हिंदी संस्करण

अध्याय 38

शनिवार की सुबह थी। बाक़ी सब नाश्ते की मेज़ पर आते, उससे कुछ मिनट पहले ही एलिज़ाबेथ और मिस्टर कॉलिन्स आमने-सामने आ गए। मिस्टर कॉलिन्स ने वह विदाई भाषण देने का मौक़ा नहीं गँवाया, जो उन्हें ज़रूरी लगता था। 'मिस एलिज़ाबेथ बेनेट,' वे बोले। 'आपने हमसे मिलने आने की जो मेहरबानी की, उसके लिए श्रीमती कॉलिन्स कितनी शुक्रगुज़ार हैं, यह मैंने आपसे कहा या नहीं, याद नहीं आ रहा। पर यह यक़ीन है कि वह शुक्रिया कहे बिना इस घर से जाने देना मुझसे नहीं होगा। आपने हमारे साथ जो वक़्त बिताया, उस मेहरबानी की क़द्र हम कितनी करते हैं, यह बताना चाहता हूँ। हमारे इस मामूली-से घर में किसी का भी मन लुभाने लायक़ कुछ ख़ास नहीं, यह मुझे अच्छी तरह मालूम है। सादा घर-बार, छोटे-छोटे कमरे, गिने-चुने नौकर, और लोगों से मुलाक़ात लगभग न के बराबर — यह सब सोचें तो आप जैसी जवान महिला को हंसफ़र्ड ज़रूर बहुत उबाऊ लगा होगा। फिर भी आपके इस उदार आगमन के लिए हम दिल से आभारी हैं। और यह भी यक़ीन दिलाना चाहता हूँ कि आपको यहाँ कोई असुविधा न हो, इसके लिए जो कुछ हो सकता था, वह सब किया गया।' एलिज़ाबेथ ने जल्दी से शुक्रिया अदा किया। यह भी कहा कि वह यहाँ बहुत ख़ुश रही। छह हफ़्ते बड़े सुहाने बीते। शार्लट के साथ बिताई ख़ुशी और उनसे मिली अपनेपन-भरी देखभाल याद करके तो, शुक्रिया अदा करना उसी को करना चाहिए था। मिस्टर कॉलिन्स संतुष्ट-से दिखे, और मुस्कराहट लिए और भी गंभीर चेहरे के साथ जवाब दिया। 'आपको यहाँ कोई तकलीफ़ नहीं हुई, यह सुनकर बेहद ख़ुशी हो रही है। हमने पूरी कोशिश की, यह तो तय है। और सौभाग्य से, हम आपको बहुत ऊँचे दर्जे के लोगों की सोहबत से भी मिलवा सके। साथ ही, रोज़िंग्स के इतने क़रीब होने की वजह से, इस मामूली-से घराने के माहौल से बाहर निकलने का मौक़ा भी अक्सर दिला सके। इसलिए मुझे यह सोचने की हिम्मत है कि हंसफ़र्ड में रहना आपके लिए सिर्फ़ तकलीफ़देह नहीं रहा होगा। लेडी कैथरीन के घराने से हमारा जो रिश्ता है, वह सचमुच एक ख़ास सौभाग्य और आशीर्वाद है। ऐसे रिश्ते पर गर्व कर सके, ऐसे लोग बहुत कम होते हैं। आपने ख़ुद देखा कि हमारे साथ कैसा बरताव होता है। यह भी देखा कि वहाँ से न्यौते कितनी लगातार मिलते रहते हैं। सच कहूँ तो, इस मामूली-से पादरी-घर में कई कमियाँ हैं। फिर भी यहाँ रहते हुए रोज़िंग्स के साथ जो घनिष्ठ रिश्ता मिलता है, वह मिले, तो किसी को भी इस आदमी पर तरस नहीं खाना चाहिए — यह मानना ही पड़ेगा।' दिल में उमड़े जज़्बात शब्दों में समा नहीं पा रहे थे। इसीलिए मिस्टर कॉलिन्स को कमरे में इधर-उधर टहलना पड़ा। एलिज़ाबेथ ने चंद छोटे-छोटे शब्दों में शिष्टाचार और सच्चाई दोनों भरने की कोशिश की। 'सच कहूँ तो, प्यारी चचेरी बहन हर्टफ़र्डशायर लौटकर हमारे बारे में बहुत अच्छी बातें कह सकती हैं। कम-से-कम इतना तो मुझे यक़ीन है, वे ज़रूर करेंगी। लेडी कैथरीन श्रीमती कॉलिन्स पर कितना ख़ास ध्यान देती हैं, यह तो आपने रोज़ अपनी आँखों से देखा ही है। सब कुछ सोचें, तो मुझे यक़ीन है कि मेरी सहेली ने बहुत ही अभागा साथी नहीं चुना है। पर इस बारे में और कुछ कहना शायद ठीक नहीं होगा। बस इतना ही कहूँगा, प्यारी मिस एलिज़ाबेथ बेनेट, कि मैं दिल से, बेहद तड़प के साथ, यही चाहता हूँ कि आपको भी शादी में यही ख़ुशी मिले। प्यारी शार्लट और मेरा दिल भी एक है, सोचने का ढंग भी एक। हमारे स्वभाव और ख़यालात हर तरह से हैरतअंगेज़ ढंग से मिलते-जुलते हैं। मानो हम दोनों एक-दूसरे के लिए ही बने हों।' एलिज़ाबेथ ऐसे में यही आश्वासन दे सकी कि यह बड़ी ख़ुशी की बात है। यह भी उतनी ही सच्चाई से जोड़ सकी कि वह उन्हें घर में सुख-चैन से रहता देख ख़ुद भी ख़ुश है। पर उस ख़ुशी की वजह बनने वाली महिला के अंदर आकर बात बीच में रोक देने पर उसे बुरा नहीं लगा। बेचारी शार्लट! इस आदमी के साथ उन्हें यहाँ छोड़कर जाना एलिज़ाबेथ को उदास कर गया। पर शार्लट को अच्छी तरह पता था कि वे क्या चुन रही थीं। मेहमानों के जाने का उन्हें ज़रूर अफ़सोस था, फिर भी वे किसी की हमदर्दी चाहती नहीं दिखीं। घर-गृहस्थी, पल्ली और मुर्ग़ियाँ, और उनसे जुड़ा हर काम — यह सब अब भी शार्लट को भाता था।

आख़िरकार गाड़ी आ गई। सफ़र के बक्से बाँधे गए, पोटलियाँ अंदर रखी गईं, और कह दिया गया कि सब कुछ तैयार है। दोनों सहेलियों ने बड़े प्यार से एक-दूसरे से विदा ली। इसके बाद मिस्टर कॉलिन्स एलिज़ाबेथ को गाड़ी तक छोड़ने गए। बाग़ में साथ-साथ उतरते हुए, उन्होंने पूरे घराने तक अपना गहरा आदर पहुँचाने का अनुरोध किया। सर्दियों में लॉन्गबर्न में मिली मेहरबानी का शुक्रिया अदा करना भी वे नहीं भूले। मिस्टर और श्रीमती गार्डिनर को भी, जिनसे कभी मुलाक़ात नहीं हुई थी, सलाम पहुँचाया। फिर उन्होंने एलिज़ाबेथ को चढ़ने के लिए हाथ बढ़ाया, और मरिया उसके पीछे-पीछे चढ़ी। दरवाज़ा बस बंद ही होने वाला था कि मिस्टर कॉलिन्स को अचानक याद आया — अब तक उन्होंने रोज़िंग्स की महिलाओं के लिए कोई सलाम नहीं भेजा था। वे कुछ चौंके-से लगे। 'पर,' उन्होंने जोड़ा, 'आप ज़रूर चाहेंगी कि मैं दोनों देवियों तक अपना विनम्र आदर पहुँचाऊँ, और यहाँ रहते हुए जो मेहरबानी उन्होंने दिखाई, उसके लिए शुक्रिया भी अदा करूँ।' एलिज़ाबेथ ने कोई एतराज़ नहीं किया। तभी दरवाज़ा बंद हुआ, और गाड़ी चल पड़ी।

कुछ मिनट तक ख़ामोशी रही। फिर मरिया चिल्ला उठी। 'हे भगवान! लगता है, हम बस एक-दो दिन पहले ही तो यहाँ आए थे! और कितना कुछ हो गया इस बीच!' 'सचमुच बहुत कुछ हुआ,' एलिज़ाबेथ ने आह भरते हुए कहा। 'रोज़िंग्स में हमने नौ बार रात का खाना खाया, और दो बार चाय भी पी! बताने को कितना कुछ होगा!' एलिज़ाबेथ ने मन-ही-मन जोड़ा। 'और मुझे कितना कुछ छुपाना है!'

रास्ते में बातचीत भी बहुत कम हुई, और कोई हैरानी वाली बात भी नहीं हुई। हंसफ़र्ड छोड़े चार घंटे भी नहीं बीते थे कि वे मिस्टर गार्डिनर के घर पहुँच गईं, जहाँ कुछ दिन रुकना था। जेन सेहतमंद लग रही थी। मामी ने बड़े प्यार से जो कई कार्यक्रम बना रखे थे, उनकी वजह से एलिज़ाबेथ को बहन का मिज़ाज परखने का मौक़ा मुश्किल से मिला। पर जेन साथ ही घर लौटने वाली थी। लॉन्गबर्न पहुँचकर परखने का पूरा वक़्त मिल जाएगा। इधर एलिज़ाबेथ मिस्टर डार्सी के प्रस्ताव की बात अपनी बहन को बताना चाहती थी। लॉन्गबर्न पहुँचने तक भी रुक पाना उसके लिए आसान नहीं था। जेन को बुरी तरह चौंका देने वाली यह बात खोलने का ख़याल, उसकी अपनी उस घमंड-भरी तसल्ली को भी ज़रूर बहुत बढ़ा देता, जिसे वह अभी तक अक़्ल से पूरी तरह दबा नहीं पाई थी। सब कुछ बता देने की चाह पर क़ाबू पाना लगभग नामुमकिन था। पर कहाँ तक बताना है, यह उसने अभी तय नहीं किया था। बात शुरू करते ही, शायद बिंगली को लेकर बहन को और उदास कर देने वाली बात भी मुँह से निकल जाए, इसी डर से वह सहमी हुई थी। इसी हिचक और डर की बदौलत एलिज़ाबेथ चुप रह सकी।