हिंदी संस्करण
अध्याय 19
अगले दिन लॉन्गबर्न में एक नई बात हुई। मिस्टर कॉलिन्स ने आख़िरकार अपने मन की बात खोलकर कह दी। उनकी छुट्टी अगले शनिवार को ख़त्म होने वाली थी। इसलिए उन्होंने वक़्त गँवाए बिना यह काम निपटाने की ठान ली। ऐसे मौक़े पर भी घबरा जाएँ, इतने कम भरोसे वाले वे नहीं थे। इसलिए उन्होंने इस तरह के काम में ज़रूरी मानी जाने वाली हर रस्म निभाई, एक भी नहीं छोड़ी, और बड़े ही सलीक़े से आगे बढ़े। नाश्ता ख़त्म हुए थोड़ी ही देर हुई थी कि उन्होंने श्रीमती बेनेट, एलिज़ाबेथ और एक छोटी बेटी को साथ बैठे देखा, और माँ से कहा। 'श्रीमती जी, क्या आज सुबह आप मुझे अपनी सुंदर बेटी मिस एलिज़ाबेथ से अकेले में बात करने का मौक़ा दे सकेंगी?' एलिज़ाबेथ हैरानी से शरमा गई। उसे कोई और जवाब देने का मौक़ा मिलने से पहले ही श्रीमती बेनेट ने फ़ौरन जवाब दे दिया। 'अरे! बिलकुल। लिज़ी को भी बहुत अच्छा लगेगा। मुझे यक़ीन है, उसे कोई एतराज़ नहीं होगा। चल, किटी। ऊपर तेरा एक काम है।' श्रीमती बेनेट अपना सिलाई का सामान समेटकर जल्दी से जाने लगीं। तभी एलिज़ाबेथ चिल्ला उठी। 'माँ, मत जाइए। मेहरबानी करके मत जाइए। मिस्टर कॉलिन्स माफ़ करेंगे। ऐसी कोई बात मुझमें हो ही नहीं सकती, जो किसी और के सामने न कही जा सके। मैं ही यहाँ से चली जाती हूँ।' 'नहीं, नहीं। बकवास मत कर, लिज़ी। तू वहीं रह।' एलिज़ाबेथ जब घबराए चेहरे से सच में भागने लगी, तो माँ ने आगे कहा, 'लिज़ी, वहीं रुककर मिस्टर कॉलिन्स की बात सुन, यह मेरा हुक्म है।' एलिज़ाबेथ ऐसे हुक्म को टाल नहीं सकी। थोड़ा सोचने पर उसे यही सबसे समझदारी भरी बात लगी कि जितनी जल्दी और चुपचाप हो सके, यह मामला ख़त्म कर दिया जाए। वह फिर से बैठ गई। हाथों को लगातार हिलाते हुए वह दुख और हँसी के बीच डोलते अपने मन को छिपाने की कोशिश करती रही। श्रीमती बेनेट और किटी बाहर चली गईं। दोनों के जाते ही मिस्टर कॉलिन्स ने बात शुरू की।
'प्यारी मिस एलिज़ाबेथ, आपकी शर्मीली नज़ाकत में ज़रा भी ऐब नहीं है। बल्कि इससे आपके बाक़ी सारे गुण और भी चमक उठते हैं। अगर आपमें यह हल्की सी हिचक न होती, तो मेरी नज़र में आप अभी से कम प्यारी लगतीं। पर बेफ़िक्र रहिए, क्योंकि मुझे आपकी आदरणीय माँ से यह बात कहने की इजाज़त मिल चुकी है। आप अपनी सहज शर्म के चलते अनजान बनने की कोशिश करें, तब भी आपको यह समझने में मुश्किल नहीं होगी कि मेरा मतलब क्या है। मेरी दिलचस्पी इतनी साफ़ रही है कि उसे ग़लत समझा ही नहीं जा सकता। इस घर में आए मुझे बहुत दिन नहीं हुए, फिर भी मैंने आपको अपनी आने वाली जीवनसाथी चुन लिया है। पर इस मामले में जज़्बात में बहने से पहले, मुझे यह बता देना ठीक लगता है कि मैं शादी क्यों करना चाहता हूँ। साथ ही यह भी बता दूँ कि पत्नी चुनने की ठानकर मैं हर्टफ़र्डशायर क्यों आया। सच पूछिए तो मैं ठीक इसी इरादे से यहाँ आया हूँ।' मिस्टर कॉलिन्स इतने गंभीर और शांत ढंग से जज़्बात में बह रहे हैं, यह सोचकर एलिज़ाबेथ बस हँसते-हँसते रह गई। उनके थोड़ी देर रुकने पर भी वह उनकी बात रोक नहीं सकी। मिस्टर कॉलिन्स बोलते रहे। 'मेरे शादी करने की तीन वजहें हैं। पहली, मेरे जैसे भले घर के पादरी को अपनी शादीशुदा ज़िंदगी से पूरे परगने के लोगों के सामने मिसाल बनना चाहिए, यह मैं मानता हूँ। दूसरी, मुझे यक़ीन है कि शादी से मेरी ख़ुशी बहुत बढ़ जाएगी। तीसरी वजह, शायद मुझे सबसे पहले बतानी चाहिए थी। यह उस आदरणीय ऊँचे घराने की महिला की ख़ास सलाह और सिफ़ारिश पर हुआ है, जिन्हें मैं अपनी संरक्षिका कहने का सौभाग्य पाता हूँ। बिना पूछे भी उन्होंने मुझे दो बार अपनी राय देने की मेहरबानी की! यह उस शनिवार की रात की बात है, जब मैं हंसफ़र्ड से निकलने ही वाला था। जब श्रीमती जेनकिन्सन मिस डी बर्ग का पैर रखने का पीढ़ा ठीक कर रही थीं, हमने क्वाड्रिल का एक हाथ ख़त्म किया। अगला हाथ शुरू होने से पहले उन्होंने कहा, «मिस्टर कॉलिन्स, आपको शादी करनी चाहिए। आप जैसे पादरी को शादी करनी ही चाहिए। सही चुनाव कीजिए। मेरे लिए भी और अपने लिए भी, ऐसी महिला चुनिए। जो मेहनती और काम की हो। जो शानो-शौक़त में न पली हो, और थोड़ी आमदनी में भी समझदारी से गुज़ारा कर सके। यही मेरी सलाह है। ऐसी महिला जल्द से जल्द ढूँढ़कर हंसफ़र्ड ले आइए। तब मैं ख़ुद आकर देख लूँगी।» प्यारी चचेरी बहन, अब सोचता हूँ तो यह भी बता देना चाहता हूँ कि लेडी कैथरीन डी बर्ग जो ध्यान और मेहरबानी दिखाएँगी, वह भी उन गुणों में कम नहीं जो मैं आपको दे सकता हूँ। उनका बर्ताव मैं चाहे जितना बताऊँ, पूरा बयान नहीं कर सकता। आपकी बुद्धि और उमंग उन्हें ज़रूर भाएगी। बेशक, उनकी ऊँची हैसियत के सामने जो चुप्पी और आदर दिखाना ठीक है, अगर उससे यह थोड़ा नरम हो जाए। इतने में मैंने आम तौर पर शादी चाहने की अपनी वजहें काफ़ी बता दी हैं। अब बस एक बात और समझानी बाक़ी है। मेरे यहाँ भी बहुत सी भली जवान महिलाएँ हैं, फिर मैं वहाँ की जगह लॉन्गबर्न की ओर क्यों मुड़ा। सच तो यह है कि मेरे आदरणीय पिता जी के गुज़रने के बाद यह जागीर मुझे ही मिलेगी। बेशक, मैं चाहता हूँ कि पिता जी आगे भी कई साल जिएँ। पर वह दुखद घड़ी आने पर बेटियों का जो नुक़सान होगा, उसे थोड़ा भी कम करने के लिए मैंने सोचा कि उनमें से किसी एक को पत्नी बनाना चाहिए। ऐसा तय किए बिना मेरा मन चैन नहीं पाता। जैसा मैं पहले भी कह चुका, वह दिन शायद अभी कई साल दूर हो। प्यारी चचेरी बहन, यही मेरी वजह है। इसकी वजह से आप मुझे कमतर नहीं समझेंगी, ऐसा मुझे भरोसा है। अब बस इतना ही बताना बाक़ी है कि मेरा प्यार कितना गहरा है, सबसे जोशीले शब्दों में। मुझे धन-दौलत में रत्ती भर दिलचस्पी नहीं। पिता जी से ऐसी कोई माँग भी नहीं करूँगा। मुझे पता है वे पूरी नहीं कर सकते। आपकी माँ के गुज़रने के बाद ही आपके हिस्से आने वाले चार फ़ीसद के हज़ार पाउंड सरकारी बॉन्ड, शायद यही सब कुछ हो जो आपको मिल सके। इसलिए यह मसला मैं आगे कभी नहीं उठाऊँगा। भरोसा रखिए, शादी के बाद भी मेरे मुँह से कभी कोई कंजूसी भरी बात नहीं निकलेगी।'
अब उनकी बात बीच में रोकना ज़रूरी हो गया था। 'आप बहुत जल्दी कर रहे हैं।' एलिज़ाबेथ चिल्ला उठी। 'आप भूल रहे हैं कि मैंने अभी तक कोई जवाब ही नहीं दिया। मुझे और देर किए बिना अपनी बात कहने दीजिए। आपने मुझे इतनी अच्छी नज़र से देखा, इसके लिए शुक्रिया। यह प्रस्ताव मेरे लिए कितना बड़ा सम्मान है, यह भी मुझे पता है। पर मुझे इसे ठुकराना ही पड़ेगा।' 'जवान महिलाएँ पहली बार प्रस्ताव रखने वाले मर्द को ठुकरा देती हैं, यह आम बात है। असल में उनका मानने का इरादा होते हुए भी।' मिस्टर कॉलिन्स ने बड़े शिष्ट अंदाज़ में हाथ हिलाकर जवाब दिया। 'यह बात मैं अब नई नहीं सीख रहा। कभी-कभी दूसरी बार, यहाँ तक कि तीसरी बार भी ठुकराया जाता है। इसलिए अभी आपकी बात से मैं ज़रा भी हतोत्साहित नहीं हूँ। मुझे उम्मीद है, जल्द ही आपको वेदी तक ले जा सकूँगा।' 'मैंने इतना साफ़ कह दिया, फिर भी आप ऐसी उम्मीद पाले हैं, यह सच में हैरानी की बात है।' एलिज़ाबेथ चिल्ला उठी। 'भले ही कुछ महिलाएँ दूसरी बार प्रस्ताव मिलने की उम्मीद पर अपनी ख़ुशी दाँव पर लगाने की हिम्मत रखती हों, मैं साफ़ कहती हूँ कि मैं उनमें से नहीं। मेरा इनकार पूरी तरह सच्चा है। आप मुझे ख़ुश नहीं रख सकते। और मुझे यक़ीन है कि दुनिया में जिस औरत के आपको ख़ुश रखने की सबसे कम उम्मीद है, वह मैं ही हूँ। नहीं, अगर आपकी दोस्त लेडी कैथरीन मुझसे मिलें, तो वे मानेंगी कि मैं हर तरह से नाक़ाबिल हूँ।' 'अगर यह पक्का हो कि लेडी कैथरीन ऐसा ही सोचेंगी, तो बात अलग है।' मिस्टर कॉलिन्स ने बड़े गंभीर भाव से कहा। 'पर मैं ज़रा भी नहीं सोच सकता कि वे आपको नापसंद करेंगी। जब मुझे दोबारा उनसे मिलने का सौभाग्य मिलेगा, तब वे आपकी नज़ाकत और किफ़ायत जैसे प्यारे गुणों की खुलकर तारीफ़ करेंगी, यह भी आप बेफ़िक्र होकर मान सकती हैं।'
'सच कहूँ, मिस्टर कॉलिन्स। मुझे अपनी तारीफ़ की बिलकुल ज़रूरत नहीं। मुझे ख़ुद फ़ैसला करने दीजिए। और मेरी बात पर भरोसा करने की शराफ़त भी दिखाइए। मैं चाहती हूँ कि आप बहुत ख़ुश और बहुत मालदार बनें। इसीलिए मैं आपका प्रस्ताव ठुकरा रही हूँ। आप ऐसा न बन पाएँ, इसकी गुंजाइश रोकने के लिए मैं जो कर सकती हूँ, वह कर रही हूँ। आपने मुझे प्रस्ताव दिया, तो हमारे परिवार को लेकर आप जो एहसान का बोझ महसूस करते थे, वह भी काफ़ी हल्का हो गया होगा। वक़्त आने पर लॉन्गबर्न की जागीर आपके पास आए, तब भी आपको कोई पछतावा नहीं करना पड़ेगा। इसलिए मान लीजिए कि यह मामला पूरी तरह ख़त्म हो चुका है।' यह कहकर एलिज़ाबेथ उठ खड़ी हुई। वह कमरे से बाहर जाना चाहती थी। पर मिस्टर कॉलिन्स ने फिर बोलना शुरू किया। 'जब मैं अगली बार यह बात कहूँगा, तो उम्मीद है इस बार से बेहतर जवाब मिलेगा। बेशक अभी मैं आपको बेरहम कहने की सोच भी नहीं रहा। मुझे पता है कि पहली बार प्रस्ताव रखने वाले को ठुकराना आप औरतों के बीच एक रिवाज बन चुका है। शायद अभी आपने जो कहा, वह भी औरत की शर्म जितनी इजाज़त देती है, उतना ही मेरे प्रस्ताव को हौसला देने के लिए कहा गया हो।' 'सच में, मिस्टर कॉलिन्स।' एलिज़ाबेथ थोड़ा तेज़ आवाज़ में बोली। 'आप मुझे बहुत उलझन में डाल रहे हैं। अगर अब तक जो मैंने कहा, वह भी हौसला देने जैसा लग सकता है, तो मुझे समझ नहीं आता कि मैं कैसे इनकार करूँ कि आपको सच लगे।' 'प्यारी चचेरी बहन, मुझे यह मानने दीजिए कि आपका इनकार बस रिवाज़ निभाने भर की बात है। इसकी वजह भी संक्षेप में बता दूँ। मुझे नहीं लगता कि मेरा शादी का प्रस्ताव आपके क़ाबिल न हो। मुझे यह भी नहीं लगता कि जो ज़िंदगी मैं दे सकता हूँ, वह किसी भी तरह अच्छी न हो। मेरी सामाजिक हैसियत, डी बर्ग घराने से मेरा रिश्ता, और आपके परिवार से जुड़ा नाता, ये सब मेरे बहुत हक़ में हैं। और आप चाहे जितनी दिलकश हों, आपको यह भी गहराई से सोचना चाहिए कि आपको कोई और प्रस्ताव मिलेगा ही, यह बिलकुल तय नहीं। अफ़सोस, दहेज बहुत कम होने से आपकी ख़ूबसूरती और प्यारे गुणों का फ़ायदा दस में से नौ बार बेकार चला जाएगा। इसलिए मुझे यही मानना पड़ेगा कि मुझे ठुकराना आपका सच्चा इरादा नहीं। जैसा नफ़ीस महिलाएँ अक्सर करती हैं, मैं यही सोचूँगा कि आप मुझे इंतज़ार कराकर मेरा प्यार और गहरा करना चाहती हैं।' 'मैं साफ़ कह दूँ, किसी इज़्ज़तदार आदमी को तंग करने के लिए ऐसी नफ़ासत दिखाने का मेरा कोई इरादा नहीं। मैं तो चाहती हूँ कि आप मेरी सच्ची बात पर भरोसा करने की शराफ़त दिखाएँ। प्रस्ताव देकर आपने मुझे जो सम्मान दिया, उसके लिए मैं बार-बार शुक्रिया अदा करती हूँ। पर इसे मानना मेरे लिए किसी भी सूरत में मुमकिन नहीं। मेरा मन किसी भी नज़रिए से इसकी इजाज़त नहीं देता। क्या मैं इससे ज़्यादा साफ़ कह सकती हूँ? अब मुझे आपको तंग करने वाली नफ़ीस औरत नहीं, बल्कि सच्चे दिल से हक़ीक़त बताने वाली समझदार इंसान मानिए।' 'आप तो हमेशा से ही इतनी दिलकश हैं!' वे अजीब सी अदा दिखाते हुए बोल उठे। 'मुझे यक़ीन है कि जब आपके भले माता-पिता साफ़ अधिकार से इजाज़त दे देंगे, तो आप ख़ुशी-ख़ुशी मेरा प्रस्ताव मान लेंगी।'
एलिज़ाबेथ ने ख़ुद को इतनी ज़िद से धोखा देने वाले इस आदमी को कोई जवाब नहीं दिया। वह सीधे चुपचाप कमरे से बाहर निकल गई। और उसने यह ठान लिया। अगर बार-बार का इनकार भी उन्हें मीठा हौसला ही लगता रहा, तो पिता जी से मदद माँगेगी। पिता जी उसे इतने साफ़ ढंग से ठुकरा देंगे कि बात पक्की हो जाएगी। कम से कम उनके इस बर्ताव को किसी नफ़ीस औरत का दिखावा या नख़रा समझने की ग़लती कोई नहीं करेगा।