हिंदी संस्करण
अध्याय 32
अगली सुबह एलिज़ाबेथ अकेली बैठी जेन को चिट्ठी लिख रही थी। श्रीमती कॉलिन्स और मरिया किसी काम से गाँव गई हुई थीं। तभी दरवाज़े की घंटी बजी — साफ़ इशारा कि कोई मेहमान आया है। एलिज़ाबेथ चौंक पड़ी। गाड़ी की आवाज़ नहीं सुनी थी, इसलिए ज़्यादा उम्मीद यही थी कि लेडी कैथरीन होंगी। बेजा सवालों से बचने के लिए उसने आधी लिखी चिट्ठी समेट दी। ठीक उसी वक़्त दरवाज़ा खुला। हैरानी की बात यह थी कि कमरे में आने वाले मिस्टर डार्सी थे — सिर्फ़ मिस्टर डार्सी, अकेले। मिस्टर डार्सी भी एलिज़ाबेथ को अकेली देखकर चकित-से लगे। उन्होंने कहा कि उन्हें लगा था घर की सारी लेडियाँ मौजूद हैं, और यूँ अचानक चले आने के लिए माफ़ी माँगी।
दोनों बैठ गए। एलिज़ाबेथ ने रोज़िंग्स का हाल-चाल पूछा, फिर कमरा पूरी तरह ख़ामोशी में डूबता-सा लगा। किसी तरह बात का कोई सिरा ढूँढना ज़रूरी था। इस अटपटी घड़ी में उसे याद आया कि हर्टफ़र्डशायर में उसने आख़िरी बार उन्हें कब देखा था। यह जानने की उत्सुकता भी हुई कि उनके पूरे दल के जल्दबाज़ी में चले जाने पर मिस्टर डार्सी क्या कहेंगे। एलिज़ाबेथ बोली। 'मिस्टर डार्सी, पिछले नवंबर में आप सब सचमुच कितनी अचानक नेदरफ़ील्ड से चले गए थे! मिस्टर बिंगली को यह देखकर बड़ी ख़ुशगवार हैरानी हुई होगी कि आप सब एक ही दिन में उनके पीछे-पीछे आ गए। अगर मुझे ठीक याद है, तो वे बस एक दिन पहले निकले थे। आप जब लंदन से चले, तब उम्मीद है वे और उनकी बहनें अच्छी तरह थीं।' 'बिल्कुल अच्छी तरह थे। पूछने के लिए शुक्रिया।' एलिज़ाबेथ को लगा कि अब और कोई जवाब नहीं मिलेगा, तो थोड़ी देर बाद उसने जोड़ा। 'मैंने सुना है, मिस्टर बिंगली का नेदरफ़ील्ड लौटने का इरादा बहुत कम है?' 'मैंने उन्हें ऐसा कहते नहीं सुना। पर आगे शायद वे वहाँ बहुत कम वक़्त बिताएँ। दोस्त बहुत हैं, और उस उम्र में दोस्तों के साथ वादे लगातार बढ़ते ही जाते हैं।' 'अगर मिस्टर बिंगली का वहाँ शायद ही रुकने का इरादा है, तो पड़ोसियों की ख़ातिर ही सही, उन्हें वह घर पूरी तरह छोड़ ही देना चाहिए। तब कोई और परिवार वहाँ बस सकता है। बेशक मिस्टर बिंगली ने वह घर पड़ोसियों की सहूलियत के लिए नहीं लिया होगा। अपनी सहूलियत के लिए ही लिया होगा। तो उसी सोच के हिसाब से वे तय करेंगे कि किराया रखें या छोड़ दें।' 'जैसे ही कोई ख़रीदने लायक़ जागीर मिलेगी, अगर वे वह घर छोड़ दें, तो मुझे हैरानी नहीं होगी', मिस्टर डार्सी ने कहा। एलिज़ाबेथ ने कोई जवाब नहीं दिया। उनके दोस्त की बात और आगे बढ़ाने से उसे डर लगा। और कहने को कुछ न था, तो उसने ठान लिया कि अब बात का सिरा वही ढूँढें।
मिस्टर डार्सी ने उसका मंशा भाँप लिया, और जल्दी ही बोल पड़े, 'यह बड़ा आरामदेह घर लगता है। मैंने सुना है कि जब मिस्टर कॉलिन्स पहली बार हंसफ़र्ड आए थे, तब लेडी कैथरीन ने घर को ख़ूब सँवारा था।' 'ऐसा ही लगता है। और मुझे यक़ीन है, यह मेहरबानी इससे बढ़कर एहसानमंद किसी और पर नहीं की जा सकती थी।' 'मिस्टर कॉलिन्स पत्नी चुनने में बड़े ख़ुशक़िस्मत रहे लगते हैं।' 'जी हाँ, सचमुच। उनके दोस्त ख़ुश हो सकते हैं कि उन्हें उन गिनी-चुनी औरतों में से एक मिली, जो उन्हें क़ुबूल करने लायक़ इतनी समझदार हों, और क़ुबूल करने के बाद उन्हें ख़ुश भी रख सकें। मेरी सहेली बहुत समझदार औरत है — हालाँकि मुझे यक़ीन नहीं कि मिस्टर कॉलिन्स से ब्याह करना उसकी ज़िंदगी का सबसे अक़्लमंद फ़ैसला था। फिर भी वह पूरी तरह ख़ुश दिखती है। और व्यावहारिक नज़र से देखें तो यह बड़ा अच्छा रिश्ता ही है।' 'परिवार और दोस्तों के आने-जाने लायक़ अच्छी दूरी पर बसना, उन्हें भी बड़ी ख़ुशी की बात होगी।' 'आने-जाने लायक़ अच्छी दूरी कहा आपने? यह तो लगभग पचास मील है।' 'अच्छी बनी हुई सड़क हो तो पचास मील की बिसात ही क्या? आधे दिन से कुछ ज़्यादा भर का ही सफ़र है। हाँ, मेरे लिए तो यह बहुत क़रीबी दूरी है।' 'मैं तो कभी इसे इस शादी की ख़ूबियों में गिनती ही नहीं', एलिज़ाबेथ ने बरबस कह दिया। 'और यह भी नहीं कह सकती कि श्रीमती कॉलिन्स अपने परिवार के क़रीब बसी हैं।' मिस्टर डार्सी के होंठों पर एक अजीब-सी मुस्कान आ गई। 'मुझे साफ़ पता चल गया कि आपको हर्टफ़र्डशायर से कितना गहरा लगाव है। लॉन्गबर्न के ठीक पड़ोस से थोड़ा भी बाहर निकलें, तो आपको दूरी लगने लगती है।'
उस मुस्कान का मतलब एलिज़ाबेथ को समझ आ गया-सा लगा। ज़रूर मिस्टर डार्सी सोच रहे होंगे कि उसे जेन और नेदरफ़ील्ड की याद आ रही है। वह चेहरा लाल किए बोली। 'मेरा मतलब यह नहीं कि कोई औरत अपने परिवार के बहुत क़रीब कभी न बसे। दूर और क़रीब का हिसाब सापेक्ष है — कई बातों पर निर्भर करता है। जिनके पास इतनी दौलत हो कि सफ़र का ख़र्च कोई माने ही न रखे, उनके लिए दूरी कोई मसला नहीं। पर यहाँ हालात वैसे नहीं। कॉलिन्स दंपती के पास आराम से गुज़ारा करने भर की आमदनी है, पर इतनी बार-बार सफ़र करने लायक़ नहीं। मुझे पक्का यक़ीन है कि जब तक यह दूरी आधी से कम न हो जाए, मेरी सहेली को अपने परिवार के क़रीब बसा हुआ नहीं कहा जा सकता।' मिस्टर डार्सी ने अपनी कुर्सी उसकी ओर थोड़ी खींच ली। 'आप किसी एक इलाक़े से इतना गहरा लगाव रखने की हालत में नहीं हैं। आप हमेशा-हमेशा के लिए तो लॉन्गबर्न में नहीं रह सकतीं।' एलिज़ाबेथ ने चौंककर उन्हें देखा। मिस्टर डार्सी के भाव में भी कुछ बदलाव आया। उन्होंने कुर्सी पीछे खींची और मेज़ से अख़बार उठा लिया। अख़बार पर सरसरी नज़र डालते हुए, पहले से कहीं ठंडी आवाज़ में पूछा। 'केंट आपको पसंद आया?' दोनों ने इस इलाक़े के बारे में थोड़ी बातें कीं — दोनों ही तरफ़ से शांत और छोटी-छोटी बातें। सैर से लौटी शार्लट और उसकी बहन के आने पर बातचीत जल्दी ही थम गई। दोनों बहनें उन्हें अकेला देखकर हैरान रह गईं। मिस्टर डार्सी ने बताया कि उन्हें ग़लतफ़हमी हुई थी कि घर की सारी लेडियाँ मौजूद हैं, इसी वजह से मिस बेनेट के पास यूँ अचानक चले आए। फिर वे कुछ मिनट और बैठे रहे। किसी से ख़ास कुछ कहे बिना चले गए।
'इसका मतलब क्या हुआ?' उनके जाते ही शार्लट बोली। 'प्यारी एलिज़ा, वे तुमसे मुहब्बत करते हैं, इसमें कोई शक नहीं। वरना इतनी बेतकल्लुफ़ी से हमारे घर चले आने की कोई वजह नहीं बनती।' पर एलिज़ाबेथ ने जब बताया कि वे लगातार चुप्पी साधे रहे, तो शार्लट के चाहने भर से भी मुहब्बत वाली बात कुछ ख़ास जँची नहीं। कई तरह से अंदाज़ा लगाने के बाद, यही मानना पड़ा कि उन दिनों उनके पास और कोई काम ही नहीं था, इसलिए बस चले आए। खेतों में खेले जाने वाले खेल-कूद का मौसम बीत चुका था। घर के अंदर लेडी कैथरीन, किताबें और बिलियर्ड्स की मेज़ थी। पर सज्जन लोग हमेशा घर के भीतर तो नहीं बैठे रह सकते थे। उसी दौर से दोनों चचेरे भाई क़रीब हर रोज़ पादरी-घर तक पैदल चलकर आने लगे। पादरी-घर पास भी था, वहाँ तक टहलना सुहावना भी लगता था, और अंदर रहने वाले लोग भी दिलचस्प थे। सुबह के अलग-अलग वक़्त पर आते — कभी अकेले, कभी साथ-साथ, और कभी-कभी अपनी मौसी के साथ भी। यह सबको साफ़ दिखता था कि कर्नल फ़िट्ज़विलियम को उनके साथ वक़्त बिताना अच्छा लगता है, इसीलिए वे आते हैं। यह भरोसा ज़ाहिर है उनके प्रति स्नेह को और बढ़ा देता। एलिज़ाबेथ को उनके साथ रहकर मिलने वाला सुख, और वे जो साफ़ तारीफ़ भरी नज़रों से देखते, दोनों याद आते। इसी बीच उसे एक समय सबसे भाने वाले जॉर्ज विकहम की याद भी आ जाती। दोनों को तौलें, तो कर्नल फ़िट्ज़विलियम में दिल जीत लेने वाली नरमी ज़रा कम थी। पर उसका मानना था कि सोच ज़्यादा गहरी और जानकारी भी कहीं ज़्यादा होगी। पर मिस्टर डार्सी पादरी-घर इतनी बार क्यों आते थे, यह समझना और मुश्किल था। लोगों से मिलने-जुलने की चाह में तो वे नहीं आते होंगे — क्योंकि अक्सर वे दस-दस मिनट बिना कुछ कहे बैठे रहते। और जब बोलते भी, तो लगता जैसे अपनी मर्ज़ी से नहीं, बल्कि मजबूरी में बोल रहे हों। ख़ुशी से नहीं, बस शिष्टाचार निभाने के लिए झेल रहे हों। सचमुच का जोश उनमें कभी-कभार ही दिखता। श्रीमती कॉलिन्स को समझ नहीं आता था कि उन्हें कैसे लें। कर्नल फ़िट्ज़विलियम कभी-कभार उनके इस सुस्त-से रवैये का मज़ाक़ उड़ाते, जिससे पता चलता कि वे आम तौर पर दूसरे ही इंसान हैं। पर शार्लट को उनकी अब तक की जान-पहचान से यह कभी अंदाज़ा न होता। वह यही मानना चाहती थीं कि मिस्टर डार्सी में यह बदलाव मुहब्बत की वजह से है, और उस मुहब्बत की वजह उनकी सहेली एलिज़ा है। इसलिए उन्होंने असलियत जानने की गंभीर कोशिश की। रोज़िंग्स में जब भी मौक़ा मिलता, और जब भी वे हंसफ़र्ड आते, वे लगातार नज़र रखतीं। पर हाथ कुछ ख़ास न लगा। यह ज़रूर साफ़ था कि वे अपनी सहेली को बड़े ग़ौर से देखते थे। पर उस निगाह में क्या भाव छिपा है, यह परखना मुश्किल था। वे गंभीरता और लगातारपन से उसे देखते रहते। पर उसमें कितनी तारीफ़ छिपी है, यह अक्सर शक में डाल देता। कभी-कभी तो बस ग़ुम-सुम, ख़यालों में खोए-से लगते। शार्लट ने एक-दो बार हल्के-से इशारा किया कि शायद मिस्टर डार्सी का दिल एलिज़ाबेथ की तरफ़ झुका हो। पर एलिज़ाबेथ हमेशा इस ख़याल पर हँस देती। श्रीमती कॉलिन्स को लगा कि इस बात को और आगे बढ़ाना ठीक नहीं होगा — कहीं ऐसी उम्मीद न जग जाए जो निराशा में ही ख़त्म हो। फिर भी उन्हें लगता था कि अगर सहेली को यक़ीन हो जाए कि वह मिस्टर डार्सी को अपने इशारों पर चला सकती है, तो उनके प्रति उसकी नापसंदगी ज़रूर पूरी तरह मिट जाएगी। एलिज़ाबेथ की भलाई के लिए मन-ही-मन योजनाएँ बुनते हुए शार्लट कभी-कभी अपनी सहेली और कर्नल फ़िट्ज़विलियम के ब्याह के बारे में भी सोचतीं। बेशक वे सबसे सुहावने सज्जन थे। साफ़ था कि उन्हें एलिज़ाबेथ पसंद है, और उनकी सामाजिक हैसियत भी बेजोड़ थी। पर इन ख़ूबियों को पलट देने वाली एक बात भी थी — मिस्टर डार्सी के पास गिरजाघर के पदों की सरपरस्ती का काफ़ी अख़्तियार था, पर उनके इस चचेरे भाई के पास ऐसा कुछ भी नहीं था।