हिंदी संस्करण

अध्याय 39

मई का दूसरा हफ़्ता था। तीनों जवान लड़कियाँ ग्रेसचर्च स्ट्रीट से साथ निकलीं और हर्टफ़र्डशायर के एक क़स्बे की तरफ़ चल पड़ीं। मिस्टर बेनेट की गाड़ी जिस सराय में मिलनी थी, वह पास आने लगी। कोचवान समय का पक्का निकला, इसलिए किटी और लिडिया ऊपर के खाने वाले कमरे की खिड़की से बाहर झाँकती जल्दी ही दिख गईं। दोनों वहाँ एक घंटे से भी ज़्यादा से थीं। सामने की टोपियों की दुकान देखने, पहरेदार सिपाही को ताकने, और सलाद-खीरा काटने-सजाने में उन्होंने ख़ुशी-ख़ुशी वक़्त बिताया था। बड़ी बहनों का स्वागत करते हुए दोनों ने सराय के भंडार से आम तौर पर परोसी जाने वाली ठंडी गोश्त की मेज़ बड़े फ़ख़्र से दिखाई और चिल्लाईं, 'शानदार नहीं है? कैसा सुहाना चौंका देने वाला तोहफ़ा है, है न?' लिडिया ने जोड़ा, 'हम सबको दावत देंगे। पर पैसे तुम दोनों को उधार देने होंगे। हमने अभी-अभी उस दुकान में सारे पैसे उड़ा दिए।' फिर उसने ख़रीदी चीज़ें दिखाईं। 'देखो, यह बोनेट ख़रीदी। बहुत सुंदर तो नहीं लगती। पर सोचा, न ख़रीदने से ख़रीद लेना ही बेहतर है। घर पहुँचते ही इसे पूरा उधेड़ूँगी, देखूँगी और सुंदर बना सकती हूँ या नहीं।' बड़ी बहनों ने बोनेट को भद्दा बताया, तो भी लिडिया को ज़रा परवाह नहीं हुई। 'अरे, दुकान में इससे कहीं ज़्यादा भद्दी दो-तीन और भी थीं। इससे अच्छे रंग का साटन लगाकर नए सिरे से सजाऊँगी तो ठीक-ठाक लगने लगेगी। वैसे भी मिलिशिया मेरिटन छोड़ते ही, इस गर्मी कोई क्या पहने, इससे कुछ ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ेगा। दो हफ़्ते में निकल जाएँगे, कहती हैं।' 'सच में?' एलिज़ाबेथ बहुत ख़ुश होकर चिल्लाई। 'ब्राइटन के पास डेरा डालेंगे, कहते हैं। पिताजी अगर गर्मियों में हम सबको वहाँ ले जाएँ, तो कितना अच्छा हो! सचमुच बड़ी मज़ेदार योजना होगी। ख़र्चा भी कुछ ख़ास नहीं होगा। माँ को भी सबसे ज़्यादा वहीं जाने की चाह है! सोचो तो — नहीं गए, तो यह गर्मी कितनी भयानक बीतेगी!' 'हाँ,' एलिज़ाबेथ ने सोचा, 'सचमुच बड़ी मज़ेदार योजना होगी। हमारे पूरे परिवार का काम एक ही झटके में तमाम कर देगी। हे भगवान! एक मिलिशिया रेजिमेंट और मेरिटन के महीने के नाच ने ही अभी तक होश उड़ा रखे हैं, ऊपर से ब्राइटन में डेरों से भरे सिपाही!'

सब मेज़ पर बैठे, तो लिडिया बोली, 'तुम दोनों को एक ख़बर बतानी है। बताओ तो, क्या है? सचमुच बढ़िया ख़बर है। हम सबके चहेते किसी की बात है।' जेन और एलिज़ाबेथ ने एक-दूसरे की तरफ़ देखा। फिर बैरे से कह दिया कि अब वह जा सकता है। लिडिया हँसते हुए बोली। 'अरे, तुम दोनों तो हमेशा इतना तौर-तरीक़ों और सावधानी से ही चलती हो। सोचा, बैरा सुन ले तो अच्छा नहीं लगेगा? उससे क्या फ़र्क़ पड़ता है! मैं जो कहने वाली हूँ, उससे भी बुरी बातें वह अक्सर सुन चुका होगा। पर सच में बहुत बदसूरत आदमी है! अच्छा हुआ चला गया। इतनी लंबी ठुड्डी तो ज़िंदगी में पहली बार देखी। ख़ैर, अब सुनो ख़बर। प्यारे विकहम की बात है। बैरे के सुनने के लिए तो यह बहुत ही अच्छी ख़बर है, है न? विकहम को मैरी किंग से शादी करने की कोई फ़िक्र नहीं रही। हैरानी की बात है न! मैरी अपने मामा के घर लिवरपूल चली गई। वहीं रहेगी। अब विकहम बिलकुल महफ़ूज़ है।' एलिज़ाबेथ ने जोड़ा, 'मैरी किंग भी महफ़ूज़ है! जायदाद देखते हुए, वह बड़ी नादानी भरी शादी से बच गई।' 'अगर उसे विकहम पसंद थे, तो मैरी का यूँ चले जाना सचमुच बेवक़ूफ़ी है।' जेन ने कहा, 'फिर भी उम्मीद है, दोनों में से किसी को भी गहरा लगाव नहीं था।' 'विकहम की तरफ़ से तो हरगिज़ नहीं था। मैं दावे से कहती हूँ। उसने मैरी को तिनके बराबर भी कभी नहीं चाहा। इतनी नाक़ाबिले-बर्दाश्त, नाटी, झाइयों से भरी लड़की को भला कौन चाहेगा?' एलिज़ाबेथ चौंक गई। वह ख़ुद ऐसे रूखे शब्द नहीं कह पाती। पर यह ख़याल ही, कुछ समय पहले तक उसके अपने मन में पली सोच से बहुत अलग नहीं था। तब वह उसी सोच को उदार मानती थी।

सबने खाना ख़त्म किया और बड़ी बहनों ने पैसे चुकाए, तो गाड़ी तैयार करने को कहा गया। थोड़ी जगह जमाने के बाद सब गाड़ी में बैठ गए। सफ़र के बक्सों, सिलाई की थैलियों और गठरियों के साथ, किटी और लिडिया की ख़रीदी अनचाही चीज़ें भी लाद दी गईं। 'वाह, कितनी सफ़ाई से जम गया! एक बक्सा और लादने का मज़ा लेने के लिए भी बोनेट लाना सही रहा! अब आराम से सटकर बैठो, और घर तक बातें करते-हँसते चलें। पहले यह बताओ, तुम दोनों के जाने के बाद क्या हुआ। कोई अच्छे मर्द मिले? किसी से इश्क़ भी लड़ाया? मुझे तो पूरा भरोसा था, तुम दोनों में से कोई एक लौटने से पहले शौहर पा लेगी। जेन तो अब सचमुच बुढ़िया कुँआरी बन जाएगी। लगभग तेईस की हो गई! हे भगवान! अगर मैं तेईस की होने तक शादी न कर पाई, तो कितनी शर्म आएगी! फ़िलिप्स मौसी तो चाहती हैं कि तुम दोनों की शादी हो जाए — इतना कि तुम ख़ुद भी शायद उतना न चाहती हो। कहती हैं, लिज़ी को मिस्टर कॉलिन्स को मान लेना बेहतर होता। पर मुझे तो लगता है, तब कोई मज़ा ही नहीं रहता। हे भगवान! मैं तो तुम दोनों से पहले शादी करना चाहती हूँ! फिर तुम दोनों को हर नाच में साथ ले जाकर रखवाली करूँगी। अरे, अभी कुछ दिन पहले कर्नल फ़ॉर्स्टर के घर बड़ा ही मज़ेदार क़िस्सा हुआ! किटी और मैंने वहाँ एक दिन बिताने का सोचा, और श्रीमती फ़ॉर्स्टर ने शाम को एक छोटा-सा नाच रखने का वादा किया। और सुनो, श्रीमती फ़ॉर्स्टर और मैं तो बहुत ही गहरी सहेलियाँ हैं! तो हमने हैरिंगटन घराने के दोनों बच्चों को भी बुलाया, पर हैरियट की तबीयत ख़राब थी, इसलिए पेन को अकेले आना पड़ा। पता है हमने क्या किया? चैंबरलेन को औरतों के कपड़े पहनाकर मेम साहिबा बना दिया! कितना मज़ा आया होगा, सोचो! कर्नल फ़ॉर्स्टर और श्रीमती फ़ॉर्स्टर, और किटी और मुझे छोड़कर किसी को कुछ पता नहीं था। एक ड्रेस उधार लेनी पड़ी, इसलिए मौसी को ही पता चला। वह कितना शानदार दिख रहा था, तुम सोच भी नहीं सकतीं! डेनी, विकहम, प्रैट और दो-तीन और मर्द अंदर आए, तो बिलकुल पहचान ही नहीं पाए। हे भगवान, मैं कितना हँसी! श्रीमती फ़ॉर्स्टर भी। हँसते-हँसते मरने का-सा हाल हो गया। तभी मर्दों को शक हुआ कि कुछ गड़बड़ है, और जल्दी ही सारा भेद खुल गया।' किटी बग़ल में याद आती बातें जोड़ती और इशारे देती रही, और लिडिया ऐसी महफ़िलों के क़िस्से और मज़ेदार शरारतों से लॉन्गबर्न तक सबका मन बहलाने की कोशिश करती रही। एलिज़ाबेथ जितना हो सके, ध्यान न देने की कोशिश करती रही। फिर भी विकहम का नाम बार-बार आना टाला नहीं जा सका।

घर पर सबका स्वागत बहुत गर्मजोशी से हुआ। श्रीमती बेनेट यह देखकर ख़ुश हुईं कि जेन की ख़ूबसूरती में ज़रा भी कमी नहीं आई। खाने के दौरान मिस्टर बेनेट ने अपनी तरफ़ से एक से ज़्यादा बार एलिज़ाबेथ से कहा। 'लौट आई, यह देखकर ख़ुशी हो रही है, लिज़ी।' मरिया का स्वागत करने और ख़बरें सुनने लुकास घराने के लगभग सभी लोग आ पहुँचे। खाने का कमरा लोगों से भरा था, और हर कोई अलग-अलग बात कर रहा था। लेडी लुकास मेज़ के उस पार मरिया से अपनी बड़ी बेटी और उनके घर की मुर्ग़ियों का हाल पूछ रही थीं। श्रीमती बेनेट एक साथ दो काम करने में जुटी थीं। थोड़ी दूर बैठी जेन से नए फ़ैशन की बातें सुनतीं, और वह सब छोटी लुकास बेटियों को एक-एक करके सुना देतीं। लिडिया सबसे कुछ ऊँची आवाज़ में, जो भी सुनने को तैयार हो उसे पकड़कर, उस सुबह की सारी ख़ुशियाँ बयान करती रही। 'अरे, मैरी। तुम भी हमारे साथ जाती, तो कितना अच्छा होता। पता नहीं तुम्हें कितना बताऊँ, कितना मज़ा आया! रास्ते में किटी और मैंने खिड़कियों की सारी झिर्रियाँ गिरा दीं, और दिखाया मानो गाड़ी में कोई है ही नहीं। किटी को मितली न आती, तो पूरे रास्ते ऐसा ही करते। जॉर्ज सराय पहुँचकर तो हमने सोचा, हमने बड़ी शान से काम किया। तीनों को दुनिया का सबसे बढ़िया ठंडा खाना खिलाया। तुम गई होतीं, तो तुम भी दावत देतीं। निकलते वक़्त भी बड़ा मज़ा आया! लगा, गाड़ी में कभी सब समा ही नहीं पाएँगे। हँसते-हँसते मरने का-सा हाल हो गया। घर आने भर के रास्ते कितनी मस्ती में थे! इतनी ज़ोर से चिल्लाए-हँसे कि दस मील दूर तक सुनाई दिया होगा!' मैरी ने बड़ी गंभीरता से जवाब दिया, 'प्यारी बहन, मैं यह हरगिज़ नहीं कहना चाहती कि ऐसी ख़ुशियों की कोई क़द्र नहीं। यक़ीनन ज़्यादातर औरतों के मन को यह भाती होगी। पर मुझे मानना पड़ेगा, इसमें मुझे रत्ती भर भी दिलचस्पी नहीं। मुझे तो किताब पढ़ना कहीं ज़्यादा भाता है।' पर लिडिया ने इस जवाब का एक शब्द भी नहीं सुना। किसी की बात तीस सेकंड से ज़्यादा सुनना उसकी आदत ही नहीं थी। मैरी की बात पर तो उसने बिलकुल ध्यान ही नहीं दिया।

दोपहर होते ही लिडिया दूसरी बहनों से मेरिटन तक पैदल जाकर सबका हाल देखने की ज़िद करने लगी। पर एलिज़ाबेथ ने साफ़ मना कर दिया। यह सुनने को नहीं दिया जा सकता था कि बेनेट घर की बेटियाँ घर लौटे आधे दिन भी नहीं बीता कि अफ़सरों के पीछे भागीं। एक और वजह भी थी। विकहम से दोबारा मिलने से वह डरती थी। जितना हो सके, उससे बचे रहने का उसने मन बना लिया था। रेजिमेंट जल्द ही जाने वाली है, यह बात उसके लिए बयान से बाहर का सुकून थी। दो हफ़्ते में निकल जाएँगे। एक बार निकल गए, तो उम्मीद थी कि विकहम की वजह से ख़ुद को और तंग नहीं करना पड़ेगा।

घर लौटे कुछ ही घंटे बीते थे कि पता चला, सराय में लिडिया ने जो ब्राइटन की योजना का इशारा दिया था, उस पर माँ-बाप अक्सर आपस में बात करते रहे हैं। एलिज़ाबेथ को जल्दी ही समझ आ गया कि पिता का मन ज़रा भी झुकने का नहीं। पर पिता के जवाब इतने धुंधले और दो-अर्थी होते कि माँ, बार-बार हिम्मत हारने पर भी, आख़िर मक़सद पूरा होने की उम्मीद कभी नहीं छोड़तीं।