हिंदी संस्करण

अध्याय 21

मिस्टर कॉलिन्स के प्रस्ताव का क़िस्सा अब लगभग ख़त्म हो चुका था। एलिज़ाबेथ के हिस्से बस इतना रह गया था — उस बात से उपजी बेचैनी, और माँ की कभी-कभार की खीज भरी बातें सहना। मिस्टर कॉलिन्स ख़ुद न शर्मिंदा हुए, न उदास, न उससे बचते नज़र आए। उन्होंने अपना मन रूखे बर्ताव और नाराज़गी भरी चुप्पी से जताया। एलिज़ाबेथ से वे मुश्किल से बात करते। जिस ध्यान को वे इतनी मेहनत से जताते रहे थे, वह दिन के बाक़ी हिस्से में मिस लुकास की तरफ़ मुड़ गया। उनकी बातें शालीनता से सुनने का उनका ढंग सबके लिए राहत भरा था। ख़ासकर अपनी सहेली एलिज़ाबेथ के लिए तो यह बिलकुल सही राहत थी। अगले दिन भी श्रीमती बेनेट का बिगड़ा मूड और तबीयत ज़रा भी नहीं सुधरी। मिस्टर कॉलिन्स भी अपना आहत गुरूर उसी तरह पाले रहे। एलिज़ाबेथ को उम्मीद थी कि उनका ग़ुस्सा उनके ठहरने की मुद्दत घटा देगा। पर लगता था शुरू की योजना ज़रा भी नहीं बदली। वे पहले से शनिवार को जाने वाले थे, और अब भी शनिवार तक रुकने का ही इरादा रखते थे।

नाश्ता करने के बाद बहनें मेरिटन की तरफ़ पैदल निकलीं। मक़सद था मिस्टर विकहम के लौटने का पता करना, और साथ ही यह अफ़सोस बाँटना कि वे नेदरफ़ील्ड के नाच में नहीं आ सके थे। क़स्बे में घुसते ही मिस्टर विकहम भी साथ हो लिए। वे मौसी के घर तक साथ गए। वहाँ उन्होंने अपना अफ़सोस और खीज खुलकर जताई, और सबकी फ़िक्र भी भरपूर सुनी। पर विकहम ने एलिज़ाबेथ को बता दिया कि नाच में न आना दरअसल उनका अपना फ़ैसला था। उन्होंने कहा, 'जैसे-जैसे वक़्त क़रीब आया, मुझे लगा मिस्टर डार्सी से न टकराना ही बेहतर होगा। एक ही कमरे में, एक ही महफ़िल में उनके साथ इतने घंटे बिताना शायद मेरे लिए मुश्किल होता। सिर्फ़ मेरे लिए ही नहीं, दूसरों के लिए भी नाज़ुक हालात बन सकते थे।' एलिज़ाबेथ ने उनके इस संयम की खूब तारीफ़ की। विकहम और एक और अफ़सर उनके साथ लॉन्गबर्न तक पैदल आए। इस दौरान दोनों ने इस बात पर देर तक बातचीत की। साथ ही औपचारिकता में एक-दूसरे की भरपूर तारीफ़ करने की गुंजाइश भी निकाली। विकहम पूरे रास्ते एलिज़ाबेथ का ख़ास ख़याल रखते रहे। उनका साथ आना उसके लिए दो तरह से अच्छा था। उनका दिखाया लगाव उसे बेहद भाया। और उन्हें अपने माँ-बाप से मिलवाने का मौक़ा मिलना भी उसे बड़ा सुहाया।

वे लौटे ही थे कि मिस बेनेट के नाम एक चिट्ठी आई। चिट्ठी नेदरफ़ील्ड से आई थी। जेन ने फ़ौरन लिफ़ाफ़ा खोला। अंदर एक छोटा, नफ़ीस दबा हुआ काग़ज़ था। किसी महिला की साफ़-सुथरी, ख़ूबसूरत लिखावट पूरे पन्ने पर भरी थी। एलिज़ाबेथ ने देखा कि चिट्ठी पढ़ते-पढ़ते बहन के चेहरे का भाव बदल रहा था। कुछ जगहों पर तो उसकी नज़र देर तक टिकी रही। जेन ने जल्दी ही ख़ुद को सँभाल लिया। चिट्ठी रखकर वह हमेशा की तरह ख़ुशमिज़ाज चेहरे से सबकी बातचीत में शामिल होने लगी। पर एलिज़ाबेथ चिट्ठी की फ़िक्र में विकहम पर भी ध्यान नहीं दे पाई। जब वे और उनके साथी विदा लेकर गए, तो जेन ने इशारे से एलिज़ाबेथ को ऊपर बुलाया। दोनों जब अकेले कमरे में पहुँचीं, जेन ने चिट्ठी निकालते हुए कहा। 'कैरोलाइन बिंगली की चिट्ठी है। बात सुनकर हैरानी होगी। अब तक तो सारा दल नेदरफ़ील्ड छोड़कर लंदन जा रहा होगा। और वापस लौटने का कोई इरादा भी नहीं है। सुन तो ले क्या लिखा है।' जेन ने पहले पहला वाक्य ज़ोर से पढ़ा। लिखा था कि वे अभी-अभी भाई के पीछे-पीछे सीधे लंदन जाने का फ़ैसला कर चुके हैं, और उसी शाम मिस्टर हर्स्ट के घर, ग्रोवनर स्ट्रीट में खाना खाएँगे। अगला वाक्य कुछ यूँ था। «प्रिय सखी, हर्टफ़र्डशायर में जो कुछ पीछे छूट रहा है, उसमें तुम्हारे साथ के अलावा किसी और चीज़ का अफ़सोस जताने का दिखावा भी मैं नहीं करूँगी। पर उम्मीद है कि हमने साथ जो सुखद मुलाक़ातें बिताईं, वे कभी फिर कई बार नसीब हों। तब तक, बहुत बार, बिना कुछ छुपाए चिट्ठियाँ लिख-लिखकर हम जुदाई का दर्द कुछ कम कर सकेंगी। मुझे यक़ीन है तुम ऐसा ज़रूर करोगी।» एलिज़ाबेथ को यक़ीन नहीं हुआ, इसलिए इन बढ़ा-चढ़ाकर कही बातों का उस पर कोई असर नहीं हुआ। उनके यों अचानक चले जाने से उसे ज़रूर हैरानी हुई। पर सच में दुखी होने की बात नहीं थी। दल का नेदरफ़ील्ड में न होना मिस्टर बिंगली के वहाँ न आने का सबूत नहीं था। एलिज़ाबेथ को यक़ीन था कि उनकी संगत का अफ़सोस जेन मिस्टर बिंगली के साथ की ख़ुशी में जल्दी ही भूल जाएगी। कुछ देर बाद एलिज़ाबेथ बोली। 'सहेलियों से इस इलाक़े को छोड़ने से पहले मिल न पाना अफ़सोस की बात है। पर मिस बिंगली जो ख़ुशी आगे चाहती हैं, वह सोच से जल्दी आ सकती है। तब सहेली के नाते जो सुखद मुलाक़ातें रहीं, वे बहन बनकर कहीं ज़्यादा ख़ुशी से आगे बढ़ेंगी। वे मिस्टर बिंगली को लंदन में रोक तो नहीं सकतीं।' 'कैरोलाइन ने साफ़ लिखा है कि दल में से कोई भी इस जाड़े में हर्टफ़र्डशायर नहीं लौटेगा। सुन, पढ़ती हूँ।' «कल जब भैया हमें छोड़कर गए, तब भी उन्हें लगा था कि लंदन का काम तीन-चार दिन में निपट जाएगा। पर हमें यक़ीन है कि ऐसा नहीं हो सकेगा। और यह भी साफ़ है कि चार्ल्स लंदन पहुँचकर जल्दी लौटने की जल्दी नहीं करेंगे। इसलिए वे किसी सुनसान होटल में अकेले समय न बिताएँ, इसलिए हमने भी वहीं जाने का फ़ैसला किया है। मेरे बहुत-से जान-पहचान वाले तो जाड़ा बिताने पहले ही लंदन जा चुके हैं। काश यह सुन पाती कि प्रिय सखी भी उसी जमघट में शामिल होने की सोच रही है, पर वह उम्मीद मैंने छोड़ दी है। मेरी दिली दुआ है कि हर्टफ़र्डशायर की क्रिसमस इस मौसम की तरह ख़ुशियों से भरी रहे, और तुम्हारे पीछे इतने सज्जन लगे हों कि हम जिन तीन लोगों को साथ ले जा रहे हैं, उनकी कमी न खले।» 'इस चिट्ठी से,' जेन ने जोड़ा, 'साफ़ है कि इस जाड़े में वे नहीं लौटेंगे।' 'बस इतना साफ़ है कि मिस बिंगली नहीं चाहतीं कि वे लौटें।' 'तुझे ऐसा क्यों लगता है? यह फ़ैसला तो भैया ने ख़ुद ही लिया होगा। वे अपने काम ख़ुद तय कर सकते हैं। पर तुझे अभी सब पता नहीं। जो हिस्सा मुझे सबसे ज़्यादा चुभा, वह सुना देती हूँ। तुझसे कुछ नहीं छिपाऊँगी। «मिस्टर डार्सी अपनी बहन को देखने के लिए बेहद बेचैन हैं। सच कहूँ तो हम भी उनसे कम बेसब्री से दोबारा मिलने का इंतज़ार नहीं कर रहीं। जॉर्जियाना डार्सी की ख़ूबसूरती, नज़ाकत, तालीम और हुनर का कोई जोड़ नहीं, यह मैं दिल से मानती हूँ। लुइज़ा और मुझे उनसे जो लगाव है, वह इस उम्मीद से और गहरा हो गया है कि किसी दिन वे हमारी बहन बनेंगी। इस बारे में अपना मन तुम्हें पहले बताया था या नहीं, याद नहीं। पर यह इलाक़ा छोड़ते हुए बिना बताए नहीं रह सकती। मुझे यक़ीन है तुम भी इस उम्मीद को बेतुका नहीं मानोगी। भैया पहले ही उनकी बड़ी इज़्ज़त करते हैं। अब बार-बार मिलने और बेतकल्लुफ़ी से घुलने-मिलने का मौक़ा भी मिलेगा। उनके रिश्तेदार भी हमारे घरवालों जितना ही यह जोड़ी चाहते हैं। और चार्ल्स किसी भी औरत का दिल जीत सकते हैं, यह कहना मेरी बहन वाली अंधी चाहत नहीं, बल्कि सच है, ऐसा मुझे लगता है। जब लगाव पनपने की इतनी अच्छी वजहें हैं और रोकने वाला कुछ भी नहीं, तो प्रिय जेन, इतने लोगों की ख़ुशी पक्की मानने की उम्मीद रखना क्या मेरी ग़लती है?» यह बात तुझे कैसी लगी, लिज़ी?' जेन ने पूरा पढ़कर पूछा। 'इससे ज़्यादा साफ़ और क्या हो सकता है? कैरोलाइन साफ़ कह रही है कि उसे न उम्मीद है, न चाह, कि मैं उसकी बहन बनूँ। उसे पूरा यक़ीन है कि भैया का मेरे लिए कोई मन नहीं। और अगर उसे मेरे मन का कुछ अंदाज़ा है, तो बड़ी मेहरबानी से मुझे चौकन्ना करने की कोशिश कर रही है। कोई और मतलब निकल सकता है क्या?'

'हाँ, कोई और मतलब भी निकल सकता है। मेरी सोच बिलकुल अलग है। सुनेगी?' 'ज़रूर सुनूँगी।' 'बस दो बातें। मिस बिंगली को पता है कि भैया तुझसे प्यार करते हैं। और वह भैया की शादी मिस डार्सी से करवाना चाहती है। भैया को लंदन में रोके रखने के लिए साथ गई है, और तुझसे यह मनवाना चाहती है कि उनका तुझमें कोई मन नहीं।' जेन ने सिर हिला दिया। 'सच कह रही हूँ, जेन। मेरी बात मान ले। दोनों को साथ देखने वाला कोई भी उनके लगाव पर शक नहीं कर सकता। मिस बिंगली भी शक नहीं कर सकतीं, वे इतनी नादान नहीं हैं। अगर मिस्टर डार्सी उनके लिए आधा भी ऐसा लगाव दिखाते, तो वे अपना ब्याह का सामान कब का मँगवा चुकी होतीं। बात बस इतनी है — हम उनकी नज़र में न इतने अमीर हैं, न इतने ऊँचे ख़ानदान के। और मिस बिंगली तो चाहती हैं कि भैया मिस डार्सी को ही पा लें। उन्हें लगता है कि दोनों घरानों में एक ब्याह हो जाए तो दूसरा ब्याह भी आसानी से हो जाएगा। सोच काफ़ी चतुर है। बस मिस डी बर्ग आड़े न आएँ तो शायद कामयाब भी हो जाए। पर प्यारी जेन, इससे यह मान लेना कि मिस बिंगली के भैया की मिस डार्सी के लिए इज़्ज़त की बात कहने से वे तुझमें मंगलवार को विदा लेते वक़्त से ज़रा भी कम गुण देखने लगे हैं, ठीक नहीं। और यह मानना भी ठीक नहीं कि मिस बिंगली भैया को मना सकती हैं कि वे तुझसे नहीं, अपनी सहेली से गहरा प्यार करते हैं।' जेन ने जवाब दिया। 'अगर मैं मिस बिंगली को तेरी तरह देखती, तो शायद तेरी बात सुनकर मन बिलकुल हल्का हो जाता। पर मुझे पता है यह मान्यता ठीक नहीं। कैरोलाइन जान-बूझकर किसी को धोखा नहीं दे सकती। इस हालत में बस इतनी उम्मीद रख सकती हूँ कि कैरोलाइन ख़ुद ही ग़लतफ़हमी में है।' 'ठीक है। अगर मेरी बात से चैन नहीं मिलता, तो इससे बेहतर सोच और नहीं हो सकती थी। यक़ीन कर कि वह ग़लतफ़हमी में है। अब सहेली का फ़र्ज़ निभा चुकी, इसलिए अब और मत दुखी हो।'

'पर प्यारी बहन, चाहे कितना भी अच्छा सोचूँ, जिस मर्द की सारी बहनें और दोस्त चाहते हों कि वह किसी और औरत से ब्याह करे, उसे अपनाकर क्या मैं ख़ुश रह पाऊँगी?' 'यह तो तुझे ही तय करना होगा।' एलिज़ाबेथ बोली। 'ख़ूब सोच-समझ ले। अगर तुझे लगे कि दोनों बहनों की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ जाने का दुख उनकी बीवी बनने की ख़ुशी से बड़ा है, तो मैं ज़रूर मना कर देने की सलाह दूँगी।' 'ऐसी बात कैसे कह सकती है?' जेन हल्के से मुस्कुराकर बोली। 'अगर वे मना करें, तो मुझे बहुत दुख होगा, फिर भी झिझकना नहीं आएगा, यह तू भी जानती है।' 'मुझे भी नहीं लगा था कि तू झिझकेगी। तो फिर तेरी हालत पर इतना तरस भी नहीं आता।' 'पर अगर वे इस जाड़े में नहीं लौटे, तो मुझे चुनना भी नहीं पड़ेगा। छह महीनों में तो न जाने कितना कुछ हो सकता है।' एलिज़ाबेथ को यह ख़याल कि बिंगली अब कभी नहीं लौटेंगे, बड़ा हास्यास्पद लगा। यह बस कैरोलाइन की अपनी चाहत से फिसली हुई बात लगती थी। ऐसी चाहत चाहे कितनी खुलकर कही जाए या कितनी चालाकी से, किसी के बंधन में न बंधे किसी जवान पर उसका असर हो सकता है, यह उसने पल भर भी नहीं माना। एलिज़ाबेथ ने अपनी यह सोच पूरे ज़ोर से बहन को बताई। और जल्दी ही यह देखकर उसे ख़ुशी हुई कि इसका अच्छा असर हुआ। जेन आसानी से हिम्मत हारने वाली नहीं थी। प्यार से उपजी बेचैनी कभी-कभी उम्मीद को दबा देती। फिर भी उसे धीरे-धीरे यह भरोसा होने लगा कि बिंगली नेदरफ़ील्ड लौटकर उसके दिल की हर ख़्वाहिश पूरी करेंगे।

दोनों बहनों ने तय किया कि श्रीमती बेनेट को बस इतना बताएँगी कि वह दल जा चुका है। मक़सद था कि मिस्टर बिंगली के बर्ताव से माँ बेचैन न हों। पर इतना कम बताने पर भी माँ बहुत परेशान हो गईं। वे रोती रहीं कि अभी तो सब क़रीब आ ही रहे थे, और ठीक तभी लेडियों का चले जाना कितनी बुरी क़िस्मत है। कुछ देर मन भरकर अफ़सोस जताने के बाद, उन्हें इस ख़याल से तसल्ली मिली कि मिस्टर बिंगली जल्दी ही फिर आएँगे और लॉन्गबर्न में खाना खाएँगे। आख़िर में माँ ने ख़ुश होकर एलान किया — बिंगली को बस घर के सादे खाने पर बुलाया गया है, पर वह ख़ुद ज़रूर दो कोर्स का भरपूर खाना बनवाएँगी। इसी के साथ बात ख़त्म हुई।