्कि उनकी तो कई गाड़ियाँ हैं, इसलिए यही कहना ठीक होगा कि उनमें से एक हमेशा तैयार रहती है।' 'लेडी कैथरीन सचमुच आदर के लायक़ और समझदार महिला हैं,' शार्लट ने जोड़ा। 'पड़ोसियों का बहुत ध्यान रखती हैं।' 'बिल्कुल यही बात है, प्रिये। मैं हमेशा यही कहता हूँ। ऐसी महिला का जितना भी आदर किया जाए, कम ही है।' उस शाम ज़्यादातर हर्टफ़र्डशायर की ख़बरें ही सुनाई-बताई गईं — जो पहले चिट्ठी में लिखा जा चुका था, वह भी दोहराकर वक़्त बिताया गया। दिन ख़त्म होने पर जब एलिज़ाबेथ अकेले कमरे में रह गई, तो उसने सोचा कि शार्लट अपनी ज़िंदगी से कितनी संतुष्ट है। पति को सँभालने की उसकी कला और उसे बर्दाश्त करने का धीरज याद आया। मानना ही पड़ा कि शार्लट हर काम बड़ी ख़ूबी से निभा रही है। उसने यह भी सोच लिया कि यह मुलाक़ात कैसे बीतेगी — रोज़मर्रा की ज़िंदगी शांति से गुज़रेगी, कभी-कभी मिस्टर कॉलिन्स की बीच-बचाव वाली बातें झुंझलाहट भी देंगी, और रोज़िंग्स के लोगों के साथ उठने-बैठने का मज़ा भी मिलेगा। उसकी जीवंत कल्पना ने जल्द ही सब कुछ तय कर लिया।

अगले दिन दोपहर के आस-पास, एलिज़ाबेथ अपने कमरे में टहलने जाने की तैयारी कर रही थी। तभी नीचे अचानक हलचल मच गई — मानो पूरा घर उलट-पुलट हो गया हो। ज़रा कान लगाया तो लगा, कोई बड़ी हड़बड़ी में सीढ़ियाँ चढ़ता आ रहा है और ऊँची आवाज़ में उसे बुला रहा है। दरवाज़ा खोला तो सीढ़ियों की चौकी पर मरिया से आमना-सामना हुआ। मरिया उत्साह से हाँफते हुए चिल्लाई। 'हाय, प्यारी एलिज़ा! जल्दी खाने के कमरे में आ। सचमुच बहुत बड़ा तमाशा है! बताऊँगी नहीं क्या है। जल्दी, अभी नीचे आ।' एलिज़ाबेथ के पूछने का कोई फ़ायदा नहीं हुआ, मरिया ने कुछ और नहीं बताया। दोनों वह हैरतअंगेज़ चीज़ देखने के लिए, संकरी गली दिखने वाले खाने के कमरे की तरफ़ दौड़ीं। बाग़ के फाटक के सामने एक नीची चार-पहिया गाड़ी में दो महिलाएँ बैठी थीं। 'बस इतना ही?' एलिज़ाबेथ चिल्लाई। 'मुझे तो लगा था कम-से-कम सूअर बाग़ में घुस आए हैं। यह तो बस लेडी कैथरीन और उनकी बेटी हैं!' 'अरे, नहीं।' मरिया इस ग़लतफ़हमी पर चौंककर बोली। 'यह लेडी कैथरीन नहीं हैं। वह उम्रदराज़ महिला श्रीमती जेनकिन्सन हैं, जो उनके साथ रहती हैं। दूसरी मिस डी बर्ग हैं। ज़रा ग़ौर से देख — कितनी नन्ही-सी हैं। किसे पता था वे इतनी दुबली-पतली और छोटी होंगी!' 'इतनी हवा वाले दिन शार्लट को इतनी देर बाहर खड़ा रखना, सचमुच बदतमीज़ी है। अंदर क्यों नहीं आतीं?' 'अरे, शार्लट कहती है वे लगभग कभी अंदर नहीं आतीं। मिस डी बर्ग का घर के भीतर आना तो सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है।' 'मुझे तो उनका रूप-रंग पसंद आया,' एलिज़ाबेथ ने कोई और ही बात सोचते हुए कहा। 'बीमार और चिड़चिड़ी लगती हैं। हाँ, वे उनके लिए बिल्कुल फ़िट बैठेंगी। बेजोड़ पत्नी बनेंगी।'

मिस्टर कॉलिन्स और शार्लट दरवाज़े पर खड़े महिलाओं से बातें कर रहे थे। सर विलियम फाटक पर ऐसी मुद्रा में डटे थे कि एलिज़ाबेथ को बड़ा मज़ा आ रहा था — वे सामने खड़ी उस महान हस्ती को बड़ी गंभीरता से निहार रहे थे, और मिस डी बर्ग जब भी उस तरफ़ देखतीं, वे बार-बार झुककर सलाम करते। आख़िरकार कहने को कुछ नहीं बचा। महिलाएँ गाड़ी हाँककर चली गईं, और बाक़ी सब घर के अंदर लौट आए। मिस्टर कॉलिन्स ने दोनों युवतियों को देखते ही उनकी क़िस्मत की बधाई देनी शुरू कर दी। शार्लट ने बताया कि अगले दिन सब लोगों को रोज़िंग्स के रात के खाने पर बुलाया गया है। तभी मिस्टर कॉलिन्स की बातों का मतलब साफ़ हुआ।