हिंदी संस्करण
अध्याय 33
एलिज़ाबेथ को उस पार्क में अनजाने ही मिस्टर डार्सी से एक-दो बार नहीं, बल्कि कई बार सामना हो चुका था। जिस जगह और कोई नहीं आता था, वहीं क़िस्मत उन्हें ला पटकती थी — यह बात उसे बड़ी खटकती। दोबारा ऐसा न हो, इसलिए पहली ही मुलाक़ात में उसने जता दिया था कि यही उसकी पसंदीदा जगह है। फिर भी दूसरी मुलाक़ात कैसे हो गई? सचमुच अजीब बात थी। और फिर तीसरी बार भी हो गई। लगता जैसे वे जान-बूझकर तंग कर रहे हों, या ख़ुद अपनी मर्ज़ी से यह तकलीफ़ मोल ले रहे हों। इन मुलाक़ातों में डार्सी बस रस्मी हाल-चाल पूछकर, अटपटी चुप्पी के साथ चले नहीं जाते थे। उन्हें लगता, वापस मुड़कर उसके साथ चलना ज़रूरी है। वे ज़्यादा बोलते नहीं थे। एलिज़ाबेथ भी जान-बूझकर न बात छेड़ती, न ध्यान से सुनती। पर तीसरी बार मिलने पर उसे लगा कि वे कुछ अजीब-से सवाल पूछ रहे हैं — जिनका आपस में कोई मेल नहीं। क्या उसे हंसफ़र्ड में मज़ा आ रहा है, क्या उसे अकेले टहलना पसंद है, क्या उसे लगता है कि मिस्टर और श्रीमती कॉलिन्स ख़ुश हैं — यही सब पूछा। रोज़िंग्स की बात चलते-चलते जब एलिज़ाबेथ ने कहा कि उस हवेली की बनावट का उसे ज़्यादा पता नहीं, तो वे मानो यह सोचने लगे कि अगली बार केंट आने पर वह वहीं ठहरेगी। उनकी बात में यही आशय छिपा लगा। क्या उनका इशारा कर्नल फ़िट्ज़विलियम की तरफ़ था? कोई मतलब था तो शायद उधर से कुछ होने का इशारा ही रहा होगा — उसने यही सोचा। इस ख़याल से थोड़ा असहज होकर एलिज़ाबेथ पादरी-घर के सामने वाले फाटक तक पहुँचते ही बहुत ख़ुश हो गई।
एक दिन एलिज़ाबेथ टहलते हुए जेन की भेजी आख़िरी चिट्ठी दोबारा पढ़ रही थी। कुछ पंक्तियों पर वह ग़ौर कर रही थी, जो बता रही थीं कि जेन ने यह चिट्ठी अच्छे मन से नहीं लिखी थी। इस बार फिर मिस्टर डार्सी से टकराकर चौंकने के बजाय, नज़र उठाई तो कर्नल फ़िट्ज़विलियम सामने से आते दिखे। एलिज़ाबेथ ने झटपट चिट्ठी समेटी और ज़बरदस्ती मुस्कुराते हुए बोली। 'मुझे नहीं पता था कि आप भी इसी रास्ते पर टहलते हैं।' 'पार्क का एक चक्कर लगा रहा था,' उन्होंने जवाब दिया। 'हर साल यही करता हूँ। सोचा था, आख़िर में पादरी-घर होते हुए जाऊँगा। आप और आगे जाएँगी?' 'नहीं। मैं तो अभी लौटने ही वाली थी।' और सच में एलिज़ाबेथ मुड़ गई। दोनों साथ-साथ पादरी-घर की तरफ़ चल पड़े।
'क्या सचमुच शनिवार को केंट छोड़ रहे हैं?' उसने पूछा। 'हाँ। बशर्ते डार्सी फिर से टाल न दें। पर मुझे तो उनकी मर्ज़ी माननी पड़ती है। वे जैसा चाहते हैं, वैसा ही तारीख़ें तय करते हैं।' 'तारीख़ें भले न तय कर सकें, कम-से-कम मन-मुताबिक़ चुनने का हक़ तो जी भरकर भोगते होंगे। मेरी जानकारी में, मिस्टर डार्सी जितना अपनी मर्ज़ी चलाने का हक़ भोगने वाला कोई और नहीं।' 'अपनी मर्ज़ी चलाना उन्हें सचमुच बहुत पसंद है,' कर्नल फ़िट्ज़विलियम ने जवाब दिया। 'पर यह तो हर किसी को पसंद है, है न? बस उनके पास मर्ज़ी थोपने के साधन औरों से ज़्यादा हैं। वे अमीर हैं, और बहुत-से लोग ग़रीब हैं। यह मैं दिल से महसूस करके कह रहा हूँ। आप जानती ही हैं, छोटे बेटे को संयम बरतना और दूसरों पर निर्भर रहना सीखना पड़ता है।' 'मुझे तो लगता है, किसी अर्ल के छोटे बेटे को इन दोनों बातों का शायद ही कभी पता चलता होगा। अब सच-सच बताइए, आपने कब संयम बरता या किसी पर निर्भर रहे? पैसे की कमी से कब कहीं जाने से रुके, या कुछ चाहते हुए भी न ख़रीद पाए?' 'बात तो सीधी दिल पर लगी। ऐसी परेशानियाँ ज़्यादा झेली हों, यह तो मैं नहीं कह सकता। पर बड़ी बातों में पैसे की कमी सचमुच सता सकती है। घर के छोटे बेटे मन-पसंद जीवनसाथी से ब्याह नहीं कर सकते।' 'बशर्ते मन-पसंद कोई दौलतमंद औरत ही निकल आए। मेरे ख़याल से ऐसा अक्सर होता ही है।' 'ख़र्च करने की आदतों की वजह से हम दूसरों पर बहुत ज़्यादा निर्भर हो जाते हैं। मेरी जैसी हैसियत वाले बहुत कम लोग पैसे की परवाह किए बिना ब्याह करने की गुंजाइश रखते हैं।' 'क्या यह मेरे बारे में कह रहे हैं?' एलिज़ाबेथ ने सोचा। इस ख़याल से उसका चेहरा लाल हो गया। पर जल्दी ही सँभलकर उसने हल्की आवाज़ में कहा, 'अच्छा, तो किसी अर्ल के छोटे बेटे की क़ीमत आम तौर पर कितनी लगती है? जब तक बड़े भाई सचमुच बहुत बीमार न हों, आप पचास हज़ार पाउंड से ज़्यादा की उम्मीद तो नहीं रखते होंगे।' उन्होंने भी उसी अंदाज़ में जवाब दिया, और बात यहीं ख़त्म हो गई। एलिज़ाबेथ को डर था कि चुप्पी देखकर वे सोच सकते हैं — पिछली बातों का उस पर कुछ असर हुआ है। इसलिए वह चुप्पी तोड़ना चाहती थी। कुछ देर बाद उसने कहा।
'लगता है, आपके चचेरे भाई आपको यहाँ ज़्यादातर इसलिए साथ लाते हैं ताकि कोई ऐसा साथ रहे जिसे वे जैसा चाहें हुक्म दे सकें। समझ नहीं आता, ब्याह करके यह सहूलियत हमेशा के लिए क्यों नहीं पा लेते। पर शायद अभी उनकी बहन ही यह काम पूरी तरह निभा रही हैं। सिर्फ़ उन्हीं की देखभाल उनके ज़िम्मे है, तो जो चाहें वही कर सकते होंगे।' 'नहीं,' कर्नल फ़िट्ज़विलियम बोले। 'यह सहूलियत मुझे भी बाँटनी पड़ती है। मैं भी मिस डार्सी का सह-अभिभावक हूँ।' 'सच में? तो फिर कैसे अभिभावक हैं आप? जिस लड़की की देखभाल करते हैं, वह ज़्यादा परेशान तो नहीं करतीं? उस उम्र की जवान लड़कियाँ कभी-कभी सँभालनी मुश्किल हो जाती हैं। अगर उनमें भी सच में डार्सी घराने का मिज़ाज हो, तो शायद वे भी अपनी मर्ज़ी चलाना पसंद करती हों।' यह कहते हुए एलिज़ाबेथ को लगा कि वे उसे ग़ौर से देख रहे हैं। उन्होंने फ़ौरन पूछा, वह क्यों सोचती है कि मिस डार्सी दोनों अभिभावकों को परेशान कर सकती हैं। उनके पूछने के अंदाज़ से एलिज़ाबेथ को यक़ीन हो गया कि वह किसी न किसी तरह सच के बहुत क़रीब पहुँच गई है। उसने फ़ौरन जवाब दिया। 'डरने की कोई ज़रूरत नहीं। उस लड़की के बारे में मैंने कभी कोई बुरी बात नहीं सुनी। दुनिया की सबसे सीधी-सादी लड़कियों में से एक होंगी। मेरी कुछ जान-पहचान की महिलाएँ, श्रीमती हर्स्ट और मिस बिंगली, तो उन्हें बहुत पसंद करती हैं। आपने कहा था न, आप दोनों को जानते हैं?' 'थोड़ा-बहुत जानता हूँ। उनके भाई बड़े ख़ुशमिज़ाज और भले आदमी हैं। डार्सी के बहुत क़रीबी दोस्त भी।' 'हाँ, यह तो है,' एलिज़ाबेथ ने रूखेपन से कहा। 'मिस्टर डार्सी मिस्टर बिंगली पर ख़ास मेहरबान रहते हैं। बड़ी बारीकी से उनकी देखभाल करते हैं।' 'देखभाल! हाँ, जिस मामले में बिंगली को सबसे ज़्यादा देखभाल की ज़रूरत थी, उसमें डार्सी सचमुच पूरी देखभाल करते नज़र आते हैं। यहाँ आते वक़्त डार्सी ने जो बात बताई, उससे लगता है कि बिंगली को उनका बहुत एहसानमंद होना चाहिए। पर यह मानने की कोई ठोस वजह नहीं कि वह बात बिंगली के बारे में ही थी, इसलिए मुझे उनसे माफ़ी माँगनी चाहिए। यह सब मेरा अपना अंदाज़ा भर है।'
'क्या मतलब आपका?' 'यह ज़ाहिर है कि डार्सी नहीं चाहेंगे कि यह बात दूर-दूर तक फैले। अगर उस ख़ातून के घरवालों तक ख़बर पहुँच जाए, तो उन्हें बुरा लगेगा।' 'भरोसा रखिए, मैं यह बात किसी से भी नहीं कहूँगी।' 'और यह भी याद रखिए, यह मानने की ज़्यादा वजह नहीं कि वह बिंगली ही थे। डार्सी ने बस इतना ही कहा था — हाल ही में उन्होंने एक दोस्त को बहुत नासमझी भरे ब्याह से पैदा होने वाली मुसीबत से बचाया है, और इस पर उन्हें ख़ुद पर फ़ख़्र है। नाम या और कोई ब्यौरा उन्होंने बिल्कुल नहीं बताया। मैंने बिंगली का अंदाज़ा इसलिए लगाया क्योंकि मुझे लगा, वे ऐसी मुसीबत में फँसने वाले जवान आदमी हैं। और यह भी जानता हूँ कि दोनों पूरी पिछली गर्मियाँ साथ रहे थे।' 'मिस्टर डार्सी ने यह भी बताया कि वे बीच में क्यों पड़े?' 'सुना है, उस ख़ातून के ख़िलाफ़ कुछ बहुत बड़ी वजहें थीं।' 'तो फिर किस तरकीब से उन दोनों को अलग किया?' 'अपनी चली हुई चाल के बारे में उन्होंने मुझे कुछ नहीं बताया,' फ़िट्ज़विलियम मुस्कुराते हुए बोले। 'मुझे तो बस इतना ही बताया है, जितना अभी आपसे कह चुका हूँ।'
एलिज़ाबेथ बिना कुछ कहे चलती रही। उसके सीने में ग़ुस्सा उमड़ने लगा। कुछ देर उसे देखते रहने के बाद फ़िट्ज़विलियम ने पूछा, वह इतनी सोच में क्यों डूबी है। 'आपने जो बताया, उसी के बारे में सोच रही हूँ,' उसने कहा। 'आपके चचेरे भाई का यह बरताव मुझे पसंद नहीं आया। उन्हें किस हैसियत से किसी और के बारे में फ़ैसला सुनाने का हक़ मिल गया?' 'लगता है, आप कहना चाहती हैं कि उनका बीच में पड़ना कुछ ज़्यादा ही हो गया?' 'समझ नहीं आता, मिस्टर डार्सी को अपने दोस्त की मुहब्बत सही है या नहीं, यह तय करने का क्या हक़ था। और यह भी समझ नहीं आता कि वे अकेले ही फ़ैसला करके अपने दोस्त को कैसे ख़ुश रहना है, यह तय क्यों करें, हुक्म क्यों दें। पर,' एलिज़ाबेथ ख़ुद को सँभालते हुए बोली, 'मुझे तो सारी बातें मालूम ही नहीं, तो दोष देना भी वाजिब नहीं होगा। और यह मान लेना भी ठीक नहीं कि दोनों के बीच सच में गहरी मुहब्बत थी।' 'ऐसा अंदाज़ा लगाना कोई बहुत अजीब बात नहीं,' फ़िट्ज़विलियम ने कहा। 'पर तब मेरे चचेरे भाई की जीत की शान बहुत घट जाती है।' यह बात मज़ाक़ में कही गई थी। पर एलिज़ाबेथ को लगा, यह मानो मिस्टर डार्सी की सटीक तस्वीर खींच गई है। उसकी हिम्मत जवाब देने की न हुई। इसलिए उसने अचानक बात बदल दी, और पादरी-घर पहुँचने तक फ़ालतू बातें करती रही। मेहमान के जाते ही एलिज़ाबेथ अपने कमरे में जा बैठी। अब वह बिना किसी रुकावट के सुनी हुई बातों पर सोच सकती थी। ये बातें उससे जुड़े लोगों के सिवा किसी और के बारे में हो ही नहीं सकती थीं। मिस्टर डार्सी जिस तरह किसी को मन-मुताबिक़ चला सकते हों, ऐसा आदमी दुनिया में दो नहीं हो सकते। वे मिस्टर बिंगली और जेन को अलग करने के काम में ज़रूर शामिल थे। इसमें उसे कभी शक नहीं रहा था। पर अब तक वह यही मानती आई थी कि पूरी योजना बनाने और अंजाम देने वाली हमेशा मिस बिंगली ही रहीं। पर अगर उनका ख़ुद का घमंड उन्हें धोखा नहीं दे रहा, तो असली वजह वही थे। उनके अभिमान और मनमौजीपन ने ही जेन को वह सारा दुख दिया, जो वह तब झेल रही थी और अब भी झेल रही है। दुनिया की सबसे नरमदिल और भली लड़की से उन्होंने कुछ समय के लिए ख़ुशी की हर उम्मीद छीन ली थी। उन्होंने कितना लंबा नुक़सान पहुँचाया, यह कोई नहीं बता सकता था।
'उस ख़ातून के ख़िलाफ़ कुछ बहुत बड़ी वजहें थीं।' यह कर्नल फ़िट्ज़विलियम की कही बात थी। वे बड़ी वजहें शायद यही होंगी कि एक मौसा गाँव के वकील हैं और एक मामा लंदन में व्यापार करते हैं। 'जेन के बारे में तो,' वह चिल्ला उठी, 'कोई एक वजह भी नहीं है। सीधी-सादी और भली लड़की और क्या! समझ भी शानदार, स्वभाव पर क़ाबू भी पूरा, और लोगों को अपनी ओर खींचने वाला बरताव भी। पिताजी को लेकर भी दोष नहीं दिया जा सकता। थोड़े अजीब ज़रूर हैं, पर उनके पास ऐसी काबिलियत है जिसे मिस्टर डार्सी ख़ुद भी हल्के में नहीं ले सकते। और ऐसी इज़्ज़त के लायक़ शराफ़त भी, जिस तक शायद वे कभी न पहुँच पाएँ।' माँ के बारे में सोचते ही उसका यक़ीन थोड़ा डगमगाया। पर उस तरफ़ से कोई भी एतराज़ मिस्टर डार्सी पर सचमुच इतना असर डाल गया होगा, यह उसने मानने से इनकार कर दिया। एलिज़ाबेथ को यक़ीन हो गया कि उनका घमंड दोस्त के रिश्तेदारों की नासमझी से कम, और उनके पास बड़े रुतबे की कमी से ज़्यादा आहत हुआ होगा। आख़िर में उसने यही मान लिया कि एक तरफ़ उन्हें सबसे बुरी क़िस्म के घमंड ने जकड़ रखा था, और दूसरी तरफ़ वे मिस्टर बिंगली को अपनी बहन के पास ही बनाए रखना चाहते थे। इस उथल-पुथल और आँसुओं से उसे सिरदर्द हो गया। शाम क़रीब आते-आते दर्द और बढ़ता गया। मिस्टर डार्सी से मिलने की कोई इच्छा न होने की वजह से यह दर्द और गहरा गया, तो एलिज़ाबेथ ने रोज़िंग्स में चचेरे भाइयों के साथ चाय पीने का जो वादा था, वहाँ न जाने का फ़ैसला किया। श्रीमती कॉलिन्स ने देखा कि वह सचमुच बीमार है, तो उन्होंने ज़बरदस्ती चलने को नहीं कहा। जहाँ तक हो सका, उन्होंने अपने पति को भी उकसाने से रोके रखा। पर मिस्टर कॉलिन्स यह डर छुपा नहीं पाए कि एलिज़ाबेथ के घर रुक जाने से लेडी कैथरीन को थोड़ी नाराज़गी हो सकती है।