हिंदी संस्करण
अध्याय 31
कर्नल फ़िट्ज़विलियम की पादरी-घर में बड़ी अच्छी छाप पड़ी। सभी महिलाओं को लगा कि वे रोज़िंग्स की महफ़िलों को कहीं ज़्यादा सुहावना बना देंगे। पर न्यौता कुछ दिन बाद ही आया, क्योंकि जब तक हवेली में मेहमान ठहरे रहते, पादरी-घर वालों की ज़रूरत नहीं पड़ती थी। दोनों सज्जनों को आए क़रीब एक हफ़्ता बीत चुका था, तब जाकर ईस्टर के दिन उन्हें यह तवज्जो मिलने का सम्मान मिला — वह भी बस इतना कि गिरजाघर से निकलते वक़्त उन्हें शाम को आने को कह दिया गया। पिछले पूरे हफ़्ते उन्होंने न लेडी कैथरीन को ठीक से देखा, न उनकी बेटी को। इस बीच कर्नल फ़िट्ज़विलियम एक से ज़्यादा बार पादरी-घर आ चुके थे, पर मिस्टर डार्सी सिर्फ़ गिरजाघर में ही नज़र आए। बेशक उन्होंने न्यौता क़ुबूल किया। ठीक वक़्त पर लेडी कैथरीन के बैठक-कमरे में पहुँचकर बाक़ी जमा हुए लोगों के साथ शामिल हो गए। लेडी कैथरीन ने शिष्टाचार से उनका स्वागत किया, पर यह साफ़ था कि जब कोई और मौजूद न हो, तब जितनी ख़ुशी उन्हें उनके आने से होती, अब उतनी नहीं थी। असल में उनका ज़्यादातर ध्यान अपने दोनों भतीजों पर ही टिका रहा। कमरे में बाक़ी किसी से कहीं ज़्यादा वे डार्सी से बातें करती रहीं। कर्नल फ़िट्ज़विलियम उन्हें देखकर सचमुच ख़ुश नज़र आए। रोज़िंग्स में कोई भी बदलाव उनके लिए ख़ुशगवार होता, और उस पर श्रीमती कॉलिन्स की ख़ूबसूरत सहेली ने भी उनका दिल बुरी तरह खींच लिया। वे एलिज़ाबेथ के पास बैठ गए। केंट और हर्टफ़र्डशायर, सफ़र और घर में रहने की ज़िंदगी, नई किताबों और संगीत — इन सब पर उन्होंने बड़े मज़े से बातें कीं। एलिज़ाबेथ को इस कमरे में इतना सुहावना वक़्त पहले कभी नहीं मिला था। दोनों जोश से, बिना रुके बातें करते रहे। इतना कि लेडी कैथरीन और मिस्टर डार्सी की भी दिलचस्पी जग गई। डार्सी शुरू से ही कई बार जिज्ञासा भरी नज़रों से उन्हें देख चुके थे। थोड़ी देर बाद लेडी कैथरीन ने भी वही भाव और खुलकर दिखाया। बेझिझक ऊँची आवाज़ में पूछ बैठीं।
'फ़िट्ज़विलियम, क्या कह रहे हो? किस बारे में बातें हो रही हैं? मिस बेनेट को क्या बता रहे हो? मुझे भी सुनने दो।' 'संगीत की बात हो रही थी, मैडम।' अब जवाब टाल पाना मुमकिन न रहा, तो उन्होंने कहा। 'संगीत! तो फिर ज़ोर से बोलो। संगीत मुझे सबसे ज़्यादा पसंद का विषय है। संगीत की बात हो, तो मुझे भी बातचीत में शामिल होना ही होगा। मुझसे बढ़कर संगीत का सच्चा शौक़ रखने वाला या जन्मजात अच्छी परख रखने वाला शायद ही इंग्लैंड में कोई हो। सीखने का मौक़ा मिला होता, तो मैं भी बड़ी माहिर निकलती। ऐन भी, अगर सेहत इजाज़त देती, तो ज़रूर बन जाती। बिना शक बहुत अच्छा बजाती। डार्सी, जॉर्जियाना कैसा बजाती है?' मिस्टर डार्सी ने अपनी बहन की उम्दा काबिलियत की तारीफ़ बड़े प्यार से की। 'यह सुनकर बड़ी ख़ुशी हुई कि वह अच्छा बजाती है', लेडी कैथरीन ने कहा। 'पर मेरी तरफ़ से ज़रूर कह देना कि ख़ूब अभ्यास किए बिना कोई भी माहिर नहीं बन सकता।' 'मैडम, यक़ीन मानिए, उसे ऐसी सलाह की ज़रूरत नहीं', उन्होंने जवाब दिया। 'वह हमेशा लगातार अभ्यास करती है।' 'तो और भी अच्छा। अभ्यास कितना भी करो, कभी ज़्यादा नहीं होता। अगली बार जब चिट्ठी लिखूँ, तो साफ़ कह दूँगी कि किसी भी हाल में सुस्ती न बरते। मैं अक्सर जवान लड़कियों से कहती हूँ कि लगातार अभ्यास के बिना संगीत में कोई भी हुनर हासिल नहीं होता, चाहे परख कितनी भी अच्छी क्यों न हो। मिस बेनेट से भी मैंने कई बार कहा है — जब तक और अभ्यास नहीं करोगी, ठीक से बजा ही नहीं पाओगी। श्रीमती कॉलिन्स के पास साज़ तो नहीं, पर जैसा मैंने कई बार कहा है, वह रोज़ रोज़िंग्स आ सकती हैं। श्रीमती जेनकिन्सन के कमरे में रखा पियानो जितना चाहें बजा सकती हैं। उस तरफ़ किसी को कोई तकलीफ़ नहीं होगी।' मिस्टर डार्सी को मौसी की बेअदबी पर कुछ शर्मिंदगी-सी महसूस हुई, पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
कॉफ़ी ख़त्म होते ही कर्नल फ़िट्ज़विलियम ने एलिज़ाबेथ को वादा याद दिलाया — क्या उसने उनके लिए बजाने का वादा नहीं किया था? वह फ़ौरन पियानो के आगे जा बैठी। वे कुर्सी खींचकर पास आ बैठे। लेडी कैथरीन आधा गीत सुनते ही फिर से दूसरे भतीजे से बातें करने लगीं, जैसा पहले करती थीं। आख़िरकार डार्सी मौसी से पीछा छुड़ाकर निकल आए। हमेशा की तरह सोच-समझकर चलते हुए वे पियानो की तरफ़ बढ़े। ऐसी जगह जा खड़े हुए जहाँ से सुंदर बजाने वाली का चेहरा सीधे सामने दिखे। एलिज़ाबेथ ने भाँप लिया कि वे क्या कर रहे हैं। धुन ठीक उसी वक़्त थमी, तो उसने शरारती मुस्कान के साथ उनकी तरफ़ मुड़कर कहा। 'मिस्टर डार्सी, आप इतनी शान से मेरा बजाना सुनने आए हैं ताकि मुझे डरा सकें। पर आपकी बहन कितना भी अच्छा बजाएँ, मैं डरने वाली नहीं। मुझमें एक ज़िद है — कोई जैसा चाहे मुझे डराना चाहे, मैं बर्दाश्त नहीं करती। जब भी कोई मुझे डराने की कोशिश करता है, मेरी हिम्मत और बढ़ जाती है।' 'मैं यह नहीं कहूँगा कि आप ग़लत हैं', उन्होंने जवाब दिया। 'क्योंकि आप यक़ीन नहीं कर सकतीं कि मेरा सचमुच आपको डराने का इरादा था। और मैं आपको इतने लम्बे समय से जानता हूँ कि यह भी जानता हूँ — कभी-कभी आप ऐसी राय भी बड़ी संजीदगी से जताकर ख़ुशी पाती हैं, जो असल में आपकी अपनी होती ही नहीं।' अपने बारे में यह बयान सुनकर एलिज़ाबेथ खिलखिलाकर हँस पड़ी। फिर कर्नल फ़िट्ज़विलियम से बोली, 'आपके चचेरे भाई मुझे कैसी दिखाएँगे, यह तो बड़ी बढ़िया तस्वीर पेश करेंगे — और सिखाएँगे कि मेरी एक भी बात पर भरोसा न करें। जहाँ मैं थोड़ी-बहुत भली-भली दिखने की कोशिश कर रही थी, वहीं मेरा असली रूप इतनी अच्छी तरह उघाड़ने वाला कोई मिल जाना मेरी बदक़िस्मती ही कहलाएगी। सच कहूँ तो, मिस्टर डार्सी, हर्टफ़र्डशायर में मेरे बारे में जो कुछ मेरे ख़िलाफ़ पता चला, वह सब बता देना बड़ी बेरहमी है। यह कहने की इजाज़त हो तो यह बड़ी नासमझी भी है, क्योंकि इससे मुझे भी बदला लेने का मन करता है। तब आपके रिश्तेदारों को सुनकर हैरानी होने लायक़ बातें भी निकल सकती हैं।' 'मुझे आपसे कोई डर नहीं', वे मुस्कुराते हुए बोले। 'ज़रूर बताइए, आप उन पर किस बात का इल्ज़ाम लगाना चाहती हैं', कर्नल फ़िट्ज़विलियम बोल उठे। 'मुझे जानना है कि अजनबियों के बीच वे कैसा बरताव करते हैं।' 'तो सुनिए। पर बड़ी डरावनी बात सुनने को तैयार रहिए। हर्टफ़र्डशायर में मैंने उन्हें पहली बार जहाँ देखा, वह एक नाच की महफ़िल थी। और जानते हैं उस नाच में उन्होंने क्या किया? सिर्फ़ चार डांस किए! आपका दिल दुखाने का अफ़सोस है, पर सच यही है। सज्जनों की कमी होने पर भी सिर्फ़ चार डांस किए। मुझे पक्का पता है कि एक से ज़्यादा जवान लड़कियाँ बिना जोड़ीदार के बैठी रह गई थीं। मिस्टर डार्सी, इस बात से तो आप मुकर नहीं सकते।' 'उस वक़्त मैं अपने साथ आए लोगों के सिवा नाच-घर की किसी भी महिला को नहीं जानता था।' 'बिल्कुल। नाच-घर में तो किसी से भी मिलवाया नहीं जा सकता। अच्छा, कर्नल फ़िट्ज़विलियम, अब क्या बजाऊँ? मेरी उँगलियाँ हुक्म का इंतज़ार कर रही हैं।'
'शायद,' डार्सी ने कहा, 'अगर मैंने मिलवाने की गुज़ारिश की होती, तो बेहतर राय बन पाती। पर अजनबियों को अपनी तरफ़ खींचने का हुनर मुझमें नहीं है।' 'क्या मैं आपके चचेरे भाई से इसकी वजह पूछूँ?' एलिज़ाबेथ अब भी कर्नल फ़िट्ज़विलियम की तरफ़ मुड़कर बोली। 'इतनी समझदारी, तालीम और दुनिया के तजुर्बे वाले शख़्स में अजनबियों पर अच्छा असर छोड़ने का हुनर क्यों नहीं है, यह पूछूँ?' 'उनसे पूछे बिना भी मैं जवाब दे सकता हूँ', फ़िट्ज़विलियम बोले। 'क्योंकि वे मेहनत करना ही नहीं चाहते।' 'यह सच है कि जो हुनर कुछ लोगों में होता है, वह मुझमें नहीं', डार्सी ने कहा। 'पहली बार मिलने वाले से भी सहजता से बात कर लेने का हुनर। मैं न तो उनके बोलने के ढंग से ख़ुद को ढाल पाता हूँ, न ही और लोगों की तरह उनकी दिलचस्पी की चीज़ों में दिलचस्पी होने का दिखावा कर पाता हूँ।' 'मेरी उँगलियाँ भी ऐसी ही हैं', एलिज़ाबेथ ने कहा। 'वे बहुत-सी औरतों की उँगलियों जितनी माहिरी से इस साज़ पर नहीं चलतीं। न उतना ज़ोर दिखातीं, न उतनी तेज़ी, न वही असर पैदा करतीं। पर मैंने हमेशा माना कि इसमें ग़लती मेरी है — मैंने मेहनत से अभ्यास करने की कोशिश ही नहीं की। मैं यह नहीं मानती कि मेरी उँगलियों में किसी भी दूसरी औरत की उँगलियों से कम शानदार बजाने की काबिलियत नहीं है।' डार्सी मुस्कुराकर बोले, 'आपकी बात बिल्कुल सही है। आपने अपना वक़्त कहीं बेहतर तरीक़े से लगाया। जिसे भी आपका बजाना सुनने का मौक़ा मिले, वह किसी कमी के बारे में सोच ही नहीं सकता। हम दोनों ही अजनबियों के सामने अपना हुनर नहीं दिखाते।'
तभी लेडी कैथरीन ने ऊँची आवाज़ में पूछा कि किस बारे में बातें हो रही हैं। बातचीत वहीं थम गई। एलिज़ाबेथ ने जल्दी ही फिर से बजाना शुरू कर दिया। लेडी कैथरीन पास आकर कुछ मिनट सुनती रहीं, फिर डार्सी से बोलीं। 'मिस बेनेट अगर और अभ्यास करे और लंदन के किसी उस्ताद से सीखे, तो बिल्कुल बुरा नहीं बजाएगी। उँगलियाँ चलाने का तरीक़ा अच्छी तरह जानती है, पर परख ऐन जितनी नहीं। ऐन की सेहत ने अगर सीखने की इजाज़त दी होती, तो वह बड़ी शानदार बजाने वाली बनती।' एलिज़ाबेथ ने डार्सी की तरफ़ देखा — यह जानने को कि सचमुच चचेरी बहन की तारीफ़ से वे कितने दिल से सहमत हैं। पर उस पल भी, किसी और पल भी, प्यार की कोई झलक नज़र नहीं आई। मिस डी बर्ग के साथ उनके पूरे बर्ताव को देखने के बाद, मिस बिंगली को यह तसल्ली भी मिल सकती थी — अगर मिस बिंगली भी उनकी रिश्तेदार होतीं, तो डार्सी की उनसे शादी होने की उतनी ही संभावना होती जितनी मिस डी बर्ग से। लेडी कैथरीन एलिज़ाबेथ का बजाना लगातार परखती रहीं। साथ ही बजाने के तरीक़े और परख को लेकर ढेरों हिदायतें भी दीं। एलिज़ाबेथ ने जितना धैर्य शिष्टाचार की इजाज़त देता था, उतना धैर्य दिखाकर सारी बातें सुनीं। सज्जनों के कहने पर, वह तब तक पियानो के आगे टिकी रही जब तक लेडी कैथरीन की गाड़ी सबको घर पहुँचाने के लिए तैयार न हो गई।