हिंदी संस्करण

अध्याय 29

इस न्यौते ने मिस्टर कॉलिन्स को मानो पूरी जीत दिला दी। वे चाहते थे कि हैरान मेहमान अपनी आँखों से अपनी संरक्षिका की शानो-शौकत भरी ज़िंदगी देखें। यह भी ख़ुद देख लें कि लेडी कैथरीन उन्हें और उनकी पत्नी को कितनी शिष्टता से पेश आती हैं। यही तो वे चाहते थे। ऐसा मौक़ा इतनी जल्दी आ जाना — लेडी कैथरीन की कृपापूर्ण नज़र की जितनी भी तारीफ़ करें, कम ही पड़ेगी। उन्होंने कहा, 'सच कहूँ तो, अगर लेडी कैथरीन रविवार को हमें रोज़िंग्स बुलाकर चाय पर और शाम भर के लिए रोक लेतीं, तो मुझे रत्ती-भर हैरानी न होती। उनकी नेकदिली मुझे इतनी अच्छी तरह मालूम है कि मुझे तो यही उम्मीद थी। पर इतना ख़याल रखेंगी, यह किसे पता था? आप सब यहाँ पहुँचते ही, वह भी सारे मेहमान एक साथ, रोज़िंग्स के रात के खाने पर बुला लिए जाएँगे। यह किसने सोचा होगा?' सर विलियम ने जवाब दिया, 'मुझे इसमें ज़्यादा हैरानी इसलिए नहीं होती, क्योंकि समाज में उठते-बैठते बड़े लोगों की असली शिष्टता क्या होती है, यह मुझे मालूम हो गया है। दरबार के क़रीब रहने वालों में ऐसी सुघड़ शिष्टता कोई दुर्लभ बात नहीं।' उस दिन और अगली सुबह, रोज़िंग्स जाने के अलावा और कोई बात मुश्किल से हुई। मिस्टर कॉलिन्स पहले ही बता-बताकर सब कुछ समझा चुके थे — कमरे कैसे हैं, नौकर कितने हैं, खाना कितना शानदार होगा। यह इसलिए, ताकि मेहमान वहाँ जाकर देखकर बहुत ज़्यादा दबे हुए न महसूस करें। जब महिलाएँ तैयार होने के लिए अपने-अपने कमरों में चली गईं, तो उन्होंने एलिज़ाबेथ से कहा। 'प्यारी चचेरी बहन, कपड़ों की फ़िक्र बिल्कुल मत कीजिए। लेडी कैथरीन ऐसी नहीं कि हमसे अपने और अपनी बेटी जैसी शान से सजने की उम्मीद रखें। मेरी सलाह मानिए तो अपने सबसे अच्छे कपड़े पहन लीजिए, बस इतना ही काफ़ी है। इससे ज़्यादा की कोई ज़रूरत नहीं। लेडी कैथरीन सादे कपड़ों की वजह से किसी को छोटा नहीं समझतीं। वे तो चाहती हैं कि दर्जे का फ़र्क़ बना रहे।' जब तक सब कपड़े पहन रही थीं, वे हर एक के कमरे के दरवाज़े पर दो-तीन बार आते रहे — जल्दी करने को कहने के लिए। लेडी कैथरीन को खाना इंतज़ार में रखना बिल्कुल पसंद नहीं, यह उनका कहना था। उनके और उनके रहन-सहन के बारे में ऐसी डरावनी बातें सुनकर, समाज में शायद ही निकलने वाली मरिया लुकास पूरी तरह घबरा गई। जितने डर के साथ उनके पिता सेंट जेम्स दरबार में पेश हुए थे, उतने ही डर के साथ वह रोज़िंग्स में पहली बार सलाम करने की घड़ी का इंतज़ार करने लगी।

मौसम अच्छा था, इसलिए वे पार्क पार करते हुए क़रीब आधा मील ख़ुशी-ख़ुशी पैदल चले। पार्क में हर तरफ़ ख़ूबसूरत जगहें और शानदार नज़ारे थे, ऐसा होना ही था। एलिज़ाबेथ को भी बहुत कुछ पसंद आया। पर मिस्टर कॉलिन्स जितना चाहते थे, उतना वह मुग्ध नहीं हो सकी। उन्होंने हवेली के सामने की खिड़कियाँ एक-एक करके गिनकर बताईं, और यह भी बताया कि हर शीशे पर सर लुईस डी बर्ग ने पहले-पहल कितना ख़र्च किया था — फिर भी उसे कोई ख़ास एहसास नहीं हुआ। सीढ़ियाँ चढ़कर वे जैसे-जैसे बरामदे की तरफ़ बढ़े, मरिया का डर बढ़ता ही गया। सर विलियम भी पूरी तरह सहज नहीं दिख रहे थे। एलिज़ाबेथ का हौसला ज़रा नहीं डगमगाया। लेडी कैथरीन में कोई अनोखी क़ाबिलियत या चमत्कारी गुण है, जिनसे डरना पड़े, ऐसा उसने कभी नहीं सुना था। बस दौलत और रुतबे का रौब हो, तो उसे बिना डरे झेला जा सकता है, यही वह सोचती थी। बरामदे में क़दम रखते ही मिस्टर कॉलिन्स मुग्ध भाव से सुंदर अनुपात और बारीक सजावट की तरफ़ इशारा करने लगे। फिर सब नौकरों के पीछे-पीछे प्रतीक्षा-कक्ष पार करके उस कमरे में पहुँचे, जहाँ लेडी कैथरीन, उनकी बेटी और श्रीमती जेनकिन्सन बैठी थीं। लेडी कैथरीन बड़ी ही कृपापूर्ण मुद्रा में उठकर उनसे मिलीं। श्रीमती कॉलिन्स ने पहले ही पति से तय कर लिया था कि परिचय कराने का काम वही करेंगी। इसलिए वे तमाम माफ़ी और शुक्रिया की बातें, जो पति ज़रूरी समझते, उनके बिना ही ठीक-ठीक परिचय हो गया। सर विलियम सेंट जेम्स दरबार जा चुके थे, फिर भी वे यहाँ की शानो-शौकत से पूरी तरह दब गए। गहरा झुककर सलाम किया, और बिना कुछ कहे बस बैठ जाने भर की हिम्मत जुटा पाए। उनकी बेटी तो होश खोने की हद तक डर गई थी। कुर्सी की नोक पर बैठी वह समझ ही न पाई कि कहाँ देखे। एलिज़ाबेथ को लगा कि वह इस हालात को अच्छी तरह सँभाल सकती है। उसने सामने बैठी तीनों महिलाओं को शांति से देखा। लेडी कैथरीन क़द-काठी में लंबी-चौड़ी महिला थीं। नक़्श तीखे थे, शायद कभी सुंदर भी रही हों। पर उनका अंदाज़ ऐसा नहीं था कि सामने वाला सहज महसूस करे। मेहमानों से मिलने का तरीक़ा भी ऐसा नहीं था कि वे भूल जाएँ कि अपने से कितनी नीची हैसियत के हैं। चुप रहकर रोब गाँठने वाली महिला नहीं थीं। पर जो भी कहतीं, उसमें अपनी अहमियत जताने वाला रोबदार लहज़ा साफ़ झलकता था। इसलिए एलिज़ाबेथ को फ़ौरन मिस्टर विकहम याद आ गए। पूरे दिन ग़ौर से देखने पर उसे यक़ीन हो गया कि लेडी कैथरीन ठीक वैसी ही हैं, जैसा विकहम ने बताया था। एलिज़ाबेथ ने पहले माँ को देखा। उनके चेहरे और चाल-ढाल में मिस्टर डार्सी से मिलती-जुलती कुछ बातें उसे नज़र आईं। फिर जब नज़र बेटी पर गई, तो वह इतनी दुबली और छोटी थीं कि एलिज़ाबेथ लगभग मरिया की हैरानी में शरीक होते-होते बची। दोनों महिलाओं की न बनावट मिलती थी, न चेहरा। मिस डी बर्ग का रंग पीला था, सेहत भी कमज़ोर लगती थी। बदसूरत नहीं थीं, पर नक़्श में कोई ख़ासियत भी नहीं थी। वे कुछ ख़ास ध्यान न खींचने वाली श्रीमती जेनकिन्सन से धीमी आवाज़ में बात करने के सिवा शायद ही मुँह खोलती थीं। श्रीमती जेनकिन्सन उनकी बात सुनतीं, और उनका सारा ध्यान इसी में लगा रहता कि पर्दा मिस डी बर्ग की आँखों के आगे ठीक से टिका रहे। कुछ मिनट बैठने के बाद, सबको खिड़की के पास जाकर नज़ारा देखने का हुक्म मिला। मिस्टर कॉलिन्स साथ-साथ गए और ख़ूबसूरत जगहें दिखाईं। लेडी कैथरीन ने मेहरबानी से बताया कि गर्मियों में देखने पर यह नज़ारा कहीं ज़्यादा भला लगता है।

रात का खाना बड़ा ही शानदार था। मिस्टर कॉलिन्स ने जितने नौकर और जितने चाँदी के बर्तन का वादा किया था, सब मौजूद था। जैसा उन्होंने पहले ही बता दिया था, लेडी कैथरीन की मर्ज़ी के मुताबिक़ वे मेज़ के बिल्कुल आख़िरी छोर पर बैठे। लगता था मानो ज़िंदगी में इससे बड़ी बात कोई हो ही नहीं सकती। ख़ुशी से भरकर बड़े जोश से गोश्त काटते, खाते और तारीफ़ करते रहे। हर पकवान की तारीफ़ पहले वे करते, फिर सर विलियम करते। अब पूरे होश-हवास में आ चुके सर विलियम अपने दामाद जो भी कहते, उसे दोहरा देते। एलिज़ाबेथ हैरान थी कि लेडी कैथरीन यह सब कैसे बर्दाश्त करती हैं। पर लेडी कैथरीन उनकी हद से ज़्यादा तारीफ़ से मानो ख़ुश ही थीं। बड़ी ही मेहरबान मुस्कान भी दे देतीं — ख़ासकर तब, जब मेज़ पर कोई पकवान उनके लिए बिल्कुल नया साबित होता। लोगों के बीच बातचीत खुलकर नहीं हो पाई। एलिज़ाबेथ मौक़ा मिलते ही बोलने को तैयार रहती, पर वह शार्लट और मिस डी बर्ग के बीच बैठी थी। शार्लट लेडी कैथरीन की बातें सुनने में लगी थी, और मिस डी बर्ग ने पूरी शाम उससे एक शब्द भी नहीं कहा। श्रीमती जेनकिन्सन ज़्यादातर यही देखने में लगी रहीं कि मिस डी बर्ग कितना कम खा रही हैं। वे दूसरे पकवान चखने को कहतीं, और फ़िक्र करतीं कि कहीं तबीयत तो ठीक नहीं। मरिया को तो बोलने की बात सोचना भी नामुमकिन लगा। सज्जन लोग बस खाते और तारीफ़ करते रहे।

महिलाएँ जब बैठक में लौटीं, तो लेडी कैथरीन की बातें सुनने के सिवा करने को कुछ ख़ास नहीं था। कॉफ़ी आने तक वे पल भर भी रुके बिना बोलती रहीं। किसी भी विषय पर वे इतनी दृढ़ता से राय देतीं कि साफ़ पता चलता था — उन्हें अपने फ़ैसले पर किसी की उलट-राय सुनने की आदत नहीं। शार्लट के घर के मामलों के बारे में बेझिझक बहुत बारीकी से पूछताछ की, और घर चलाने के तरीक़े पर ढेरों सलाहें दीं। शार्लट जैसे छोटे घर में हर चीज़ कैसे सँभाली जाए, यह बताया। गाय-मुर्ग़ी पालने का तरीक़ा भी सिखाया। एलिज़ाबेथ को समझ आ गया — किसी को हुक्म देने का मौक़ा मिले, तो इस महान महिला के लिए कोई भी बात इतनी छोटी नहीं कि उसमें दख़ल न दें। श्रीमती कॉलिन्स से बात करते-करते बीच-बीच में मरिया और एलिज़ाबेथ से भी कई सवाल पूछे — ख़ासकर एलिज़ाबेथ से, जिसे घर के मामलों की सबसे कम जानकारी थी। श्रीमती कॉलिन्स से उन्होंने कहा कि एलिज़ाबेथ बड़ी शालीन और ख़ासी सुंदर लड़की है। लेडी कैथरीन ने पूछा — बहनें कितनी हैं, बड़ी हैं या छोटी, उनमें से किसी की शादी होने की संभावना है या नहीं, बहनें ख़ूबसूरत हैं या नहीं, कहाँ पढ़ाई हुई। यह भी बारी-बारी पूछा कि पिता के पास कौन-सी गाड़ी है, और माँ का मायके का कुलनाम क्या है। एलिज़ाबेथ को महसूस हुआ कि यह सवाल कितने बदतमीज़ी भरे हैं। फिर भी उसने बड़े इत्मीनान से जवाब दिए। इस पर लेडी कैथरीन बोलीं। 'तुम्हारे पिता की जागीर मिस्टर कॉलिन्स के हक़ में बेटों की ओर बँधी हुई है, है न?' — फिर वे शार्लट की तरफ़ मुड़ीं — 'तुम्हारे लिए तो यह अच्छी ही बात है। पर वरना, बेटियों को छोड़कर जागीर बेटों की ओर बाँधने की क्या ज़रूरत है, यह मेरी समझ में नहीं आता। सर लुईस डी बर्ग के घराने में इसकी ज़रूरत कभी नहीं समझी गई। मिस बेनेट, पियानो बजाती हो और गाती भी हो?' 'थोड़ा-बहुत।' 'आह, तो फिर कभी ख़ुशी-ख़ुशी सुनूँगी। हमारा साज़ बहुत बढ़िया है। शायद... कभी बजाकर देखना। तुम्हारी बहनें भी बजाती-गाती हैं?' 'एक बहन करती है।' 'सबने क्यों नहीं सीखा? सबको सीखना चाहिए था। मिस्टर वेब की सारी बेटियाँ बजाती हैं, जबकि उनके पिता की आमदनी तुम्हारे पिता जितनी भी नहीं। चित्रकारी करती हो?' 'नहीं, बिल्कुल नहीं करती।' 'क्या, कोई भी नहीं?' 'एक भी नहीं।' 'बड़ी अजीब बात है। पर लगता है मौक़ा ही नहीं मिला। तुम्हारी माँ को हर बसंत तुम्हें लंदन ले जाकर उस्तादों से सिखवाना चाहिए था।' 'माँ को शायद कोई एतराज़ न होता, पर पिताजी को लंदन बिल्कुल पसंद नहीं।'

'तो गवर्नेस ने काम छोड़ दिया?' 'हमने कभी गवर्नेस रखी ही नहीं।' 'गवर्नेस नहीं थी! यह कैसे हो सकता है? पाँच बेटियों को बिना गवर्नेस के घर में पाला-पोसा गया! ऐसी बात मैंने पहले कभी नहीं सुनी। तुम्हारी माँ ने तुम सबको पढ़ाने में ग़ुलाम जैसी मेहनत की होगी।' एलिज़ाबेथ ने हँसी बड़ी मुश्किल से रोकते हुए कहा कि ऐसी कोई बात नहीं थी। 'तो फिर सिखाया किसने? देखभाल किसने की? गवर्नेस नहीं थी, तो तुम सब यूँ ही छोड़ दी गई होगी।' 'कुछ घरों से तुलना करें, तो शायद ऐसा ही लगे। पर सीखने की चाह रखने वाली हम बहनों को कभी कोई साधन कम नहीं पड़ा। हमेशा किताबें पढ़ने का हौसला मिला। जो भी उस्ताद चाहिए होता, वह हमें मिल जाता था। हाँ, जिसने आलस करने का मन बना लिया हो, वह ज़रूर कर सकती थी।' 'हाँ, बेशक। पर ऐसी ही बातों को रोकना तो गवर्नेस का काम है। तुम्हारी माँ को जानती, तो मैं गवर्नेस रखने की सलाह बड़े ज़ोर से देती। मैं हमेशा कहती हूँ, बिना लगातार और नियमित निगरानी के तालीम में कुछ हासिल नहीं होता, और ऐसी निगरानी देने वाला बस गवर्नेस ही हो सकती है। मैंने इस तरह कितने घरों के लिए गवर्नेस ढूँढ़ी है, यह सोचकर ख़ुद हैरानी होती है। किसी जवान को अच्छी जगह लगवाना मुझे हमेशा से ख़ुशी देता है। श्रीमती जेनकिन्सन की चारों भांजियाँ भी मेरी बदौलत बेहतरीन जगहों पर लगी हैं। बस कुछ ही दिन पहले, इत्तिफ़ाक़ से मेरे सामने नाम आई एक जवान लड़की की सिफ़ारिश भी मैंने की। वह घराना उससे बहुत ख़ुश है। श्रीमती कॉलिन्स, तुमने बताया था न कि लेडी मेटकाफ़ कल शुक्रिया अदा करने आई थीं? मिस पोप को वे रत्न मानती हैं। «लेडी कैथरीन,» उस महिला ने कहा, «आपने मुझे रत्न दिया है।» मिस बेनेट, तुम्हारी छोटी बहनों में से कोई सामाजिक हलक़े में उतरी है?' 'जी हाँ, सब उतर चुकी हैं।' 'सब! क्या, पाँचों एक साथ? सचमुच अजीब बात है! तुम तो बस दूसरे नंबर पर हो। बड़ी बहनों की शादी होने से पहले ही छोटी बहनें सामाजिक हलक़े में उतर गईं! छोटी बहनें बहुत कम उम्र की होंगी?' 'जी हाँ, सबसे छोटी अभी सोलह बरस की भी नहीं हुई। शायद उसके लिए बार-बार सामाजिक जमावड़ों में जाना अभी जल्दी हो। पर सच कहूँ तो, बड़ी बहनों की जल्दी शादी करने की न हैसियत हो, न इच्छा — इस वजह से छोटी बहनों को मेल-जोल और मनोरंजन में अपना हिस्सा न मिले, यह मुझे बहुत सख़्त लगता है। सबसे छोटी को भी उतना ही हक़ है जवानी की ख़ुशियाँ पाने का, जितना सबसे बड़ी को। ऐसी वजह से रोक रखना! इससे बहनों के बीच प्यार या नाज़ुक भावनाएँ भी शायद ही पनपें।' 'यह तो कमाल है,' लेडी कैथरीन बोलीं। 'इतनी कम उम्र में इतनी दृढ़ता से राय रखती हो। माफ़ करना, पर उम्र क्या है तुम्हारी?' 'तीन-तीन जवान बहनों वाली मुझसे,' एलिज़ाबेथ ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, 'लेडी कैथरीन शायद ही उम्र बताने को कह सकेंगी।' लेडी कैथरीन को सीधा जवाब न मिलने पर बड़ा ताज्जुब हुआ लगता था। एलिज़ाबेथ को लगा, शायद वही पहली इंसान थी जिसने उनकी इस रोबीली बदतमीज़ी को यूँ हँसी में उड़ाने की हिम्मत की हो। 'तुम पक्का बीस साल से ज़्यादा की नहीं होगी, तो उम्र छिपाने की कोई ज़रूरत नहीं।' 'अभी इक्कीस की नहीं हुई हूँ।'

सज्जन लोग आ मिले और चाय ख़त्म होते ही ताश की मेज़ें लगा दी गईं। लेडी कैथरीन, सर विलियम और कॉलिन्स दंपति ने क्वाड्रिल शुरू किया। मिस डी बर्ग ने कैसीनो खेलना तय किया, तो श्रीमती जेनकिन्सन के साथ खेल पूरा करने में शामिल होने का सम्मान दोनों युवतियों को मिला। उनकी मेज़ पर बोरियत की कोई हद न थी। श्रीमती जेनकिन्सन की यह फ़िक्र कि मिस डी बर्ग को कहीं ज़्यादा गर्मी या ठंड तो नहीं लग रही, रोशनी कहीं ज़्यादा तेज़ या धीमी तो नहीं — इसके सिवा खेल से बाहर की कोई बात शायद ही निकली। दूसरी मेज़ पर कहीं ज़्यादा बातें हुईं। ज़्यादातर लेडी कैथरीन ही बोलती रहीं — बाक़ी तीनों की ग़लतियाँ बताते हुए, या अपने क़िस्से सुनाते हुए। मिस्टर कॉलिन्स उनकी हर बात से सहमत होते रहे। हर चिप जीतने पर शुक्रिया अदा करते, और कहीं ज़्यादा जीत गए लगे तो माफ़ी माँगने में जुट जाते। सर विलियम ज़्यादा नहीं बोले। क़िस्से और रईसों के नाम अपनी याद में सहेजते रहे।

लेडी कैथरीन और उनकी बेटी जितना खेलना चाहती थीं, उतना खेल लेने पर मेज़ें हटा दी गईं। श्रीमती कॉलिन्स को गाड़ी देने का प्रस्ताव आया। उन्होंने शुक्रिया के साथ मान लिया, तो फ़ौरन गाड़ी तैयार करने का हुक्म दे दिया गया। सब लोग चिमनी के गिर्द जमा होकर लेडी कैथरीन से सुनते रहे कि अगले दिन मौसम कैसा रहेगा, यह वे तय कर रही थीं। गाड़ी आते ही, उसी जगह से जहाँ यह हुक्म सुना जा रहा था, उन्हें बुला लिया गया। मिस्टर कॉलिन्स के ढेरों शुक्रिये और सर विलियम के उतने ही सलाम पीछे छोड़कर वे चल पड़े। गाड़ी दरवाज़े से निकलते ही मिस्टर कॉलिन्स ने एलिज़ाबेथ से रोज़िंग्स में देखी हर चीज़ के बारे में उसकी राय बताने को कहा। एलिज़ाबेथ ने शार्लट का ख़याल करके असल से कहीं बेहतर बताया। पर तारीफ़ करने में ख़ासी मेहनत करने पर भी मिस्टर कॉलिन्स को संतोष नहीं हुआ। जल्द ही उन्हें ख़ुद लेडी कैथरीन की तारीफ़ करनी पड़ी।