हिंदी संस्करण

अध्याय 56

बिंगली और जेन की मँगनी हुए क़रीब एक हफ़्ता बीता था। एक सुबह बिंगली घर की महिलाओं के साथ खाने के कमरे में बैठे थे। तभी गाड़ी की आवाज़ आई और सबकी नज़र अचानक खिड़की की ओर उठ गई। चार घोड़ों वाली एक गाड़ी लॉन पार करती हुई पास आ रही थी। किसी मेहमान के आने के लिहाज़ से सुबह बहुत जल्दी की थी। और वह गाड़ी आस-पास के किसी पड़ोसी की भी नहीं थी। घोड़े किसी डाक-चौकी से किराए पर लिए हुए थे। गाड़ी भी उनके लिए अनजानी थी, और आगे-आगे आए नौकर की वर्दी भी। पर इतना पक्का था कि कोई मिलने आया है। बिंगली ने फ़ौरन मिस बेनेट को मना लिया — ऐसे बिन बुलाए मेहमान के साथ बँधे रहने से अच्छा है कि दोनों झाड़ियों भरे बाग़ में टहलने निकल जाएँ। वे दोनों चले गए। पीछे बचे तीनों लोग अटकलें लगाते रहे, पर कोई ठीक जवाब नहीं मिला। आख़िर दरवाज़ा पूरा खुला और मेहमान भीतर आईं। लेडी कैथरीन डी बर्ग थीं। सब हैरान होने के लिए तैयार तो थे ही। पर सचमुच की हैरानी उम्मीद से कहीं बड़ी निकली। श्रीमती बेनेट और किटी उन्हें बिल्कुल नहीं जानती थीं, फिर भी उनका भी यही हाल हुआ। एलिज़ाबेथ को तो इससे भी ज़्यादा हैरानी हुई। लेडी कैथरीन कमरे में आईं, तो उनके चेहरे पर हमेशा से भी ज़्यादा रूखापन था। एलिज़ाबेथ के नमस्कार का जवाब उन्होंने बस ज़रा-सा सिर झुकाकर दिया। फिर एक शब्द कहे बिना बैठ गईं। किसी से परिचय कराने को भी नहीं कहा। फिर भी उनके भीतर आते ही एलिज़ाबेथ ने माँ को उनका नाम बता दिया था। श्रीमती बेनेट बुरी तरह चौंक गईं। पर इतने ऊँचे दर्जे की मेहमान के आने से वे फूली न समाईं और बड़े ही आदर से उनका स्वागत किया। लेडी कैथरीन कुछ देर चुपचाप बैठी रहीं। फिर बेहद रूखी आवाज़ में एलिज़ाबेथ से बोलीं। 'उम्मीद है तुम ठीक-ठाक हो, मिस बेनेट। वे तुम्हारी माँ हैं?' एलिज़ाबेथ ने छोटा-सा जवाब दिया कि हाँ, वही हैं। 'और वह तुम्हारी बहनों में से कोई एक होगी?' 'जी हाँ, लेडी कैथरीन।' लेडी कैथरीन से बात करने का मौक़ा पाकर श्रीमती बेनेट ख़ुश थीं, सो बोलीं। 'सबसे छोटी से ठीक ऊपर वाली बेटी है। सबसे छोटी की शादी हाल ही में हुई है। और सबसे बड़ी यहीं आस-पास कहीं टहल रही है — उस नौजवान के साथ, जो शायद जल्द ही हमारे परिवार का हो जाए।' थोड़ी देर चुप रहने के बाद लेडी कैथरीन बोलीं। 'यहाँ का पार्क बहुत ही छोटा है।' 'रोज़िंग्स के आगे तो कुछ भी नहीं होगा, लेडी कैथरीन। पर सर विलियम लुकास के पार्क से यह कहीं बड़ा है, यह मैं दावे के साथ कह सकती हूँ।' 'गर्मियों की शाम बैठने के लिए यह कमरा बहुत ही तकलीफ़देह होगा। खिड़कियाँ पूरी तरह पश्चिम की ओर हैं।' श्रीमती बेनेट ने भरोसा दिलाया कि खाने के बाद वे इस कमरे में कभी नहीं बैठतीं। फिर उन्होंने जोड़ा। 'गुस्ताख़ी माफ़ हो, पर क्या मिस्टर कॉलिन्स और उनकी पत्नी अच्छे से हैं?' 'हाँ, बहुत अच्छे से हैं। परसों रात ही उनसे मिली थी।' एलिज़ाबेथ को लगा कि अब वे शार्लट की भेजी चिट्ठी निकालेंगी। लेडी कैथरीन के यहाँ आने की और कोई वजह उसे सूझती ही नहीं थी। पर कोई चिट्ठी सामने नहीं आई। एलिज़ाबेथ की समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था। श्रीमती बेनेट ने बड़े आदर से कुछ खाने-पीने को कहा। पर लेडी कैथरीन ने साफ़ और बदतमीज़ी भरे ढंग से मना कर दिया कि वे कुछ नहीं लेंगी। फिर उठकर एलिज़ाबेथ से बोलीं। 'मिस बेनेट, तुम्हारे घर के लॉन के एक ओर एक छोटा-सा जंगली बग़ीचा दिखता है, ठीक-ठाक ही लगता है। तुम साथ चलने की कृपा करो, तो मैं उसका एक चक्कर लगाना चाहूँगी।' 'जा, बेटी।' माँ पुकार उठीं। 'लेडी कैथरीन को सारे रास्ते दिखा दे। उन्हें साधु की कुटिया ज़रूर पसंद आएगी।' एलिज़ाबेथ मान गई। दौड़कर अपने कमरे से छतरी उठा लाई। फिर उस महान मेहमान के साथ नीचे उतर गई। ड्योढ़ी पार करते वक़्त लेडी कैथरीन ने खाने के कमरे और बैठक के दरवाज़े खोलकर देखे। ज़रा-सा जाँचने के बाद फ़ैसला सुनाया कि कमरे ठीक-ठाक ही लगते हैं। और आगे बढ़ गईं।

गाड़ी दरवाज़े के आगे वैसी ही खड़ी थी। एलिज़ाबेथ ने देखा कि उसमें एक नौकरानी बैठी है। दोनों उस कंकड़ वाले रास्ते पर चुपचाप चलती रहीं, जो छोटे झुरमुट तक जाता था। एलिज़ाबेथ ने तय कर लिया कि आज हमेशा से भी ज़्यादा घमंडी और नागवार लग रही इस औरत से बात करने की कोशिश वह नहीं करेगी। एलिज़ाबेथ लेडी कैथरीन का चेहरा देखती हुई सोचती रही। 'मैंने कभी यह कैसे सोच लिया था कि ये अपने भतीजे से मिलती-जुलती हैं?' दोनों झुरमुट में पहुँचीं, तो लेडी कैथरीन ने बात शुरू की। 'मिस बेनेट, मैं यहाँ तक क्यों आई हूँ, यह तुम्हारी समझ में न आया हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। तुम्हारा अपना मन और तुम्हारा ज़मीर तुम्हें बता देगा कि मैं क्यों आई हूँ।' एलिज़ाबेथ ने बिना किसी बनावट के हैरान चेहरे से उनकी ओर देखा। 'आपको सचमुच ग़लतफ़हमी हुई है। यहाँ लेडी कैथरीन से मिलने का सौभाग्य मुझे किस वजह से मिला, इसका मुझे ज़रा भी अंदाज़ा नहीं।' लेडी कैथरीन ग़ुस्से भरी आवाज़ में बोलीं। 'मिस बेनेट, इतना तो तुम्हें जान लेना चाहिए कि मुझे हलके में लेना ठीक नहीं। तुम कितना भी छिपाव-दुराव करो, मैं वैसा नहीं करूँगी। मेरा स्वभाव हमेशा से सच्चा और खरा माना गया है। इतने बड़े मामले में भी मैं वह उसूल नहीं छोड़ूँगी। दो दिन पहले मैंने एक बेहद चौंका देने वाली अफ़वाह सुनी। कहा जा रहा था कि तुम्हारी बड़ी बहन की तो बहुत ही अच्छी शादी होने वाली है ही, और तुम — हाँ, यही मिस एलिज़ाबेथ बेनेट — भी थोड़े ही दिनों में मेरे भतीजे से ब्याह कर सकती हो। और वह कोई और नहीं, मेरे अपने भतीजे मिस्टर डार्सी। मैं जानती थी कि यह गंदा झूठ ही हो सकता है। सच होने की गुंजाइश मानकर अपने भतीजे का अपमान भी नहीं करना चाहती थी। फिर भी मैंने तय किया कि तुरंत यहाँ चलकर तुम्हें अपनी राय बता दूँ।' हैरानी और हिक़ारत से चेहरा लाल किए एलिज़ाबेथ बोली। 'यह सच हो ही नहीं सकता, ऐसा आप मानती थीं, तो इतनी दूर आने की तकलीफ़ आपने क्यों उठाई, यह मेरी समझ में नहीं आता। आप करना क्या चाहती थीं?' 'यही माँगने कि तुम फ़ौरन सारी दुनिया के सामने कह दो कि ऐसी हर अफ़वाह झूठी है।' 'लेडी कैथरीन मुझसे और मेरे परिवार से मिलने लॉन्गबर्न तक आई हैं,' एलिज़ाबेथ ने शांति से कहा। 'ऐसी कोई अफ़वाह सचमुच है, तो यह आना उसे और पक्का ही कर देगा।' 'सचमुच है, तो? यानी तुम उस अफ़वाह से अनजान बनने का ढोंग कर रही हो? वह तुम लोगों की ही फैलाई हुई नहीं है? तुम्हें पता नहीं कि यह बात सारी दुनिया में फैल चुकी है?' 'ऐसी बात मैंने एक बार भी नहीं सुनी।' 'तो क्या तुम यह भी कह सकती हो कि इसका कोई आधार ही नहीं?' 'मेरा स्वभाव लेडी कैथरीन जितना खरा है, ऐसा दावा मैं नहीं करूँगी। आप सवाल पूछ सकती हैं। पर हो सकता है कि मैं जवाब देना ही न चाहूँ।' 'यह तो सहा ही नहीं जा सकता। मिस बेनेट, मुझे संतोषजनक जवाब चाहिए। क्या मेरे भतीजे ने तुम्हें ब्याह का प्रस्ताव दिया है?' 'लेडी कैथरीन ने ख़ुद ऐलान किया है कि यह नामुमकिन है।' 'ऐसा ही होना चाहिए, और जब तक उसकी अक़्ल ठिकाने है, ऐसा ही रहेगा। पर हो सकता है कि तुम्हारी चालों और तुम्हारे लुभाने ने एक पल के लिए उसका दिमाग़ फेर दिया हो, और वह अपने और अपने पूरे परिवार के प्रति अपना फ़र्ज़ भूल गया हो। शायद तुमने ही उसे फँसा लिया हो।' 'ऐसा हुआ भी हो, तो उसे मानने वाली मैं सबसे आख़िरी इंसान रहूँगी।' 'मिस बेनेट, तुम्हें पता भी है कि मैं कौन हूँ? ऐसी बोली सुनने की मुझे आदत नहीं। दुनिया में उसके सबसे नज़दीकी रिश्तेदारों में मैं हूँ, और उसके हर बड़े मामले को जानने का हक़ मुझे है।' 'पर मेरे मामलों को जानने का हक़ आपको नहीं है। ऐसे बरताव से आप मुझसे कभी साफ़ जवाब नहीं निकलवा सकतीं।'

'मेरी बात ठीक-ठीक समझ लो। यह ब्याह, जिसकी तुम इतनी बड़ी हिम्मत करके चाह रखती हो, कभी नहीं हो सकता। हाँ, कभी नहीं। मिस्टर डार्सी की मँगनी मेरी बेटी से हो चुकी है। अब क्या कहोगी?' 'तो मैं बस इतना ही कहूँगी कि वे मुझे ब्याह का प्रस्ताव देंगे, ऐसा सोचने की आपके पास कोई वजह ही नहीं है।' लेडी कैथरीन पल भर हिचकीं, फिर बोलीं। 'उनकी मँगनी एक ख़ास ही तरह की है। दूध पीते बच्चे थे, तभी से दोनों एक-दूसरे के लिए तय कर दिए गए थे। यह उसकी माँ की और मेरी सबसे प्यारी चाह थी। दोनों पालने में पड़े थे, तभी से हमने यह ब्याह ठान लिया था। और अब, जब दोनों बहनों की वह चाह पूरी होने ही वाली है, तब एक ऐसी लड़की की वजह से यह ब्याह रुक जाए — जिसका ख़ानदान नीचा है, दुनिया में जिसकी कोई अहमियत नहीं, और जिसका हमारे घराने से कोई नाता ही नहीं? उसके दोस्तों की चाह और मिस डी बर्ग से हुए उस अनकहे वादे — इनकी कोई क़ीमत नहीं तुम्हारे लिए? सारी शराफ़त और सारी नज़ाकत भूल गईं? मैं ख़ुद कहती आई हूँ कि वह बचपन से ही अपनी चचेरी बहन के लिए तय था — यह तुमने सुना नहीं?' 'जी हाँ। यह मैंने पहले भी सुना है। पर इससे मेरा क्या लेना-देना? आपके भतीजे से मेरी शादी में और कोई रुकावट न हो, तो उनकी माँ और मौसी यह चाहती थीं कि वे मिस डी बर्ग से ब्याह करें — बस इतनी-सी बात से मैं पीछे नहीं हटूँगी। आप दोनों ने यह ब्याह ठानकर जो कुछ कर सकती थीं, सब किया। पर सचमुच ब्याह होना दूसरों के हाथ में है। मिस्टर डार्सी न इज़्ज़त के नाते अपनी चचेरी बहन से बँधे हैं, न दिल के नाते — तो वे कोई और चुनाव क्यों न करें? और वह चुनाव मैं हूँ, तो मैं उन्हें क्यों न क़ुबूल करूँ?' 'इसलिए कि इज़्ज़त, शिष्टाचार और समझदारी इसे मना करती है — नहीं, अपना फ़ायदा भी मना करता है। हाँ, मिस बेनेट, फ़ायदे की ही बात कर रही हूँ। सबकी मरज़ी जानते हुए भी उसके ख़िलाफ़ जाओगी, तो यह उम्मीद मत रखना कि उसका परिवार या उसके दोस्त तुम्हें मुँह लगाएँगे। उससे जुड़ा हर इंसान तुम्हें कोसेगा, तुम्हारी अनदेखी करेगा, तुम्हें हिक़ारत से देखेगा। तुमसे उसका जुड़ना एक कलंक होगा, और हममें से कोई तुम्हारा नाम तक ज़बान पर नहीं लाएगा।' 'बड़ी भारी मुसीबतें हैं।' एलिज़ाबेथ ने जवाब दिया। 'पर मिस्टर डार्सी की पत्नी को उस ओहदे के साथ इतनी बड़ी ख़ुशियाँ ज़रूर मिलेंगी कि कुल मिलाकर रोने की कोई वजह ही नहीं बचेगी।' 'कैसी ज़िद्दी और मनमानी करने वाली लड़की हो! तुम पर मुझे शर्म आती है! पिछले बसंत मैंने तुम पर जो तवज्जो दी, उसका शुक्रिया यूँ अदा करती हो? उस नाते मुझ पर तुम्हारा कोई फ़र्ज़ ही नहीं बनता? बैठ जाओ। मिस बेनेट, इतना जान लो कि मैं यहाँ अपना मक़सद पूरा करने का पक्का इरादा लेकर आई हूँ। उस इरादे को कोई नहीं तोड़ सकता। मैंने आज तक किसी की मनमानी के आगे घुटने नहीं टेके। और निराशा सहने की आदत भी मुझे नहीं।' 'तो अभी लेडी कैथरीन की हालत और भी तरस खाने लायक़ हो जाती है, बस इतना ही — मुझ पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।' 'मेरी बात मत काटो! चुपचाप सुनो। मेरी बेटी और मेरा भतीजा एक-दूसरे के लिए ही जन्मे हैं। माँ की तरफ़ से दोनों में वही ऊँचा ख़ून बहता है, और पिता की तरफ़ से भी — भले ही कोई ख़िताब न हो — दोनों इज़्ज़तदार, नामी और बहुत पुराने घरानों से हैं। दोनों तरफ़ की दौलत भी शानदार है। दोनों घरानों के हर इंसान ने उन्हें एक-दूसरे के लिए तय कर रखा है। फिर उन्हें अलग करने वाली चीज़ क्या है? न ख़ानदान, न रिश्तेदारी, न दौलत — ऐसी एक लड़की की एक ही रात में ऊपर चढ़ जाने की गुस्ताख़ ललक! क्या यह सब सहा जाए? नहीं, न सहा जा सकता है, न मैं सहूँगी! तुम्हें अपना भला दिखता होता, तो जिस तबक़े में पली-बढ़ी हो, उससे बाहर निकलने की चाह ही न रखतीं।' 'आपके भतीजे से ब्याह करके मैं अपने तबक़े से बाहर निकल जाऊँगी, ऐसा मैं नहीं मानती। वे सज्जन हैं और मैं एक सज्जन की बेटी — इस लिहाज़ से हम बराबर हैं।' 'ठीक है। तुम एक सज्जन की बेटी हो। पर तुम्हारी माँ कैसी हैं? तुम्हारे मामा और मौसियाँ कौन हैं? यह मत सोचना कि उनकी हैसियत मुझे मालूम नहीं।' 'मेरे रिश्तेदार जो भी हों,' एलिज़ाबेथ ने कहा। 'आपके भतीजे को उनसे कोई एतराज़ नहीं, तो लेडी कैथरीन के मतलब की भी यह बात नहीं।' 'एक बार में साफ़-साफ़ बता दो। क्या तुम्हारी उससे मँगनी हो चुकी है?' सिर्फ़ लेडी कैथरीन को संतुष्ट करने के लिए एलिज़ाबेथ जवाब न देती। पर पल भर सोचने के बाद उससे कहे बिना रहा नहीं गया। 'नहीं।' लेडी कैथरीन ख़ुश दिखीं। 'तो क्या तुम मुझसे वादा करोगी कि आगे भी कभी ऐसी मँगनी नहीं करोगी?' 'ऐसा कोई वादा मैं नहीं करूँगी।'

'मिस बेनेट, यह चौंकाने वाली और हैरान कर देने वाली बात है। मैं तो तुम्हें कहीं ज़्यादा समझदार लड़की समझती थी। पर ख़ुद को यह धोखा मत देना कि मैं कभी पीछे हट जाऊँगी। जो पक्का जवाब मैं माँग रही हूँ, वह दिए बिना मैं यहाँ से नहीं जाऊँगी।' 'वह पक्का जवाब मैं कभी नहीं दूँगी। इतनी पूरी तरह बेतुकी बात मैं डरकर और झुककर नहीं मानूँगी। लेडी कैथरीन चाहती हैं कि मिस्टर डार्सी आपकी बेटी से ब्याह करें। पर आप जो वादा चाहती हैं, वह मैं कर भी दूँ, तो क्या उन दोनों के ब्याह की गुंजाइश ज़रा-सी भी बढ़ जाएगी? मान लीजिए वे मुझसे प्यार करते हैं — तो मेरे प्रस्ताव ठुकरा देने भर से उनका मन अपनी चचेरी बहन की ओर हाथ बढ़ाने को हो जाएगा? गुस्ताख़ी माफ़ हो, पर इस बेतुकी माँग के पीछे लेडी कैथरीन ने जो दलीलें रखी हैं, वे उस माँग जितनी ही हलकी हैं। ऐसी बातों में मैं बह जाऊँगी, यह आपने सोचा हो, तो मेरे स्वभाव को आपने बहुत बड़ी ग़लती से समझा है। आपके भतीजे को यह कितना अच्छा लगेगा कि आपने उनके मामले में दख़ल दिया, यह मैं नहीं जानती। पर मेरे मामले में दख़ल देने का हक़ आपको तो बिल्कुल नहीं है। इसलिए इस बात को लेकर मुझे और मत सताइए।' 'इतनी जल्दी मत मचाओ। मेरी बात अभी बिल्कुल ख़त्म नहीं हुई। अब तक जितने एतराज़ मैंने गिनाए, उनमें एक और जोड़ना है। तुम्हारी सबसे छोटी बहन के शर्मनाक भाग जाने की पूरी बात मुझे मालूम है। सब कुछ मालूम है। उस नौजवान ने तुम्हारी बहन से जो ब्याह किया, वह तुम्हारे पिता और तुम्हारे मामा के पैसों से जल्दी-जल्दी जोड़-तोड़कर करवाया गया था। ऐसी लड़की मेरे भतीजे की साली बने? मेरे भतीजे के स्वर्गीय पिता के जायदाद-प्रबंधक का बेटा उसका साढ़ू बने? हे भगवान! तुम आख़िर सोच क्या रही हो? पेम्बरली के जंगल इस तरह गंदे किए जाएँ?' 'अब आपके पास कहने को और कुछ नहीं बचा होगा।' एलिज़ाबेथ ने खीझे मन से जवाब दिया। 'जितने तरीक़े हो सकते थे, सबसे आपने मेरा अपमान कर लिया। मैं घर लौट रही हूँ।' यह कहते हुए वह उठ खड़ी हुई। लेडी कैथरीन भी उठ गईं। दोनों वापस मुड़ीं। लेडी कैथरीन बुरी तरह भड़की हुई थीं। 'तो मेरे भतीजे की इज़्ज़त और उसके नाम का तुम्हें ज़रा भी ख़याल नहीं! कैसी बेदिल और ख़ुदग़रज़ लड़की हो! तुमसे नाता जोड़ने पर हर किसी की नज़र में उसे नीचा देखना पड़ेगा — यह सोचती तक नहीं?' 'लेडी कैथरीन, मुझे और कुछ नहीं कहना। मेरा मन आप जान चुकी हैं।' 'तो तुमने हठ ठान ही लिया है कि उसे हासिल करके रहोगी?' 'मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा। बस इतना ठाना है कि लेडी कैथरीन की या मुझसे कोई नाता न रखने वाले किसी भी इंसान की मरज़ी सोचे बिना, जिस तरह मुझे अपनी ख़ुशी मिलती दिखे, उसी तरह चलूँगी।' 'ठीक है। तो तुम मेरी बात मानने से इनकार कर रही हो। फ़र्ज़, इज़्ज़त और एहसान जो माँगते हैं, वह तुम नहीं करोगी। उसके सारे दोस्तों की नज़र में उसे बरबाद करने और दुनिया भर की हँसी का पात्र बना देने की ठान ली है तुमने।' 'इस मामले में न फ़र्ज़, न इज़्ज़त, न एहसान — कोई भी मुझसे कुछ माँग नहीं सकता।' एलिज़ाबेथ ने जवाब दिया। 'मिस्टर डार्सी से ब्याह करके मैं इनमें से किसी भी उसूल को नहीं तोड़ूँगी। रही बात उनके परिवार के ग़ुस्से या दुनिया की नाराज़गी की — वे मुझसे ब्याह करें और उनका परिवार सचमुच नाराज़ हो जाए, तो भी मैं पल भर के लिए फ़िक्र नहीं करूँगी। और दुनिया के ज़्यादातर लोगों में इतनी समझ तो होगी ही कि वे उस हिक़ारत में शामिल न हों।' 'तो यही तुम्हारी असली राय है और यही तुम्हारा आख़िरी फ़ैसला! बहुत ख़ूब। अब मुझे पता है कि मुझे क्या करना है। मिस बेनेट, यह मत सोचना कि तुम्हारी यह ऊँची चाह कभी पूरी होगी। मैं तुम्हें परखने आई थी। उम्मीद थी कि तुम समझदार लड़की निकलोगी। पर यक़ीन रखो, मैं अपनी बात पूरी करके रहूँगी।'

गाड़ी के दरवाज़े तक पहुँचने तक लेडी कैथरीन इसी तरह बोलती रहीं। फिर अचानक मुड़कर उन्होंने जोड़ा। 'मिस बेनेट, मैं तुमसे विदा नहीं लूँगी। तुम्हारी माँ को सलाम भी नहीं भिजवाऊँगी। इतनी तवज्जो पाने के लायक़ तुम हो ही नहीं। मैं बेहद गंभीर रूप से नाराज़ हूँ।'

एलिज़ाबेथ ने कोई जवाब नहीं दिया। लेडी कैथरीन से यह मनुहार भी नहीं की कि वे फिर घर के भीतर चलें। वह चुपचाप अकेली घर की ओर चल पड़ी। ऊपर जाते हुए उसने गाड़ी के चले जाने की आवाज़ सुनी। माँ अपने कमरे के दरवाज़े पर बेसब्री से इंतज़ार कर रही थीं। उन्होंने पूछा कि लेडी कैथरीन दोबारा भीतर आकर सुस्ताईं क्यों नहीं। 'उनका मन नहीं था।' बेटी ने कहा। 'उन्होंने कहा कि वे चलेंगी।' 'कितनी शानदार शक्ल-सूरत वाली महिला हैं! यहाँ तक चली आईं, यह तो बहुत ही बड़ी शिष्टता है! लगता है यही बताने आई थीं कि कॉलिन्स दंपति अच्छे से हैं। कहीं जा रही होंगी। मेरिटन से गुज़रना पड़ा, तो सोचा होगा कि तुझे भी देखती चलूँ। लिज़ी, तुझसे कुछ ख़ास तो नहीं कहा उन्होंने?' यहाँ एलिज़ाबेथ को एक छोटा-सा झूठ बोलने के सिवा कोई चारा नहीं रहा। दोनों के बीच जो बातें हुईं, उनका सार मान लेना उसके लिए नामुमकिन था।